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Income Tax: कंपनियां एंप्लॉयीज से क्यों मांग रही टैक्स-सेविंग्स प्रूफ, प्रूफ नहीं देने पर क्या होगा?

इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में कई तरह के इनवेस्टमेंट और कुछ खास तरह के खर्च पर डिडक्शन का लाभ मिलता है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी और सेक्शन 80डी के तहत मिलने वाले डिडक्शन इसके उदाहरण हैं। डिडक्शन क्लेम करने से टैक्सपेयर्स का टैक्स घट जाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 02, 2025 पर 12:39 PM
Income Tax: कंपनियां एंप्लॉयीज से क्यों मांग रही टैक्स-सेविंग्स प्रूफ, प्रूफ नहीं देने पर क्या होगा?
सेक्शन 80सी के तहत एक दर्जन से ज्यादा इनवेस्टमेंट के विकल्प आते हैं। इनमें पीपीएफ, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी आदि शामिल हैं।

कंपनियां अपने एंप्लॉयीज को टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट का प्रूफ देने को कह रही हैं। ज्यादातर कंपनियों ने इसके लिए 15 जनवरी की डेडलाइन तय की है। एंप्लॉयीज को फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान टैक्स-सेविंग्स का प्रूफ देना है। टैक्स-सेविंग्स प्रूफ कंपनियां क्यों मांग रही हैं? प्रूफ नहीं देने पर क्या होगा? अगर यह प्रूफ डेडलाइन के बाद दिया जाता है तो क्या होगा? आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं।

टैक्स-सेविंग्स का मतलब क्या है?

इनकम टैक्स (Income Tax) की ओल्ड रीजीम में कई तरह के इनवेस्टमेंट और कुछ खास तरह के खर्च पर डिडक्शन का लाभ मिलता है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी और सेक्शन 80डी के तहत मिलने वाले डिडक्शन इसके उदाहरण हैं। डिडक्शन क्लेम करने से टैक्सपेयर्स का टैक्स घट जाता है। सेक्शन 80सी के तहत एक दर्जन से ज्यादा इनवेस्टमेंट के विकल्प आते हैं। इनमें पीपीएफ, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी आदि शामिल हैं। इसके अलावा दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत भी इस सेक्शन के तहत है। सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन क्लेन करने की इजाजत है।

कंपनियां टैक्स-सेविंग्स  प्रूफ क्यों मांग रही?

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