इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग की डेडलाइन करीब आ चुकी है। ऐसे में कई टैक्सपेयर्स के मन में यह सवाल चल रहा है कि पहले टीडीएस के जरिए टैक्स पेमेंट करने के बाद भी क्या उन्हें टैक्स चुकाना पड़ेगा? इस सवाल का जवाब जानने के लिए टीडीएस को ठीक तरह से समझ लेना जरूरी है। जब आपको इनकम होती है तो उसका कुछ हिस्सा पेमेंट के वक्त ही काट लिया जाता है। इसीलिए इसे टीडीएस कहा जाता है।
मान लीजिए आपको बैंक में अपने फिक्स्ड डिपॉजिट से 1 लाख रुपये का इंटरेस्ट मिला है। इस इंटरेस्ट अमाउंट को आपको देने से पहले बैंक इसका कुछ हिस्सा काट लेगा और उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास जमा कर देगा। इस तरह आपकी टैक्स लायबिलिटी का कुछ हिस्सा सरकार के पास जमा हो गया है। वित्त वर्ष के खत्म होने के बाद जब आप रिटर्न फाइल करते हैं तो आपको इसका क्रेडिट मिलता है।
फॉर्म 26एएस और AIS में टीडीएस की जानकारी
कई स्रोतों से होने वाली इनकम टीडीएस के दायरे में आती है। आप फॉर्म 26एएस और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जमा किए गए अपने टीडीएस को देख सकते हैं। इनमें आपकी सैलरी, डिविडेंड, इंटरेस्ट, कमीशन और दूसरी इनकम से काटे गए टीडीएस की जानकारी मिल जाएगी। सवाल यह है कि अगर आपकी इनकम से टीडीएस काटा जा चुका है तो क्या आपको टैक्स देना होगा?
क्या टीडीएस कटा है तो भी टैक्स चुकाना होगा?
इस सवाल का जवाब कई चीजों पर निर्भर करता है। इनमें आपकी ऐसी इनकम और डिडक्शन की जानकारी शामिल है, जिसकी जानकारी आपने अपने एंप्लॉयर को डेक्लेयर नहीं किया होगा। इसके अलावा वित्त वर्ष के दौरान आपको अचानक हुई कोई इनकम हो सकती है। वित्त वर्ष के दौरान स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग में आपको शेयरों से नुकसान हो सकता है। टीडीएस के जरिए टैक्सपेयर्स की कुल टैक्स लायबिलिटी पूरी नहीं होती है। इसके जरिए सरकार सिर्फ किसी टैक्सपेयर की इनकम और रेवेन्यू का ट्रैक रखती है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि टीडीएस के बाद भी आपको टैक्स चुकाने की जरूरत है या नहीं, तो आपको पहले अपनी कुल इनकम का कैलकुलेशन करना होगा फिर यह देखना होगा कि उस पर कितना टैक्स बन रहा है। इसके लिए सबसे पहले आपको सभी स्रोतों से होने वाली इनकम को जोड़ना होगा। इसके बाद हेल्थ पॉलिसी प्रीमियम, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम और होम लोन के इंटरेस्ट पर डिडक्शन का कैलकुलेशन करना होगा। कुल इनकम से कुल डिडक्शन को घटाने पर आपको टैक्सेबल इनकम मिल जाएगी। फिर इस पर आप इनकम टैक्स की नई रीजीम या पुरानी रीजीम के हिसाब से टैक्स का कैलकुलेशन कर सकते हैं।
इसके बाद आपको फॉर्म 26एएस और AIS में कुल टीडीएस डीडक्शन को देखना होगा। अगर आपका कुल टीडीएस आपकी टैक्स लायबिलिटी से ज्यादा है तो आपको रिफंड मिलेगा। अगर आपका कुल डिडक्शन आपकी टैक्स लायबिलिटी से कम है तो आपको अतिरिक्त टैक्स चुकाना होगा।