आज से आप घर बैठ खरीद सकेंगे फेसबुक, गूगल जैसी 8 अमेरिकी कंपनियों के शेयर, इसके बारे में यहां जानिए सबकुछ

अमेरिकी शेयरों में इनवेस्ट करने के लिए आपका समय पूरी तरह से अलग होगा। आप रात 8:30 बजे से अगले दिन दोपहर 2:30 बजे तक रोजाना (शनिवार-रविवार छोड़कर) अमेरिकी शेयरों में सीधे इनवेस्ट कर सकेंगे

अपडेटेड Mar 03, 2022 पर 12:55 PM
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आप एक साल में अमेरिकी शेयरों में करीब 1.9 करोड़ रुपये तक इनवेस्ट कर सकते हैं। यह इनवेस्टमेंट Liberalized Remittance Scheme (LRS) के लिए तय लिमिट के तहत होगा। यह लिमिट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) तय करता है।

इंडियन इनवेस्टर्स के लिए आज का दिन खास है। आज उनकी एक बड़ी चाहत पूरी होने जा रही है। वे आज से फेसबुक (Facebook) और गूगल (Google) जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों के शेयर में इनवेस्ट कर सकेंगे। उन्हें इन कंपनियों के शेयरों में सीधे इनवेस्ट करने का मौका मिलने जा रहा है। इसकी तैयारी काफी पहले से चल रही थी। 3 मार्च से इसकी शुरुआत होने जा रही है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

किन अमेरिकी कंपनियों में निवेश की होगी इजाजत?

अभी आप सिर्फ 8 अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में सीधे इनवेस्ट कर सकेंगे। इनमें अमेजन, टेस्ला, अलफाबेट (Google), मेटा प्लेटफॉर्म (Facebook), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), नेटफ्लिक्स (Netflix), एपल (Apple) और वॉलमार्ट (Walmart) शामिल हैं। जल्द और 42 दिग्गज अमेरिकी कंपनियों में आपको सीधे इनवेस्ट करने की सुविधा मिलेगी।


किस एक्सचेंज के जरिए होगा यह इनवेस्टेमेंट?

इसके लिए एनएसई ने एक सब्सिडियरी एक्सचेंज बनाया है। इसका नाम NSE IFSC है। इसकी शुरुआत 29 नवंबर, 2016 को हुई थी। यह गुजरात की गिफ्ट सिटी (GIFT City) में है। दरअसल, गिफ्ट सिटी में स्थित स्टॉक एक्सचेंज को दूसरे देश की करेंसी या सिक्योरिटी में ट्रेडिंग ऑफर करने की इजाजत है। 2017 से NSE IFSC कई दूसरे प्रोडक्ट्स में ट्रेडिंग की सुविधा दे रहा है।

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क्या इनवेस्टर्स को अमेरिकी कंपनियों के शेयर इश्यू किए जाएंगे?

इनवेस्टर्स को अमेरिकी कंपनियों के शेयर इश्यू नहीं किए जाएंगे। इसकी जगह उन्हें NSE IFSC Receipt इश्यू किए जाएंगे। ये एक तरह से डिपॉजिटरी रिसीट होंगे। इनकी अंडरलाइंग वैल्यू अमेरिकी शेयर की होगी। जिस तरह से आप इंडियन कंपनियों के शेयर खरीदते हैं उसी तरह आप अमेरिकी कंपनियों के शेयर खरीद सकेंगे। उसके बदले आपको NSEIFSC रिसीट जारी कर दिए जाएंगे।

क्या इसके लिए मुझे अलग डीमैंट अकाउंट खोलना होगा?

हां, आपको अमेरिकी शेयरों में सीधे इनवेस्ट करने के लिए NSE IFSC में एक डीमैट अकाउंट खोलना होगा। इस डीमैट अकाउंट में आप अपने डिपॉजिटरी रिसीट को रख सकेंगे। आपको अंडरलाइंग स्टॉक से जुड़े हर कॉर्पोरेट एक्शन का फायदा उसी तरह मिलेगा जिस तरह अमेरिकी शेयर में इनवेस्ट करने वाले एक अमेरिकी को मिलता है।

मैं कितना अमाउंट अमेरिकी शेयरों में इनवेस्ट कर सकता हूं?

आप एक साल में अमेरिकी शेयरों में करीब 1.9 करोड़ रुपये तक इनवेस्ट कर सकते हैं। यह इनवेस्टमेंट Liberalized Remittance Scheme (LRS) के लिए तय लिमिट के तहत होगा। यह लिमिट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) तय करता है।

इन शेयरों में निवेश से होने वाले प्रॉफिट पर कितना टैक्स लगेगा?

अमेरिकी शेयरों में निवेश पर इश्यू होने वाली डिपॉजिटरी रिसीट को इनकम टैक्स के लिहाज से इंडिया में फॉरेन एसेट माना जाता है। इसलिए इसके मुनाफे पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के नियम लागू होंगे। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स आपके स्लैब के हिसाब से लगेगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर इंडेक्सेशन के साथ आपको 20 फीसदी टैक्स चुकाना होगा।

मेरे लिए अमेरिकी शेयरों में ट्रेडिंग का समय क्या होगा?

अमेरिकी शेयरों में इनवेस्ट करने के लिए आपका समय पूरी तरह से अलग होगा। आप रात 8:30 बजे से अगले दिन दोपहर 2:30 बजे तक रोजाना (शनिवार-रविवार छोड़कर) अमेरिकी शेयरों में सीधे इनवेस्ट कर सकेंगे। आपके डीमैट अकाउंट में डिपॉजिटरी रिसीट ट्रेडिंग के दो दिन के अंदर आ जाएंगी।

मुझे अमेरिकी शेयरों में इनवेस्ट करने के लिए क्या करना होगा?

आपको सबसे पहले IFSCA रिजस्टर्ड एक ट्रेडिंग मेंबर के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए KYC जरूरी होगी। इसके बाद आपको बैंक को Liberalized Remittance Scheme (LRS) के लिए जरूरी डॉक्युमेंट देने होंगे। फिर अपने अकाउंट से पैसे ट्रेडिंग मेंबर के अकाउंट में ट्रांसफर करने होंगे। इसके बाद आप सीधे अमेरिकी शेयरों में इनवेस्ट कर सकेंगे।

अमेरिकी शेयरों की कीमतें बहुत ज्यादा हैं, क्या मैं फ्रैक्शन में शेयर खरीद सकता हूं?

हां, आप फ्रैक्शन में शेयर खरीद सकते हैं। NSE IFSC ने कहा है कि वह निश्चित रेशियो में डिपॉजिटरी रिसीट जारी करेगी। उदाहरण के लिए टेस्ला का एक शेयर 100 NSE IFSC रिसीट के बराबर होगा। अमेजन का एक शेयर 200 NSE IFSC रिसीट के बराबर होगा। इसी तरह दूसरी अमेरिकी कंपनियों के शेयरों के रेशियो तय किए गए हैं। आप अपनी सुविधा से उनमें इनवेस्ट कर सकेंगे।

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