ITR Filing : इनकम टैक्स फाइलिंग से पहले ये बातें जान लेंगे तो नहीं मिलेगा नोटिस

टैक्सपेयर्स ने रिटर्न फाइल करना शुरू कर दिया है। यहां हम आपको कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं, जिनका ध्यान आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में रखना जरूरी है। इससे बगैर किसी गलती आप रिटर्न फाइल कर सकेंगे। इससे आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिलने की आशंका भी नहीं रहेगी

अपडेटेड Jun 29, 2023 पर 2:10 PM
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अगर आपने एंप्लॉयर के फॉर्म 16 जारी करने से पहले कुछ जरूरी डॉक्युमेंट्स सब्मिट नहीं किया है तो आप रिटर्न फाइल करते वक्त उन्हें सब्मिट कर सकते हैं। लेकिन, यह ध्यान में रखें कि ऐसे मामलों में आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिल सकता है और आपको अपने क्लेम के सपोर्ट में डॉक्युमेंट्स पेश करने होंगे।

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने में आपको थोड़ी दिक्कत आ सकती है। खासकर तब जब आपको यह पता न हो कि आपको क्या करना है और क्या नहीं करना है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख नजदीक आ गई है। टैक्सपेयर्स ने रिटर्न फाइल करना शुरू कर दिया है। यहां हम आपको कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं, जिनका ध्यान आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में रखना जरूरी है। इससे बगैर किसी गलती आप रिटर्न फाइल कर सकेंगे। इससे आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिलने की आशंका भी नहीं रहेगी:

1. AIS और इसके असर को समझें

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कुछ साल पहले अनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटममेंट (AIS) की शुरुआत की थी। आप इसमें आप अपने फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस को देख सकते हैं। इनकम टैक्स विभाग कई स्रोतों से इसकी जानकारियां हासिल करता है। यह फॉर्म 26AS की तरह है, लेकिन इसमें TDS के अलावा दूसरी कई जानकारियां भी शामिल होती हैं। इसमें करीब 50 तरह के ट्रांजेक्शंस की जानकारियां शामिल होती हैं। इनमें क्रेडिट कार्ड पेमेंट, कैश विड्रॉल, डिपॉजिट, जीएसटी रिटर्न, कार पर्चेज और स्टॉक ट्रेडिंग शामिल हैं। रिटर्न फाइल करने से पहले आपको AIS में दी जानकारियां की जांच कर लेनी चाहिए।

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2. AIS फुलप्रूफ स्टेटमेंट नहीं है

आपको यह ध्यान में रखना जरूरी है कि AIS एक फुलप्रूफ स्टेटमेंट नहीं है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को जैसे-जैसे अलग-अलग स्रोतों से जानकारियां मिलती हैं, यह अपडेट होता रहता है। इसलिए हो सकता है कि आपके इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त इसमें आपसे जुड़ी सभी तरह की जानकारियां शामिल न हों। इसलिए आपको उन ट्रांजेक्शन के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिल सकता है, जिसकी जानकारी आपके इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं दी है। आपको अपने ITR में सभी जानकारियां इमानदारी से देना जरूरी है।

3. ऐसे एडिशनल डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस क्लेम करना जो आपके फॉर्म16 में क्लेम नहीं किए गए है

अगर आपने एंप्लॉयर के फॉर्म 16 जारी करने से पहले कुछ जरूरी डॉक्युमेंट्स सब्मिट नहीं किया है तो आप रिटर्न फाइल करते वक्त उन्हें सब्मिट कर सकते हैं। लेकिन, यह ध्यान में रखें कि ऐसे मामलों में आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिल सकता है और आपको अपने क्लेम के सपोर्ट में डॉक्युमेंट्स पेश करने होंगे। पिछले कुछ सालों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ऐसे कई टैक्सपेयर्स को नोटिस भेजे हैं जिन्होंने HRA, LTC आदि क्लेम करने के लिए झूठे डॉक्युमेंट्स पेश किए थे। इसलिए किसी तरह का फर्जी डिडक्शंस क्लेम करना ठीक नहीं है।

4. सेक्शन 80जी के तहत डोनेशन के फर्जी रसीद पर डिडक्शन का दावा नहीं करें

डोनेशन के मामले में यह ध्यान में रखना जरूरी है कि अब इसके नियम बदल गए हैं। अब चैरिटी हासिल करने वाले ट्रस्ट के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को उसकी डिटेल देना जरूरी है। पारदर्शिता के लिए यह नियम बनाया गया है। अगर आपने कुछ डोनेशन किया है, लेकिन यह एनजीओ ट्रस्ट के स्टेटमेंट से मेल नहीं खाता है तो न सिर्फ आपके दावे को खारिज कर दिया जाएगा बल्कि झूठा दावा करने के लिए अप पर पेनाल्टी भी लगाई जा सकती है।

5. टैक्स रिफंड दिलाने वालों के झांसे में न आएं

ऐसे कई लोग हैं जो यह दावा करते हैं कि वे आपको एडिशनल टैक्स रिफंड दिला सकते हैं। अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की स्क्रूटनी में आपका आईटीआर सेलेक्ट होता है और यह पाया जाता है कि आपने इसमें गलत जानकारियां दी हैं तो आप पर पेनाल्टी लग सकती है। टैक्स डिपार्टमेंट आप पर इंटरेस्ट के साथ 200 फीसदी तक पेनाल्टी लगा सकता है। इसके अलावा गलत जानकारी देने के लिए आपके खिलाप डिपार्टमेंट आपराधिक मामला भी दर्ज करा सकता है।

(अभिषेक अनेजा सीए हैं। वह इनकम टैक्स और पर्सनल फाइनेंस से जुड़े मामलों के भी विशेषज्ञ हैं)

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