भारत और अमेरिका कई सेक्टर्स पर टैरिफ घटाने को तैयार हो गए हैं। इनमें इंडस्ट्रियल गुड्स, एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स, जेम्स और हवाई जहाज के पार्ट्स शामिल हैं। दोनों देशों के अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट के फ्रेमवर्क में इन सेक्टर्स का उल्लेख है। दोनों देशों ने संयुक्त रूप से 7 फरवरी को इसका ऐलान किया।
अमेरिका इंडियन गुड्स पर टैरिफ घटाकर 18% करेगा
इस फ्रेमवर्क में भारत से निर्यात होने वाली चीजों पर रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने की बात कही गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत और अमेरिका एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए उत्सुक हैं। इससे द्विपक्षीय व्यापार में कई दूसरे प्रोडक्ट्स को भी टैरिफ में रियायत के उपाय शामिल होंगे।
भारत-अमेरिका डील से निवेश के नए मौके आए सामने
भारत-अमेरिका का अंतरिम व्यापार समझौता न सिर्फ दोनों देशों के व्यापार के लिए बड़ा मायने रखता है बल्कि यह इनवेस्टर्स के लिहाज भी काफी अहम है। कई सेक्टर्स पर इस अंतरिम समझौते का असर पड़ेगा। सवाल है कि इनवेस्टर्स को इन सेक्टर्स में निवेश के मौके का फायदा किस तरह से उठाना चाहिए?
कैपिटल गुड्स और टेक्सटाइल्स सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा
Trunor Enterprises के सीएफपी लेफ्टिनेंट कर्नल रोचक बख्शी के मुताबिक, "जिन सेक्टर्स में पहले कमजोरी देखने को मिली थी, उनमें नई दिलचस्पी दिख रही है।" उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील का सबसे ज्यादा फायदा उन कैपिटल गुड्स और टेक्सटाइल्स कंपनियों को होगा, जो अमेरिका को एक्सपोर्ट करती हैं।
अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से टेक्सटाइल्स सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान
आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड में म्यूचुअल फंड की हेड श्वेता रजनी ने कहा कि अमेरिका के भारत पर टैरिफ लगाने का सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल्स पर पड़ा था। उन्होंने कहा, "इंडियन टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स का बिजनेस करीब 35-40 फीसदी तक घट गया था। प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए ये एक्सपोर्टर्स 15-25 फीसदी तक डिस्काउंट देने को मजबूर हो गए थे।"
भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में फिर से बढ़ जाएगी धाक
अब टैरिफ घटकर 18 फीसदी पर आ जाने से इंडियन प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धी क्षमता फिर से बढ़ जाएगी। खासकर वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के प्रोडक्ट्स का वे मुकाबला कर सकेंगे।
इनवेस्टर्स ऐसे उठा सकते हैं निवेश के मौके का फायदा
इनवेस्टर्स सेक्टोरल फंड्स, इंडिविजुअल स्टॉक्स या डायवर्सिफायड म्यूचुअल फंड्स के जरिए इस मौके का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन, उन्हें निवेश में कुछ चीजों का ध्यान रखना होगा। बख्शी ने कहा, "अगर कोई इनवेस्टर रिसर्च पर ज्यादा समय खर्च नहीं कर सकता है तो उसके लिए डायवर्सिफायड म्यूचुअल फंड्स के जरिए निवेश करना ठीक रहेगा। इससे पैसे को निवेश करने का फैसला उन प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स पर होगी, जिनके पीछे बड़ी रिसर्च टीम होती है।"