सरकार की इस खास स्कीम में मिल रहा 6% से ज्यादा ब्याज, हर छह महीने में बदलती है दर, जानिए डिटेल

RBI ने 7 जून, 2022 से 6 दिसंबर, 2022 तक यानी आधे साल के लिए लागू गवरमेंट ऑफ इंडिया फ्लोटिंग रेट बॉन्ड, 2031 (एफआरबी 2031) की ब्याज दर का ऐलान कर दिया है, जो 6.42 फीसदी प्रति वर्ष होगी

अपडेटेड Jun 07, 2022 पर 11:08 AM
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इन बॉन्डों पर दी जाने वाली ब्याज दर परिवर्तनीय है और हर छह महीने में इसमें बदलाव होगा

Government of India Floating Rate Bond : भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) यानी RBI ने 7 जून, 2022 से 6 दिसंबर, 2022 तक यानी आधे साल के लिए लागू गवरमेंट ऑफ इंडिया फ्लोटिंग रेट बॉन्ड, 2031 (एफआरबी 2031) की ब्याज दर का ऐलान कर दिया है, जो 6.42 फीसदी प्रति वर्ष होगी। केंद्रीय बैंक ने सोमवार को एक सर्कुलर के जरिये यह जानकारी दी है।

इस तरह तय होती है ब्याज

आरबीआई ने कहा, यह याद रखना चाहिए कि FRB, 2031 में एक कूपन होगा जिसकी बेस रेट 182 दिन के टी-बिल्स (182 Day T Bills) के पिछले 3 ऑक्शन (दर निर्धारण के दिन यानी 7 जून, 2022 से) की वेटेड एवरेज यील्ड (WAY) के समान होगी। वेटेड एवरेज यील्ड की गणना एक साल में 365 दिन की गिनती के द्वारा की जाएगी।


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हर छह महीने में बदलती है ब्याज

इन बॉन्डों पर दी जाने वाली ब्याज दर परिवर्तनीय है और हर छह महीने में इसमें बदलाव होगा। परिवर्तनीय ब्याज दर हर साल जनवरी और जुलाई में होने वाले बदलाव पर निर्भर है।

इन बॉन्डों पर दी जाने वाली ब्याज को नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (National Saving Certificate) यानी NSC पर देय ब्याज की तुलना में बेंचमार्क किया गया है और यह फिलहाल 0.35 फीसदी ज्यादा है। इन बॉन्डों पर ब्याज का भुगतान 30 जून और 31 दिसंबर को समाप्त छमाही अवधि के लिए हर साल 1 जुलाई और 1 जनवरी को किया जाता है।

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सात साल की अवधि के हैं बॉन्ड

ये बॉन्ड सात साल की अवधि के हैं और सीनियर सिटीजंस (senior citizens) को प्रीमैच्योर यानी समय से पहले निकासी का ऑप्शन दिया गया है। कम से कम 1,000 रुपये (फेस वैल्यू) और उसके गुणक में ये बॉन्ड जारी किए जाते हैं और निवेश की अधिकतम कोई सीमा नहीं है।

सीनियर सिटीजंस को मिलती है प्रीमैच्योर निकासी की सुविधा

RBI के नोटिफिकेशन के मुताबिक, 60 साल से ज्यादा उम्र के निवेशकों को प्रीमैच्योर निकासी की सुविधा दी गई है। इन बॉन्डों से होने वाली ब्याज आय पर कर चुकाना होता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक, ब्याज के भुगतान के समय TDS (Tax Deducted at Source) काटा जाता है।

सीनियर सिटीजंस के लिए प्रीमैच्योर निकासी के लिए खास शर्तें हैं, जो उम्र पर आधारित हैं। 60 से 70 साल तक उम्र के इनवेस्टर्स के लिए लॉक इन अवधि 6 साल, जबकि 70 से 80 साल के इनवेस्टर्स के लिए 5 साल और 80 साल या उससे ज्यादा उम्र के लिए 4 साल है।

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