ITAT की दिल्ली बेंच ने पत्नी को प्रॉपर्टी से इनकम पर 50% टैक्स चुकाने का निर्देश दिया, जानिए क्या है पूरा मामला

अगर आप प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे है खासकर तब जब परिवार के किसी सदस्य के साथ ज्वाइंट नाम से खरीद रहे हैं तो आपके लिए कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इन बातों की अनदेखी करने से आपको बाद में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है

अपडेटेड Feb 23, 2023 पर 6:37 PM
इंडिया में कई मामलों में ऐसा होता है कि कम स्टैंप ड्यूटी का फायदा उठाने के लिए प्रॉपर्टी परिवार की महिला सदस्य के नाम या उसके साथ संयुक्त रूप से खरीदी जाती है।

इनकम टैक्स अपेलैट ट्राइब्यूनल (ITAT) की दिल्ली बेंच ने हाल में दिए अपने आदेश में को-ओनर की पत्नी को प्रॉपर्टी से होने वाली इनकम पर 50 फीसदी टैक्स चुकाने को कहा है। यह ऑर्डर इस निष्कर्ष पर आधारित था कि प्रॉपर्टी की रजिस्टर्ड सेल डीड में को-ओनर्स की अलग हिस्सेदारी का जिक्र नहीं था और यह कि पत्नी ने प्रॉपर्टी को खरीदने में कुछ पैसे का योगदान किया था। इसके अलावा इस दंपती ने यह प्रॉपर्टी खरीदी तो थी लेकिन अपने इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) के मुताबिक अपने इनकम टैक्स रिटर्न में प्रॉपर्टी से नोशनल रेंटल इनकम के बारे में नहीं बताया था।

स्टैंप ड्यूटी बचाने के लिए ज्वाइंट नाम में खरीदी जाती है प्रॉपर्टी

इंडिया में कई मामलों में ऐसा होता है कि कम स्टैंप ड्यूटी का फायदा उठाने के लिए प्रॉपर्टी परिवार की महिला सदस्य के नाम या उसके साथ संयुक्त रूप से खरीदी जाती है। पिछले कुछ मामलों को देखते हुए ओनरशिप का हिस्सा तय करने के लिए आम तौर पर इनकम के स्रोत (Source) को देखा जाात है। हालांकि, इस मामले में कुछ दूसरे तथ्यों की वजह से ITAT की तरफ से फंड्स के स्रोत और किसने पेमेंट किया, इस पर विचार नहीं किया गया।


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आपको किन चीजों का ध्यान रखने की जरूरत है?

इस मामले से प्रॉपर डॉक्युमेंटेशन और इनकम टैक्स रिटर्न में सही जानकारी देने के महत्व के बारे में पता चलता है। इसलिए अगर आप अपने परिवार के सदस्य के साथ संयुक्त नाम से प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

1. रजिस्टर्ड सेल डीड में को-ओनर्स की हिस्सेदारी के बारे में जरूर बताएं

2. सेलर को हर को-ओनर के अपने बैंक अकाउंट से ही अपने हिस्से के पैसे का ट्रांसफर करने दें

3. ओनरशिप के हिस्से के आधार पर इस पर TDS डिडक्ट करें

4. इनकम टैक्स और दूसरे कानूनों के कंप्लायंस को चेक करने के लिए अपने लीगल और टैक्स एडवाइजर से कंसल्ट करें

अगर आपके पास पहले से ऐसी कोई प्रॉपर्टी है, जिसकी रजिस्टर्ड सेल डीड में को-ओनर्स की हिस्सेदारी नहीं बताई गई है तो आपको जरूरी कदम उठाने के लिए अपने मामले से जुड़ी स्थितियों और तथ्यों के हिसाब से अपने टैक्स एडवाइजर्स से कंसल्ट करने की जरूरत है।

इनकम टैक्स के मामले प्रोफेनल्स के लिए भी हर बार कुछ नया लेकर आते हैं, क्योंकि हर मामले के तथ्य और स्थितियां दूसरे से अलग होते हैं। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले पूरा ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इससे खरीदार की जिंदगी भर की बचत जुड़ी होती है।

(अभिषेक अनेजा सीए हैं। वह इनकम टैक्स और पर्सनल फाइनेंस से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हैं)

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