मैं लोन का गारंटर बनना चाहता हूं, क्या इसका असर मेरे CIBIL स्कोर पर पड़ सकता है?

जब आप गारंटर बनते हैं तो लोन अकाउंट आपके क्रेडिट प्रोफाइल से लिंक्ड हो जाता है। यह सच है कि EMI लोन लेने वाला व्यक्ति चुकाता है। लेकिन, अगर किसी वजह से वह ईएमआई चुकाना बंद कर देता है तो लोन चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर पर आ जाती है

अपडेटेड Feb 06, 2026 पर 6:09 PM
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अगर EMI के पेमेंट में दिक्कत शुरू होती है या लोन का रीपेमेंट ठीक तरह से नहीं होता है तो उसका निगेटिव असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर पड़ना शुरू हो जाता है।

अक्सर किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने का रिक्वेस्ट आता है। ज्यादातर लोग इस बारे में ज्यादा सोचते नहीं हैं। वे हां कर देते हैं। लोन लेने वाला व्यक्ति भी उन्हें आश्वस्त करने के लिए कहता है कि यह सिर्फ एक औपचारिकता है। सवाल है कि क्या बगैर सोचे-समझे किसी का गारंटर बनना ठीक है?

लोन अकाउंट गारंटर के क्रेडिट प्रोफाइल से लिंक हो जाता है

जब आप गारंटर बनते हैं तो लोन अकाउंट आपके क्रेडिट प्रोफाइल से लिंक्ड हो जाता है। यह सच है कि EMI लोन लेने वाला व्यक्ति चुकाता है। लेकिन, अगर किसी वजह से वह ईएमआई चुकाना बंद कर देता है तो लोन चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर पर आ जाती है। बैंक या एनबीएफसी गारंटर को एक बैक-अप के रूप देखते हैं।


लोन का रीपेमेंट सही तरीके से जारी रहने पर सिबिल पर नहीं पड़ता असर

अगर लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर EMI का पेमेंट करता है और लोन अकाउंट को लेकर किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है तो गारंटर के सिबिल स्कोर या क्रेडिट स्कोर पर किसी तरह का असर नहीं पड़ता है। लेकिन, अगर EMI के पेमेंट में दिक्कत शुरू होती है या लोन का रीपेमेंट ठीक तरह से नहीं होता है तो उसका निगेटिव असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर पड़ना शुरू हो जाता है।

EMI पेमेंट सही तरीके से नहीं होने पर सिबिल पर पड़ता है असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही गारंटर खुद के लोन का रीपेमेंट समय पर करता है, लेकिन वह जिस व्यक्ति के लोन का गारंटर बनता है, उसके EMI नहीं चुकाने पर गारंटर का क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है। इस बात को ज्यादातर लोग नहीं समझते हैं। ऐसी स्थिति में किसी दूसरे व्यक्ति की गलती का असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है।

गारंटर की लोन की एलिजिबिलिटी पर भी पड़ सकता है असर

मामला यही खत्म नहीं होता है। अगर लोन लेने लेने वाला व्यक्ति समय पर लोन का पेमेंट करता है तो भी लोन अकाउंट का असर भविष्य में लोन लेने की गारंटर की एलिजिबिलिटी पर पड़ सकता है। जब गारंटर कार लोन या होम लोन के लिए अप्लाई करता है तो बैंक उसकी सभी फाइनेंशियल जिम्मेदारियों को चेक करता है। कुछ बैंक या एनबीएफसी ऐसे लोन अकाउंट को गारंटर की लायबिलिटी मानते हैं। इसका मतलब है कि वे यह मानते हैं कि किसी दिन गारंटर को इसे चुकाना पड़ सकता है। इसका सीधा असर गारंटर की लोन लेने की एलिजिबिलिटी पर पड़ता है।

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एक बार हां करने के बाद गारंटर पीछे नहीं हट सकता

यह भी समझना जरूरी है कि एक बार जब किसी लोन का गारंटर बन जाते हैं तो फिर बाद में आप इससे पीछे नहीं हट सकते। आपकी जिम्मेदारी तब तक बनी रहती है जब तक लोन पूरी तरह से चुका नहीं दिया जाता है। इसलिए लोन का गारंटर बनने का फैसला आपको सोच-समझकर लेना चाहिए। आपको यह सोचकर इस बारे में फैसला लेना चाहिए कि अगर लोन लेने वाला व्यक्ति लोन चुकाना बंद कर देता है तो आपको दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

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