Income Tax: एमएनसी कंपनियां एंप्लॉयीज को फॉरेन एसेट्स डिसक्लोज करने की दे रही सलाह, जानिए वजह

ऐसे एंप्लॉयीज जिनके पास ESOPs, RSU या विदेशी कंपनियों के शेयर्स हैं, उन्हें इस बारे में जानकारी देना जरूरी है। इनसे उन्हें कोई इनकम हुई है तो भी उन्हें जानकारी देनी होगी। इसके अलावा भारत से बाहर हुई कोई इनकम कितनी भी छोटी हो, उसके बारे में रिटर्न में बताना जरूरी है

अपडेटेड Dec 22, 2025 पर 9:01 PM
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कोई एंप्लॉयीज अगर फॉरेन एसेट्स या इनकम को डिसक्लोज नहीं करता है तो ब्लैक मनी कानून के तहत उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

भारत में मौजूद कई मल्टीनेशनल कंपनियां (एमएनसी) अपने एंप्लॉयीज को अपने फॉरेन एसेट्स और इनकम को डिसक्लोज करने की सलाह दे रही हैं। इसकी वजह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से भेजा जा रहा मेल है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) अपने एक खास कैंपेन के तहत इस बारे में टैक्सपेयर्स को बता रहा है। इसका मकसद वॉलेंटरी कंप्लांयस को बढ़ावा देना है।

डिपार्टमेंट के पास टैक्सपेयर्स की हर जानकारी उपलब्ध

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सिस्टम की तरफ से फॉरेन फाइनेंशियल डेटा की मैचिंग के बाद इस तरह के नोटिस भेजे जा रहे हैं। डिपार्टमेंट के सिस्टम को अब सीधे दूसरे देशों और विदेशी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से इंफॉर्मेशन मिल रही है।


छोटी विदेशी इनकम को भी डिसक्लोज करना अनिवार्य

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के फाउंडिंग पार्टनर हिमांक सिंगला ने कहा, "ऐसे एंप्लॉयीज जिनके पास ESOPs, RSU या विदेशी कंपनियों के शेयर्स हैं, उन्हें इस बारे में जानकारी देना जरूरी है। इनसे उन्हें कोई इनकम हुई है तो भी उन्हें जानकारी देनी होगी। इसके अलावा भारत से बाहर हुई कोई इनकम कितनी भी छोटी हो, उसके बारे में रिटर्न में बताना जरूरी है। इसमें कुछ डॉलर का डिविडेंड भी शामिल है।"

विदेश से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तक पहुंच रही जानकारी

सिंगला ने कहा, "टैक्स समझौतों (Tax Treaties) के तहत इंडिया ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन (AEOI) का हिस्सा है। इससे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को नियमित रूप से इंडियन रेजिडेंट्स के विदेशी एसेट्स या इनकम के बारे में जानकारी मिलती रहती है। कई टैक्सपेयर्स यह सोचते हैं कि ये जानकारियां टैक्स अथॉरिटीज तक नहीं पहुंचेंगी। लेकिन ऐसा सोचना गलत है।"

इनकम बताना भूल गए हैं तो रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने का मौका

अगर टैक्सपेयर्स अपने ऑरिजिनल आईटीआर में अपने फॉरेन एसेट्स या इनकम के बारे में बताना भूल गया है तो उसके पास रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर इस गलती को ठीक करने का मौका है। इनकम टैक्स रिटर्न को रिवाइज करने या बिलेटेड रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर, 2025 है।

इनकम डिसक्लोज नहीं करने पर होगी कड़ी कार्रवाई

कोई एंप्लॉयीज अगर फॉरेन एसेट्स या इनकम को डिसक्लोज नहीं करता है तो ब्लैक मनी कानून के तहत उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उस पर 10 लाख का जुर्माना लग सकता है। कुछ गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त शिड्यूल एफए, एफएसआई और टीआर में इस बारे में जानकारी दे सकता है।

बिलेटेड रिटर्न और रिवाइज्ड रिटर्न की डेडलाइन 31 दिसंबर

बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्सपेयर्स को ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा। फिर 'ई-फाइल' पर क्लिक कर 'इनकम टैक्स रिटर्न' को सेलेक्ट करना होगा। उसके बाद 'फाइल इनकम टैक्स रिटर्न को सेलेक्ट करना होगा'। उसके बाद संबंधित एसेसमेंट ईयर का चुनाव करना होगा। फाइलिंग मोज में 'ऑनलाइन' को सेलेक्ट करना होगा। फिर 'स्टार्ट न्यू फाइलिंग पर क्लिक करना होगा।' उसके बाद सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना होगा। फिर सभी डिटेल्स को वेरिफाय करना होगना। फिर सेक्शन 139(4) (बिलेटेड रिटर्न) को सेलेक्ट करना होगा। फिर अप्लिकेबल टैक्स चुकाने के बाद प्रोसेस कंप्लिट करना होगा।

 

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