Influencer marketing: भारत में बढ़ रहा इन्फ्लुएंसर का जलवा, ₹10000 करोड़ के पार पहुंचा बाजार

Influencer marketing: भारत में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री का असली साइज 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है। KlugKlug की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर खर्च एजेंसियों से बाहर सीधे ब्रांड और क्रिएटर के बीच हो रहा है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Dec 09, 2025 पर 11:18 PM
Story continues below Advertisement
भारत का तेजी से बढ़ता Direct-To-Consumer (D2C) सेक्टर भी खर्च के पैटर्न को बदल रहा है।

Influencer marketing: इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग SaaS प्लेटफॉर्म KlugKlug के एनालिसिस के मुताबिक, भारत में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री में वास्तविक तौर पर ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का खर्च हो चुका है। यह आंकड़ा अब तक बाजार में बताए जाते रहे ₹3,000-₹4,000 करोड़ के अनुमान से कहीं बड़ा है।

असल खर्च अनुमान से कई गुना ज्यादा

KlugKlug के को-फाउंडर और CEO कल्याण कुमार के मुताबिक, इंडस्ट्री के साइज को अब तक काफी कम आंका जाता रहा है। वजह यह है कि ज्यादातर आंकड़े सिर्फ उस खर्च को पकड़ते हैं, जो एजेंसियों और संगठित चैनलों के जरिए होता है।


75% खर्च सीधे ब्रांड और क्रिएटर के बीच

रिपोर्ट बताती है कि भारत में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर होने वाले कुल खर्च का सिर्फ 25% हिस्सा ही ट्रैक किए जाने वाले और संगठित चैनलों से गुजरता है। बाकी करीब 75% खर्च सीधे ब्रांड्स और क्रिएटर्स के बीच होता है, जो पारंपरिक ट्रैकिंग सिस्टम में दिखाई ही नहीं देता।

माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर निभा रहे बड़ी भूमिका

KlugKlug का कहना है कि भारत की क्रिएटर इकॉनमी पारंपरिक डेटा सिस्टम से कहीं बाहर काम कर रही है। हजारों माइक्रो और नैनो-इन्फ्लुएंसर ऐसे हैं, जो मिलकर ब्रांड्स के लिए बड़ा निवेश खींच रहे हैं, लेकिन उनका असर अक्सर आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाता।

एजेंसियां सिर्फ ‘टिप ऑफ द आइसबर्ग’

रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग एजेंसियां ऐसी हैं, जिनका सालाना Revenue ₹20 करोड़ से ज्यादा है। हालांकि, यह सिर्फ संगठित सेक्टर की तस्वीर है, जबकि पूरा इकोसिस्टम इससे कहीं बड़ा है।

D2C ब्रांड्स बदल रहे खर्च का तरीका

भारत का तेजी से बढ़ता Direct-To-Consumer (D2C) सेक्टर भी खर्च के पैटर्न को बदल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से ज्यादा D2C ब्रांड्स एजेंसियों के बजाय इन-हाउस क्रिएटर टीम्स के जरिए सालाना ₹20 करोड़ से ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

बार्टर और प्रोडक्ट सीडिंग से बन रही बड़ी वैल्यू

KlugKlug का कहना है कि फाउंडर-लेड इनिशिएटिव्स, प्रोडक्ट सीडिंग और बार्टर आधारित कोलैबोरेशन से ब्रांड्स को भारी Earned Media Value (EMV) मिलती है। लेकिन क्योंकि इसमें सीधे पैसे का लेन-देन नहीं दिखता, इसलिए ये खर्च पारंपरिक विज्ञापन मॉडल में दर्ज नहीं हो पाते।

डेटा की कमी से बनती रही गलत तस्वीर

Klug Tech Private Limited के को-फाउंडर और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर वैभव गुप्ता ने कहा कि भारत में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के आंकड़ों में बड़ा अंतर है। क्योंकि इंडस्ट्री लंबे समय तक सिर्फ एजेंसी-आधारित और सीमित डेटा पर निर्भर रही, जो पूरी तस्वीर दिखाने में नाकाम रहा।

AI के दौर में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का नया चेहरा

कल्याण कुमार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और प्रिसिजन टारगेटिंग के दौर में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पूरी तरह बदल चुकी है। उनके मुताबिक, 'यह सिर्फ ग्रोथ नहीं है, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव है, जहां कॉमर्स, कंटेंट और कंज्यूमर इंटेंट एक-दूसरे से सीधे जुड़ रहे हैं।'

ITR Filing 2025: सोशल मीडिया से कमाई करने वालों के लिए नया कोड, इन्फ्लुएंसर्स को ऐसे फाइल करना होगा रिटर्न

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।