पिछले चार महीने खासकर अक्टूबर के बाद से स्टॉक मार्केट (Stock Market) में कंसॉलिडेशन (Consolidation) दिख रहा है। पिछले साल अक्टूबर में मार्केट ने ऑल-टाइम हाई (Share market All-time high) टच किया था। अगले दो महीने तक कंसॉलिडेशन जारी रह सकता है। यह कहना है मायवेल्थग्रोथ के को-फाउंडर हर्षद चेतनवाला का। शुक्रवार को भी सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा गिर गया।
उन्होंने कहा कि आम तौर पर इंट्रेस्ट रेट बढ़ने पर स्टॉक मार्केट का प्रदर्शन कमजोर रहता है। अभी दुनियाभर में इंट्रेस्ट रेट्स बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में इन्वेस्टर्स को नया इन्वेस्टमेंट एकमुश्त करने के बजाय धीरे-धीरे करने की जरूरत है। मनीकंट्रोल से उन्होंने स्टॉक मार्केट्स के बारे में खुलकर बातचीत की। यहां पेश है इंटरव्यू की मुख्य बातें।
स्टॉक मार्केट के कब रिकॉर्ड हाई लेवल पर लौटने की उम्मीद है?
मार्केट लंबी अवधि के ग्रोथ के लिहाज से अच्छी स्थिति में है। अगले कुछ समय तक कंसॉलिडेशन जारी रहने के बाद इसका परफॉर्मेंस बेहतर होने की उम्मीद है। खासकर इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी और यूक्रेन- रूस मसले का असर इस पर पड़ रहा है। यह दौर करीब दो महीने तक जारी रह सकता है। उसके बाद बाजार में तेजी लौटने की उम्मीद है।
क्या आपको लगता है कि क्रू़ड ऑयल की कीमतें लंबे समय तक 90 डॉलर प्रति बैरल बनी रहेंगी?
कमोडिटी की कीमतों पर असर डालने वाले फैक्टर्स अलग हैं। एक साल पहले किसी को उम्मीद नहीं थी कि क्रूड की कीमतें बढ़कर इस स्तर पर पहुंच जाएंगी। दरअसल, कोरोना के बाद के हालात में क्रूड की मांग बढ़ रही है। उधर, पिछले कुछ समय से सप्लाई से जुड़े मसले बने हुए हैं। यूक्रेन को लेकर अमेरिका और रूस के बीच तनाव बढ़ रहा है। अगर यूक्रेन-रूस के बीच तनाव बढ़ता है तो क्रूड की कीमतों पर भी दबाव बना रहेगा। अगर दोनों देशों के बीच टकराव घटता है तो क्रूड की कीमतों पर दबाव काफी घट जाएगा।
आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में आप क्या कहेंगे?
आरबीआई ने रेट्स में किसी तरह का बदलाव नहीं कर मार्केट को चौंकाया है। उसने कहा है कि उसका फोकस ग्रोत पर बना हुआ है। अकोमोडेटिव स्टैंस कंटीन्यू रखने का मतलब है कि वह लो इंट्रेस्ट रेट बनाए रखने के साथ रिकवरी पर फोकस जारी रखेगा। लेकिन, हमे उम्मीद है कि भारत और दुनियाभर में इंट्रेस्ट रेट्स इस साल बढ़ेंगे।
अब तक आए कंपनियों के दिसंबर तिमाही के नतीजों के बारे में आपकी क्या राय है?
अब तक आए नतीजें अच्छे रहे हैं। रेवेन्यू की ग्रोथ अच्छी रही है। साथ ही ऑपरेटिंग मार्जिन के मोर्चे पर भी बहुत कम निराशा देखने को मिली है। दिसंबर तिमाही के दौरान इनपुट्स कॉस्ट हाई रही है, जिसका असर कंपनियों के प्रॉफिट पर पड़ा है। हाई इनपुट्स कॉस्ट का असर कुछ और समय तक ऑपरेटिंग मार्जिन पर देखने को मिलेगा। हमारा मानना है कि आने वाली तिमाहियों में मार्जिन पर प्रेशर घटने से प्रॉफिट में ग्रोथ जारी रहेगी।