क्या Sensex 1,00,000 अंक पर पहुंच जाएगा?

ज्यादातर अनुमान के साथ एक साइकोलॉजी जुड़ी होती है। इसका मतलब यह है कि लोग बाजार के अच्छा या खराब परफॉर्मेंस को लेकर अपना नजरिया प्रिडिक्शन के वक्त मार्केट के माहौल के आधार पर बनाते हैं।

अपडेटेड Mar 01, 2022 पर 4:54 PM
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2008 में सेंसेक्स 21,000 पर पहुंच गया था। 2022 में यह 60,000 पर पहुंच गया। अगर फीसदी में देखें तो यह सिर्फ सालाना 7.7 फीसदी की ग्रोथ है।

स्टॉक मार्केट्स में आई हालिया गिरावट से माहौल थोड़ा निराशाजनक है। उधर, रूस और यू्क्रेन क्राइसिस ने चिंता बढ़ा दी है। लेकिन, देरसवेर यह चिंता खत्म होगी। फिर, स्टॉक मार्केट्स में हालात सामान्य हो जाएंगे। इंडिया में स्टॉक मार्केट के लॉन्ग टर्म परफॉर्मेंस को देखें तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आइए जानते हैं क्यों।

लॉन्ग टर्म में इंडियन स्टॉक मार्केट्स ने 12 फीसदी रिटर्न दिया है। इधर, कोरोना की महामारी की मार से इकोनॉमी तेजी से उबर रही है। वित्त वर्ष 2021-22 और वित्त वर्ष 2022-23 में ग्रोथ रेट शानदार रहने की उम्मीद जताई गई है। ऐसे में सेंसेक्स का 1,00,000 अंक का टारगेट मुश्किल नहीं दिखता। हाल में जेफरीज के क्रिस्टोफर वुड ने सेंसेक्स के 2026 तक 1 लाख के लेवल पर पहुंज जाने का अनुमान व्यक्त किया था।

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ज्यादातर अनुमान के साथ एक साइकोलॉजी जुड़ी होती है। इसका मतलब यह है कि लोग बाजार के अच्छा या खराब परफॉर्मेंस को लेकर अपना नजरिया प्रिडिक्शन के वक्त मार्केट के माहौल के आधार पर बनाते हैं। अगर बाजार गिर रहा होता है तो अक्सर इस तरह के प्रिडिक्शन देखने को मिलते हैं कि सेंसेक्स कहां तक गिरेगा। अगर बाजार चढ़ रहा होता है तो हम सेंसेक्स के 1 लाख पर पहुंच जाने का प्रिडिक्शन देखते हैं।

ग्लासमैन और हैसेट का उदाहरण लीजिए। जब 1998-99 में उन्होंने अपना प्रिडिक्शन दिया था, तब अमेरिकी बाजार में जबर्दस्त तेजी थी। टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर आसमान पर थे। एक्सपर्ट्स यह बता रहे थे कि बाजार को बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। तब डाओ जोंस के 36,000 अंक पर पहुंच जाने की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन, स्टॉक मार्केट को इस बात की परवाह नहीं कि आप क्या सोचते हैं। वह अपने हिसाब से चलता है। बढ़ने की बजाया डाओ जोंस साल 2000 में11,000 से गिरकर 2003 में 8,000 पर आ गया। और प्रिडिक्शन पूरी तरह से गलत साबित हुए।

अब क्रिस वुड के प्रिडिक्शन की बात करते हैं। उन्होंने बताया था कि कब सेंसेक्स 60,000 पर पहुंच जाएगा। लेकिन, रुकिए..क्या होता अगर 60,000 सेंसेक्स का पीक होता? जिस तरह से 2000 में डाओ के लिए 11,000 पीक था, अगर यूक्रेन-रूस क्राइसिस और बढ़ जाता है तो? सेंसेक्स और 10 फीसदी गिरकर 50,000 पर आ जाता है तो। क्या यह मुमकिन नहीं लगता?

अब अगर 2027 तक आप सेंसेक्स को 1,00,000 पर देख रहे हैं तो स्टॉक मार्केट्स की सालाना ग्रोथ 15 फीसदी होनी चाहिए। अगर यह और गिरकर 45,000 पर आ जाता है तो? फिर 1,00,000 अंक का प्रिडिक्शन पूरा होने के लिए इसे हर साल 18 फीसदी की ग्रोथ दिखानी होगी। और क्या होगा, अगर दूसरी महामारी आती है, दूसरा युद्ध शुरू होता है, फिर से टेक बबल शुरू होता है, ऐसा कुछ जिसे हमने पिछले कुछ सालों में नहीं देखा है? फिर बाजार में तेज गिरावट आएगी। इस तरह इसमें कई किंतु-परंतु हैं।

हम आपके सोचने के लिए कुछ और तथ्य पेश कर रहे हैं।

2008 में सेंसेक्स 21,000 पर पहुंच गया था। 2022 में यह 60,000 पर पहुंच गया। क्या आपको यह शानदार उछाल नहीं लग रहा है? क्या आप निवेश का मौका चूक जाने का अफसोस कर रहे हैं? लेकिन, अगर फीसदी में देखें तो यह सिर्फ सालाना 7.7 फीसदी की ग्रोथ है। यह चौंकाना वाला नहीं है?

इस तरह हम आपको सिर्फ यह बताना चाहते हैं कि आपको इन सुनहरे प्रिडिक्शन के पीछे नहीं भागना चाहिए। सेंसेक्स जरूत 1,00,000 पर पहुंचेगा। हम सिर्फ यह नहीं जानते कि कब।

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