Investment plan: 1 अप्रैल से पहले बनाएंगे अपना फाइनेंशियल प्लान तो बड़े फायदे में रहेंगे

इनवेस्टमेंट प्लानिंग के लिए वित्त वर्ष की शुरुआत से अच्छा दूसरा कोई वक्त नहीं हो सकता। 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू होने जा रहा है। अगर आप नए वित्त वर्ष को ध्यान में रख अभी अपने इनवेस्टमेंट प्लान को रिव्यू करते हैं तो आपको बड़ा फायदा हो सकता है

अपडेटेड Mar 31, 2025 पर 2:32 PM
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सरकार ने इस साल यूनियन बजट में इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए थे। ये बदलाव 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे।

1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो रहा है। यह अगले 12 महीनों का फाइनेंशियल प्लान बनाने का सही समय है। सरकार ने इनकम टैक्स के नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। ये 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए आपको अपना इनवेस्टमेंट प्लान बनाना होगा। अपने फाइनेंशियल गोल (लक्ष्य) की समीक्षा करनी होगी। साथ ही अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो को संतुलित करना होगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो को रिव्यू करने का सही समय

बीते छह महीने स्टॉक्स मार्केट्स में काफी उतारचढ़ाव वाले रहे हैं। BSE Sensex और Nifty 50 में इस साल (13 मार्च तक) क्रमश: 5.5 फीसदी और 5.3 फीसदी की गिरावट आई है। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में तो क्रमश: 15.3 फीसदी और 20.6 फीसदी गिरावट आई है। हालांकि, 15 मार्च के बाद मार्केट में तेजी देखने को मिली है। Sensex 4.98 फीसदी और Nifty 5.2 फीसदी चढ़ा है। इस उतारचढ़ाव को देखते हुए म्यूचुअल फंड्स इनवेस्टर्स को शेयरों में निवेश की अपनी स्ट्रेटेजी में बदलाव करनी होगी।

इनवेस्टमेंट अमाउंट बढ़ाने का फैसला


इनवेस्टर्स को अपने पोर्टफोलियो की रिबैलेंसिंग करनी पड़ सकती है। पोर्टफोलिया डायवर्सिफायड होना चाहिए। इसका मतलब है कि इसमें सही अनुपात में शेयर, गोल्ड, बॉन्ड्स और इंटरनेशनल इनवेस्टमेंट की हिस्सेदारी होनी चाहिए। एसेट एलोकेशन सही होने पर भी आप अपने फाइनेंशियल गोल्स को हासिल कर पाएंगे। आप आने वाले महीनों में सैलरी में इंक्रीमेंट को नजर में रखन अपना SIP अमाउंट बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं।

नई टैक्स रीजीम के इस्तेमाल में ज्यादा फायदा

सरकार ने इस साल यूनियन बजट में इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए थे। ये बदलाव 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे। अगर किसी व्यक्ति की इनकम सालाना 12 लाख रुपये है तो वह नई टैक्स रीजीम के इस्तेमाल से करीब 83,200 रुपये की बचत कर सकता है। अगर इनकम 15 लाख है तो 32,500 रुपये की बचत हो सकती है। इनकम 24 लाख रुपये हैं तो नई रीजीम के इस्तेमाल से 1.14 लाख रुपये की बचत हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को यह देख लेना चाहिए कि उसे इनकम टैक्स की कौन सी रीजीम ज्यादा फायदेमंद है।

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होम और ऑटो लोन पर इंटरेस्ट रेट घटने के आसार

अगर आप होम लोन या कार लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको 9 अप्रैल को अच्छी खबर मिल सकती है। RBI मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट घटाने का ऐलान कर सकता है। केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी में इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स घटाया था। इससे रेपो रेट 6.50 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी पर आ गया था। वह रेपो रेट में और 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर सकता है। इससे बैंक होम लोन और कार लोन के इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकते हैं।

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