ITR Filing: आसानी से चेक कर सकते हैं इनकम टैक्स रिफंड का स्टेटस, जानिए क्या है तरीका

ITR Filing: अगर आपने 31 जुलाई तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया है तो आपके बैंक अकाउंट में रिफंड का पैसा आने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। अगर आप चाहें तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर रिफंड का स्टेटस चेक कर सकते हैं

अपडेटेड Jul 17, 2024 पर 5:50 PM
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ITR Filing: 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करने के बाद ही आपके बैंक अकाउंट में रिफंड का पैसा आएगा।

इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की अंतिम तारीख काफी नजदीक आ चुकी है। 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल नहीं करने पर कई तरह के फायदों से आप वचिंत हो जाएंगे। साथ ही आपको रिटर्न फाइल करने के लिए पेनाल्टी और टैक्स पर इंटरेस्ट भी चुकाना होगा। खासकर उन लोगों को 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल कर देना बहुत जरूरी है, जिन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से रिफंड मिलने की उम्मीद है। कई बार ज्यादा टैक्स पेमेंट हो जाने पर इनकम टैक्स अतिरिक्त टैक्स अमाउंट वापस कर देता है। इसे रिफंड कहा जाता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिफंड तभी मिलेगा जब 31 जुलाई तक टैक्सपेयर रिटर्न फाइल कर देगा।

रिटर्न 31 जुलाई तक फाइल करने पर ही आएगा रिफंड

अगर आपने तय समय के अंदर रिटर्न (ITR) फाइल कर दिया है तो रिफंड (Refund) का पैसा आपके बैंक अकाउंट में जल्द आ जाएगा। आजकल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट रिफंड को प्रोसेस बहुत जल्द करता है। रिफंड का स्टेटस इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ऑफिशियल वेबसाइट पर चेक किया जा सकता है। इसके लिए आपको अपने पैन और पासवर्ड के जरिए वेबसाइट पर लॉग-इन करना होगा।


रिफंड स्टेटस चेक करने का प्रोसेस

ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करने के बाद आपको 'ई-फाइल टैब' पर जाना होगा। उस पर क्लिक करने के बाद आपको 'व्यू फील्ड रिटर्न' नजर आएगा। यहां आपके तरफ से फाइल किए गए रिटर्न का डिटेल दिखेगा। आपको हिस्ट्री और करेंस स्टेटस के लिए 'व्यू डिटेल' पर क्लिक करना होगा। अगर आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से रिफंड कर दिया गया होगा तो आपको उसकी डिटेल दिख जाएगी। आपको मोड ऑफ पेमेंट, रिफंड अमाउंट और डेट ऑफ क्लियरेंस दिख जाएगी।

रिफंड का कुछ हिस्सा टैक्स के साथ एडजस्ट हो सकता है

अगर आपको 'प्रोसेस्ड एंड पार्शियली रिफंड एडजस्टेड' दिखता है तो इसका मतलब है कि आपके रिफंड का कुछ हिस्सा बकाया टैक्स के साथ एडजस्ट किया जा सकता है। ऐसे मामलों में रिफंड अमाउंट और क्लियरेंस डेट दिया गया होता है। इसका मतलब है कि आपके पूरे रिफंड अमाउंट का कुछ हिस्सा आपके टैक्स लायबिलिटी के साथ एडजस्ट किया जा सकता है।

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कुछ मामलों में रिफंड रिजेक्ट हो सकता है

कुछ मामलों में रिफंड का क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। इससे आपके बैंक अकाउंट में रिफंड का पैसा क्रेडिट नहीं होगा। ऐसा होने पर तारीख और रिजेक्ट होने की वजह आपको दिख जाएगी। इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक, अगर आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड नहीं है तो आपका रिफंड प्रोसेस नही होगा।

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