SIP Investment: FD से हटकर अब SIP की तरफ जा रहे भारतीय परिवार, जानिए क्या है इसकी वजह

SIP Investment: भारतीय परिवार अब पारंपरिक FD से हटकर SIP की ओर बढ़ रहे हैं। 9.92 करोड़ खातों और 16.36 लाख करोड़ एसेट के साथ यह बदलाव इनवेस्टमेंट कल्चर में बड़ा परिवर्तन दिखाता है। यहां अनुशासन, कंपाउंडिंग और महंगाई से बेहतर रिटर्न प्राथमिकता बन रहे हैं। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Apr 01, 2026 पर 11:18 PM
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नियमित SIP इनफ्लो ने घबराहट में लिए जाने वाले फैसलों को कम किया है।

SIP Investment: इस समय भारतीय परिवारों की वित्तीय सोच बड़े बदलाव से गुजर रही है। कई दशक तक घरों में 'पहले बचत' की मानसिकता रही। पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट, सोना या नकद के रूप में सुरक्षित रखा जाता था।

वित्तीय स्थिरता और लिक्विडिटी को ज्यादा तवज्जो दी जाती थी, ग्रोथ को नहीं। लेकिन पिछले 5 से 7 साल में तस्वीर बदल गई है। अब भारत धीरे-धीरे 'SIP-फर्स्ट' देश बन रहा है। यहां भी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट परिवारों के लंबी अवधि में मोटा पैसा बनाने का मुख्य जरिया बनता जा रहा है।

SIP खातों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी


Association of Mutual Funds in India के आंकड़ों के मुताबिक, एक्टिव SIP खातों की संख्या 9.92 करोड़ के पार पहुंच गई है। कुल SIP एसेट 16.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुके हैं। यह म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल 80 लाख करोड़ रुपये के एसेट अंडर मैनेजमेंट का करीब 20 प्रतिशत है। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि लगातार बढ़ती भागीदारी का परिणाम है।

यह बदलाव कैसे आया

MIRA Money के को-फाउंडर आनंद के राठी कहते हैं कि यह सांस्कृतिक बदलाव धीरे धीरे आया है। ज्यादा लोग अब अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर जागरूक हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने निवेश को आसान बना दिया है। साथ ही लोगों को समझ आ रहा है कि पारंपरिक बचत साधन महंगाई की रफ्तार से पीछे रह जाते हैं।

वित्त वर्ष 2016-17 में औसत मासिक SIP इनफ्लो 4,000 करोड़ रुपये से कम था। एक दशक से भी कम समय में यह आंकड़ा लगभग आठ गुना बढ़ गया। सालाना SIP फ्लो करीब 45,000 करोड़ रुपये से बढ़कर हाल के वर्षों में लगभग 2.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

सबसे अहम बात यह है कि यह ग्रोथ नोटबंदी, महामारी की अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक सख्ती जैसे झटकों के बावजूद जारी रही। बाजार गिरने पर भी निवेशकों ने SIP बंद नहीं किए। भागीदारी बनी रही। राठी के मुताबिक, हर महीने 31,000 करोड़ रुपये के आसपास पहुंचते SIP इनफ्लो यह दिखाते हैं कि भारतीय परिवार अब इक्विटी निवेश को जोखिम नहीं, बल्कि जरूरत के रूप में देखने लगे हैं।

निवेश में अनुशासन की शुरुआत

SIP ने निवेश में अनुशासन लाया है। मध्यम वर्ग के लिए SIP अब हर महीने की प्रतिबद्धता बन चुका है, ठीक वैसे ही जैसे EMI। फर्क इतना है कि यह EMI भविष्य के लिए है। पहले लोग खर्च के बाद बची रकम निवेश करते थे। अब कई परिवार पहले निवेश करते हैं और फिर खर्च की योजना बनाते हैं।

Wise Finserv की ग्रुप डायरेक्टर और COO चारु पाहुजा कहती हैं कि रिटेल निवेशकों ने समझ लिया है कि सिस्टेमैटिक निवेश सिर्फ बाजार में पैसा लगाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह लंबी लक्ष्यों की ओर लगातार बढ़ने का साधन है। SIP बाजार की अस्थिरता को संतुलित करती है, अनुशासन बनाए रखती है और समय के साथ महंगाई समायोजित रिटर्न की संभावना बढ़ाते हैं। इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड कई पारंपरिक बचत साधनों की तुलना में कर लाभ भी देते हैं।

महंगाई के खिलाफ बेहतर विकल्प

राठी कहते हैं कि फिक्स्ड डिपॉजिट पर वास्तविक रिटर्न अक्सर महंगाई के बाद शून्य के आसपास या कभी कभी नकारात्मक रहा है। अब परिवार समझ रहे हैं कि सिर्फ बचत करने से खरीदने की ताकत सुरक्षित नहीं रहती। यही वजह है कि इक्विटी-बेस्ड SIP की ओर रुझान बढ़ा है। इसने लंबे समय में औसतन 10 से 12 प्रतिशत तक रिटर्न दिया है, जो महंगाई से बेहतर है।

नियमित SIP इनफ्लो ने घबराहट में लिए जाने वाले फैसलों को कम किया है। अब औसत निवेशक बाजार गिरने पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता। रुपी कॉस्ट एवरेजिंग के जरिए वह उतार चढ़ाव का फायदा उठाता है।

वैश्विक अनिश्चितता, महंगाई या भू राजनीतिक तनाव के दौर में भी SIP इनफ्लो स्थिर रहे और कई बार बढ़े भी। आज इक्विटी म्यूचुअल फंड में आने वाले धन का बड़ा हिस्सा रिटेल निवेशकों से आता है। यह दिखाता है कि SIP वित्तीय संस्कृति का मजबूत हिस्सा बन चुका है।

लंबी अवधि की कंपाउंडिंग की ताकत

लंबी अवधि का कंपाउंडिंग युवा निवेशकों को खास आकर्षित कर रहा है। राठी बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये का SIP करे और औसतन 12 प्रतिशत रिटर्न मिले, तो यह रकम 1 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है।

सोशल मीडिया पर वित्तीय जानकारी, ऑनलाइन कैलकुलेटर और पारदर्शी निवेश प्लेटफॉर्म ने लोगों को कंपाउंडिंग की ताकत समझने में मदद की है। जब निवेशक देखते हैं कि समय के साथ रकम कैसे बढ़ती है, तो वे अल्पकालिक बचत के बजाय लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता देने लगते हैं।

बचत से निवेश की ओर बदलाव

आज म्यूचुअल फंड में आने वाले हर पांच में से लगभग एक रुपये का निवेश SIP के जरिए आता है। इससे घरेलू बाजार मजबूत होता है और विदेशी पूंजी पर निर्भरता कम होती है।

चारु पाहुजा कहती हैं कि भारत बचत छोड़ नहीं रहा है, बल्कि उसे ज्यादा उत्पादक दिशा में लगा रहा है। दस साल से कम समय में मासिक निवेश का आठ गुना बढ़ना एक गहरे सांस्कृतिक बदलाव का संकेत है। भारतीय परिवार अब सावधानी से बचत करने से आगे बढ़कर सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट की ओर जा रहे हैं। यही बदलाव देश की अगली फाइनेंशियल मैच्योरिटी को तय कर सकता है।

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