इंश्योरेंस कंपनियों (Insurance Companies) के एजेंट के कमीशन के लिए 20 फीसदी की लिमिट तय की जा सकती है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने यह प्रस्ताव पेश किया है। इस बारे में नियामक ने ड्राफ्ट कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। अगर बीमा नियामक का यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो बीमा कंपनियों को एजेंट्स के कमीशन के लिए पॉलिसी बनानी होगी। इस पॉलिसी को कंपनी के बोर्ड से एप्रूव कराना होगा।
IRDAI का प्रस्ताव जनरल और स्टैंडएलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के ग्रॉस प्रीमियम पर लागू होगा। बीमा नियामक ने एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) के लिए भी 30 फीसदी की सीमा तय की है। यह जनरल और स्टैंडएलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के ग्रॉस प्रीमियम का 30 फीसदी होगा।
बीमा नियामक ने इस प्रस्ताव पर लोगों की सलाह मांगी है। इस बारे में उसने नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है, "प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशंस के बारे में 14 सितंबर तक अपनी सलाह या टिप्पणी भेजी जा सकती है।" इसे sumandeep.ghosh@irdai.gov.in को भेजा जा सकता है। इसकी एक कॉपी uma@irdai.gov.in पर भी भेजनी होगी।
आईआरडीएआई ने नोटिफिकेशन में कहा गया है, " बीमा कंपनियों में नए बिजनेस, मॉडल्स, प्रोडक्ट्स, स्ट्रैटेजी और इनटर्नल प्रोसेसज को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे बीमा कंपनियों को अपने खर्च का प्रबंधन करने में आसानी होगी।"
पिछले महीने बीमा नियामक ने मैनेजमेंट एक्सपेंसेज के बारे में भी एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था। इसमें खर्च पर अंकुश लगाने के साथ ही सीईओ/एमडी, होलटाइम डायरेक्टर और मैनेजमेंट के अहम लोगों के वेरिएबल पे की लिमिट तय करने का भी प्रस्ताव शामिल है।
इस ड्राफ्ट के मुताबिक, नई कंपनी के मामले में पहले 10 साल के लिए मैनेजमेंट एक्सपेंस के लिए 30 फीसदी की सीमा होगी या तब तक के लिए यह सीमा होगी जब तक कंपनी की बाजार हिस्सेदारी एक फाइनेंशियर ईयर में कम से कम 1.5 फीसदी नहीं पहुंच जाता। बीमा नियामक को मौजूदा नियमों की समीक्षा के लिए अनुरोध मिले थे। इसे ध्यान में रख मौजूदा नियमों की समीक्षा की गई है।