वेस्ट एशिया में लंबी खिंचती जंग ने इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी KEC International की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। RPG Group की इस फ्लैगशिप कंपनी ने FY27 के लिए अपना रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस 10-15% से घटाकर 8-10% कर दिया है।

वेस्ट एशिया में लंबी खिंचती जंग ने इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी KEC International की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। RPG Group की इस फ्लैगशिप कंपनी ने FY27 के लिए अपना रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस 10-15% से घटाकर 8-10% कर दिया है।
मुंबई की इस कंपनी को खाड़ी इलाके में आई रुकावटों की वजह से फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में ही करीब 500-600 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का नुकसान हो चुका है। कंपनी के MD और CEO विमल केजरीवाल ने CNBCTV18 से बात करते हुए कहा है कि दूसरी छमाही में मार्जिन कितना सुधरेगा, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि नए ऑर्डर कितनी तेजी से रेवेन्यू में बदलते हैं और बढ़ी हुई लागत के क्लेम कब सेटल होते हैं।
जंग इतनी लंबी चलेगी, कंपनी को अंदाजा नहीं था
KEC International एक ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर EPC कंपनी है। कंपनी का 20% से ज्यादा कारोबार खाड़ी इलाके में है, इसलिए वहां की हर हलचल सीधे इसकी कमाई पर असर डालती है।
कंपनी ने पहले संकेत दिया था कि पहली तिमाही पर असर पड़ेगा और उसका कुछ हिस्सा दूसरी तिमाही तक खिंचेगा। लेकिन चोट उम्मीद से कहीं गहरी निकली। दूसरी तिमाही में रेवेन्यू 10% गिरा और पहली छमाही का रेवेन्यू करीब 5.5-6% नीचे रहा।
केजरीवाल ने माना कि कंपनी ने ये नहीं सोचा था कि जंग इतने लंबे समय तक चलेगी या उसका असर इतना बढ़ जाएगा। उन्होंने हूतियों से जुड़े हालात का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, जंग की वजह से पहली छमाही में 500-600 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू प्रभावित हुआ है और इसने रेवेन्यू ग्रोथ को करीब 2-3 पर्सेंटेज प्वाइंट नीचे खींचा है। उन्होंने कहा कि जब तक जंग नहीं रुकती, तब तक हो सकता है कि कंपनी इस गंवाए हुए रेवेन्यू की भरपाई न कर पाए। इसी वजह से 10-15% का पुराना गाइडेंस अब हासिल करना मुमकिन नहीं है और कंपनी को अब 8-10% के आसपास ग्रोथ की उम्मीद है।
मार्जिन जून 2023 के बाद सबसे नीचे
जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही यानी Q2FY27 में KEC International का रेवेन्यू 5,467 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान कंपनी ने 29 करोड़ रुपये का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स कमाया और मार्जिन 4.96% रहा। ये मार्जिन जून 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है। पूरी पहली छमाही का मार्जिन 5.4% रहा।
मार्जिन पर दबाव की सबसे बड़ी वजह खाड़ी इलाके में बढ़ी लागत है, खास तौर पर फ्यूल की। केजरीवाल के मुताबिक, इस बढ़ी लागत ने सीधे तौर पर मार्जिन को करीब 1.25-1.5 पर्सेंटेज प्वाइंट की चोट पहुंचाई है। कंपनी को अपनी रिग्स, पाइलिंग रिग्स और मशीनरी के लिए 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त फ्यूल खर्च उठाना पड़ा है। इस पर क्लाइंट के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन ये खर्च कंपनी के खातों में पहले ही दर्ज हो चुका है।
केजरीवाल ने बताया कि यही वो बड़ी वजह है जिसके चलते मुनाफा, जिसके पहली तिमाही के मुकाबले सुधरने की उम्मीद थी, दबाव में आ गया। इसके अलावा कंपनी का केबल बिजनेस भी प्रभावित हुआ है, क्योंकि पॉलिमर और दूसरे इनपुट की लागत बढ़ गई है।
खर्च खाते में दर्ज, लेकिन क्लेम का पैसा अभी बाकी
कंपनी की मुश्किल को एक आसान उदाहरण से समझिए। कोई ठेकेदार तय रकम पर मकान बनाने का काम ले और बीच में सीमेंट और डीजल महंगे हो जाएं, तो बढ़ा खर्च उसकी जेब से जाता है। वो मकान मालिक से भरपाई मांगता है, लेकिन पैसा मिलने तक घाटा उसी के सिर रहता है। KEC International इस वक्त कुछ ऐसी ही हालत में है।
केजरीवाल ने बताया कि बढ़ी हुई लागत को अभी रेवेन्यू के तौर पर बुक नहीं किया गया है, जबकि लागत खातों में दर्ज हो चुकी है। कंपनी के कुछ फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स में फोर्स मेज्योर का प्रावधान है, जो लागत को कवर करता है। कंपनी इसी प्रावधान को लेकर क्लाइंट्स से बात कर रही है और ये दलील दे रही है कि कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से उन्हें इसकी भरपाई करनी होगी।
कंपनी ने अपने मिडिल ईस्ट क्लाइंट के सामने भी बढ़ी लागत का मामला रखा है। क्लाइंट का जवाब है कि वो जंग खत्म होने के बाद लागत बढ़ोतरी के सेटलमेंट पर विचार करेगा। तब तक कैश फ्लो और बढ़े खर्च संभालने में मदद के लिए क्लाइंट ने पिछले हफ्ते कंपनी को करीब 300 करोड़ रुपये का एड-हॉक एडवांस दिया है। केजरीवाल ने कहा कि वो ये नहीं कहेंगे कि ये रकम खास तौर पर लागत बढ़ोतरी के लिए है, लेकिन कंपनी को उम्मीद है कि आखिर में इसे पहले से हुए और खातों में दर्ज खर्च के क्लेम सेटलमेंट में एडजस्ट किया जाएगा।
दूसरी छमाही के तीन सहारे
मुश्किल तिमाही के बीच केजरीवाल ने तीन ऐसी बातें गिनाईं, जो Q3 और Q4 में कंपनी का प्रदर्शन सुधार सकती हैं।
पहली बात Power Grid से मिले ऑर्डर हैं। कंपनी को Power Grid से करीब 3,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं, जबकि पिछले 12 महीनों में ऐसा नहीं हुआ था। ये ऑर्डर दिसंबर से रेवेन्यू में बदलने लगेंगे। केजरीवाल को उम्मीद है कि भारत का T&D बिजनेस अगले महीने से रफ्तार पकड़ेगा।
दूसरी बात अफगानिस्तान से आया पैसा है। सितंबर खत्म होने के बाद कंपनी को अफगानिस्तान से 2 करोड़ डॉलर से ज्यादा की वो रकम मिली, जो करीब पांच साल से अटकी हुई थी। अटकी हुई रकम में से करीब 1.5 करोड़ डॉलर अभी बाकी है। इसके लेंडर एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB ने भरोसा दिलाया है कि उम्मीद है ये पेमेंट इसी तिमाही में आ जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि जो 200 करोड़ रुपये मिले, वो भी पिछली तिमाही में आने थे, लेकिन तिमाही खत्म होने के बाद आए। फिर भी कंपनी उम्मीद में है, क्योंकि उसके पास पेमेंट की पुष्टि करने वाला लिखित कम्युनिकेशन है।
तीसरी बात मिडिल ईस्ट के क्लाइंट से मिला करीब 300 करोड़ रुपये का एड-हॉक एडवांस है, जिसका जिक्र ऊपर हो चुका है।
ऑर्डर इनफ्लो टारगेट भी 2,000 करोड़ घटा
कंपनी ने पूरे साल के ऑर्डर इनफ्लो टारगेट में भी कटौती की है। पहले लक्ष्य 30,000 करोड़ रुपये का था, जो अब करीब 28,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पहली छमाही में कंपनी 13,500 करोड़ रुपये के ऑर्डर हासिल कर चुकी है।
केजरीवाल ने बताया कि टारगेट करीब 2,000 करोड़ रुपये इसलिए घटाया जा रहा है, क्योंकि कंपनी सिविल बिजनेस को लेकर सतर्क रुख अपना रही है। सिविल में जितने ऑर्डर की योजना थी, उसमें कुछ कमी आने की उम्मीद है। लेकिन T&D बिजनेस में कंपनी पुराने टारगेट से आगे जाने की कोशिश कर रही है।
ऑर्डर पाइपलाइन को केजरीवाल काफी मजबूत बताते हैं। कंपनी के पास करीब 3,500 करोड़ रुपये की L1 पोजिशन है, यानी इन टेंडरों में कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली रही है। ट्रांसमिशन बिजनेस में खास तौर पर भारत, UAE और अफ्रीका में पाइपलाइन दिख रही है।
वर्किंग कैपिटल 125 दिन तक लाने की उम्मीद
कंपनी की वर्किंग कैपिटल 155 दिन पर थी। पहले कंपनी को उम्मीद थी कि साल के अंत तक इसे करीब 120 दिन तक ले आएगी। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कंपनी 120 दिन तक पहुंच पाएगी, लेकिन इसे करीब 125 दिन तक लाने की उम्मीद अब भी है।
मजदूरों की कमी भी कंपनी के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। पिछली बार कंपनी के पास 30,000 मजदूरों की जरूरत के मुकाबले करीब 21,000 मजदूर थे। अब ये संख्या बढ़कर करीब 24,000-25,000 हो गई है। लेकिन केजरीवाल के मुताबिक दबाव पहले जैसा ही बना हुआ है। दिवाली के साथ छठ पूजा का समय भी शुरू हो रहा है, इसलिए मजदूरों की उपलब्धता ऐसा मुद्दा बनी हुई है, जिसे कंपनी पूरी तरह सुलझा नहीं पाई है।
दूसरी छमाही के मार्जिन पर केजरीवाल ने कोई आंकड़ा देने से इनकार किया। उनका कहना है कि इस वक्त नंबर बताना मुश्किल है। मार्जिन इस बात पर टिका रहेगा कि क्लेम कितनी जल्दी सेटल होते हैं और Q2 में मिले Power Grid और दूसरे ऑर्डर कितनी जल्दी रेवेन्यू में बदलते हैं। जब तक क्लेम सेटल नहीं होते, कंपनी उनसे जुड़ा रेवेन्यू दर्ज नहीं कर सकती। KEC International का मौजूदा मार्केट कैपिटलाइजेशन 8,899.07 करोड़ रुपये है।
शेयर का क्या हाल है?
मंगलवार को बाजार खुलते ही KEC International के शेयर दबाव में दिखे. इंट्राडे में स्टॉक में 8% की गिरावट नजर आई. स्टॉक अपने पिछले बंद भाव (348.85) से 16 रुपये नीचे खुला. इसके बाद शेयर में और गिरावट आई और 10:55 बजे तक स्टॉक 7.64% तक टूट कर 322 रुपये पर पहुंच गया.
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