बीमाधारकों के लिए खुशखबरी! अब तेजी से होगा क्लेम का निपटारा, IRDAI ला रहा नया कानून

Insurance claim settlement: अब बीमाधारकों को इंश्योरेंस क्लेम के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा। बीमा नियामक IRDAI एक ऐसा कानून बनाने जा रहा है, जो बीमा कंपनियों की मनमानी से पर अंकुश लगाएगा। जानिए पूरी डिटेल

अपडेटेड Jul 24, 2025 पर 3:10 PM
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हर बीमा कंपनी को कम से कम एक Internal Ombudsman रखना होगा।

Insurance Ombudsman: इंश्योरेंस रेगुलटर- भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बुधवार, 24 जुलाई को इंटरनल इंश्योरेंस ओम्बड्समैन गाइडलाइंस, 2025 का एक्सपोजर ड्राफ्ट जारी किया है। इसके तहत बीमा कंपनियों को 50 लाख रुपए तक के दावों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए आंतरिक ओम्बड्समैन नियुक्त करना अनिवार्य होगा।

शिकायत निपटारे की गति बढ़ाने की तैयारी

इस ड्राफ्ट का मकसद बीमा कंपनियों के भीतर एक स्वतंत्र और निष्पक्ष शिकायत निवारण तंत्र खड़ा करना है। इससे लंबित या बढ़ती शिकायतों का तेजी और निष्पक्ष तरीके से निपटारा किया जा सकेगा। ये नियम सभी बीमा कंपनियों (रीइंश्योरेंस कंपनियों को छोड़कर) पर लागू होंगे, जो तीन साल से अधिक समय से ऑपरेशन में हैं।


ओम्बड्समैन की नियुक्ति और जवाबदेही

हर बीमा कंपनी को कम से कम एक Internal Ombudsman रखना होगा। अगर कंपनी चाहें तो क्षेत्रीय जिम्मेदारियों के साथ कई ओम्बड्समैन भी नियुक्त कर सकती है ताकि शिकायतों का निपटारा तेजी से हो सके। प्रशासनिक मामलों में ओम्बड्समैन एमडी या सीईओ को रिपोर्ट करेगा। लेकिन, कार्यात्मक रूप से उसे बोर्ड या पॉलिसीहोल्डर प्रोटेक्शन एंड ग्रीवेंस कमेटी के प्रति जवाबदेह रहना होगा।

IRDAI का कहना है कि इस दोहरी रिपोर्टिंग प्रणाली से ओम्बड्समैन की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी और निगरानी भी प्रभावी बनी रहेगी। बीमा नियामक का मानना है कि इससे विवादों को बाहरी ओम्बड्समैन ऑफिस या कोर्ट तक जाने से पहले ही सुलझाया जा सकेगा, ताकि इंश्योरेंस सिस्टम में लोगों का भरोसा बढ़ेगा।

नियमों में क्या होगा शामिल?

ड्राफ्ट में ओम्बड्समैन की योग्यता, कार्यकाल, वेतन और जिम्मेदारियों को विस्तार से परिभाषित किया गया है। IRDAI ने हितधारकों और आम जनता से 17 अगस्त 2025, शाम 5 बजे तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। ड्राफ्ट IRDAI की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

यह प्रस्ताव IRDAI की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत बीमा धारकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विवादों की समयसीमा घटाई जा रही है। साथ ही, कंपनियों को ग्राहकों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है।

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