भारतीय परिवारों में सोना हमेशा सुरक्षा का प्रतीक रहा है, लेकिन अब निवेशक फिजिकल गोल्ड से हटकर गोल्ड ईटीएफ की ओर रुख कर रहे हैं। ये डिजिटल यूनिट्स डीमैट अकाउंट में स्टोर होते हैं, जहां स्टोरेज, प्योरिटी या मेकिंग चार्ज की चिंता नहीं रहती। अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस को सटीक ट्रैक करने से ये खुदरा दुकानों के मुकाबले ज्यादा पारदर्शी सौदा देते हैं ।
गोल्ड ईटीएफ एक म्यूचुअल फंड है जो 24 कैरेट फिजिकल गोल्ड में निवेश करता है। हर यूनिट लगभग 1 ग्राम गोल्ड का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे फंड वैल्ट में रखता है। स्टॉक एक्सचेंज पर खरीद-बिक्री होती है, इसलिए कीमत पूरे ट्रेडिंग डे में बदलती रहती है। एक्सपेंस रेशियो (0.3-1% सालाना) ही मुख्य खर्च है, जो मैनेजमेंट कवर करता है ।
फिजिकल गोल्ड के विपरीत, ईटीएफ में तुरंत बिक्री संभव है, पैसे खाते में फटाफट आ जाते हैं। कोई जीएसटी नहीं लगता, स्टोरेज का झंझट खत्म। लोकप्रिय ईटीएफ जैसे एक्सिस गोल्ड, निप्पॉन इंडिया गोल्ड बीईएस में हाई ट्रेडिंग वॉल्यूम से बिड-आस्क स्प्रेड कम रहता है। लॉन्ग-टर्म में मार्केट उतार-चढ़ाव के समय स्थिरता प्रदान करते हैं ।
टैक्सेशन और पोर्टफोलियो सलाह
3 साल से ज्यादा होल्डिंग पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन 12.5% टैक्स (इंडेक्सेशन बिना) लगता है, जबकि शॉर्ट-टर्म पर इनकम स्लैब के अनुसार। फिजिकल गोल्ड से बेहतर टैक्स एफिशिएंसी। एक्सपर्ट्स पोर्टफोलियो का 5-15% ही गोल्ड ईटीएफ में रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि ये इनकम नहीं जनरेट करते, सिर्फ प्राइस अप्रीशिएशन पर निर्भर हैं ।
नए निवेशक डीमैट अकाउंट खोलकर शुरू कर सकते हैं। बजाज, एचडीएफसी जैसे टॉप ईटीएफ चुनें। सोने को स्पेकुलेशन न मानकर डाइवर्सिफिकेशन टूल समझें।