आप इनवेस्टमेंट में एक्टिव और पैसिव में से किस स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करते हैं? दरअसल ये इनवेस्टमेंट की दो अलग-अलग स्ट्रेटेजी हैं। इनमें से प्रत्येक स्ट्रेटेजी के अलग-अलग रिस्क और रिवॉर्ड हैं। कई इनवेस्टर इन दोनों स्ट्रेटेजी के बीच कनफ्यूज हो जाते हैं। वे यह भी तय नहीं कर पाते कि दोनों में से कौन सी स्ट्रेटेजी उनके लिए फायदेमंद है। मनीकंट्रोल आपको दोनों स्ट्रेटेजी से जुड़ी अहम बातें और इनके फायदेनुकसान बता रहा है।
एक्टिव इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी क्या है?
एक्टिव इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी (Active Investment Strategy) में पोर्टफोलियो के लगातार प्रबंधन की जरूरत पड़ती है। यह काम फंड मैनेजर करता है। वह रिसर्च और एनालिसिस के आधार पर यह तय करता है कि फंड का निवेश किस सिक्योरिटी मे करना है, किस सिक्योरिटी में कितना निवेश करना है और किस सिक्योरिटी से निवेश निकालना है। फंड मैनेजर का मकसद मार्केट से ज्यादा रिटर्न देना होता है। इस स्ट्रेटेजी में रिसर्च और बार-बार सिक्योरिटी की खरीद और बिक्री पर खर्च आता है। इसलिए इस स्ट्रेटेजी को महंगा माना जाता है।
एक्टिव स्ट्रेटेजी क्यों महंगी है?
वेल्थ विजडम इंडिया के रतीश गुप्तान ने बताया कि एक्टिव इनवेस्टिंग में आम तौर पर कॉस्ट ज्यादा आती है। इसकी वजह ज्यादा मैनेजमेंट फीस और ट्रांजेक्शन कॉस्ट है। लेकिन, इस स्ट्रेटेजी में ज्यादा रिटर्न की संभावना होती है। लेकिन, रिस्क भी ज्यादा होता है। इसलिए यह स्ट्रेटेजी उन निवेशकों के लिए ठीक है, जो थोड़ा रिस्क ले सकते हैं। जो निवेशक रिस्क नहीं लेना चाहते, उन्हें इस स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
पैसिव इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी क्या है?
पैसिव स्ट्रेटेजी में फंड किसी मार्केट इंडेक्स को फॉलो करता है। वह उस इंडेक्स के मुताबिक अपने फंड का निवेश करता है। उदाहरण के लिए अगर किसी फंड का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 सूचकांक है तो वह अपने फंड का निवेश निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों के शेयरों में करेगा। निवेश का अनुपात भी निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों के वेटेज पर निर्भर करेगा। इस स्ट्रेटेजी में सिक्योरिटी की खरीद-बिक्री एक्विट इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी के मुकाबले कम होती है। इसलिए फंड की मैनेजमेंट कॉस्ट कम होती है। लेकिन, इस स्ट्रेटेजी में फंड का रिटर्न मार्केट या बेंचमार्क के जितना रहता है।
यह भी पढ़ें: EPFO: प्रॉविडेंट फंड क्लेम ATM से निकालने के लिए मिलेगा कार्ड! PF नॉमिनी भी निकाल सकेंगे एटीएम से पैसा, ईपीएफओ बदलेगा नियम
आपके लिए कौन सी स्ट्रेटेजी बेस्ट है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपके लिए एक्टिव और पैसिव इनवेस्टिंग में से कौन सी स्ट्रेटेजी ज्यादा सही है, यह आपके इनवेस्टमेंट के गोल (लक्ष्य) और रिस्क लेने की आपकी क्षमता पर निर्भर करता है। अगर इनवेस्टर्स की उम्र कम है और वह ज्यादा रिस्क लेने को तैयार है तो वह ज्यादा रिटर्न के लिए एक्विट इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर सकता है। अगर इनवेस्टर ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहता तो उसके लिए पैसिव स्ट्रेटेजी सही रहेगी।