Key Fact Statement से अब ग्राहकों को लोन के असल इंटरेस्ट रेट की जानकारी मिल सकेगी, जानिए क्या-क्या हैं KFS के फायदे

RBI ने इस साल फरवरी में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में KFS का ऐलान किया था। 15 अप्रैल को केंद्रीय बैंक ने केएफएस के बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं। RBI ने कहा है कि केएफएस का मकसद लोन से जुड़े चार्जेज में पारदर्शिता लाना है

अपडेटेड Apr 17, 2024 पर 12:44 PM
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KFS सभी रिटेल और एमएसएमई टर्म लोन प्रोडक्ट्स पर लागू होगा।

क्या आपने बैंक से लोन लिया है? अगर हां तो अब आप जान सकेंगे की आपके लोन की असल कॉस्ट क्या है। बैंक और एनबीएफसी को अब की फैक्ट स्टेटमेंट (KFS) जारी करना होगा। इसकी मदद से ग्राहकों के लिए लोन की कॉस्ट जानना मुमकिन होगा। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस साल फरवरी में इस बारे में बताया था। उन्होंने बैंकों को ग्राहकों को एनुअलाइज्ड पर्सेंटेज रेट (लोन की कुल कॉस्ट) की जानकारी देने को कहा था। एनुअलाइज्ड पर्सेंटेज रेट (APR) में न सिर्फ इंटरेस्ट रेट की जानकारी होगी बल्कि लोन से जुड़ी दूसरी कॉस्ट के बारे में भी बताया जाएगा।

RBI ने केएफएस के बारे में निर्देश जारी किए

RBI ने 15 अप्रैल को KFS के बारे में निदेश जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इसका मकसद लोन के मामले में पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को लोन के बारे में ज्यादा जानकारी देना है। इससे उसे सही फैसला लेने में मदद मिलेगी। KFS सभी रिटेल और एमएसएमई टर्म लोन प्रोडक्ट्स पर लागू होगा। केएफएस को समझना आसान होगा। इसमें लोन से जुड़े सभी प्रमुख टर्म्स शामिल होंगे। सभी तरह के चार्ज और फीस के बारे में भी जानकारी होगी।


केएफएस में इंश्योरेंस, लीगल सहित सभी चार्ज शामिल होंगे

सिंघानिया एंड कंपनी के पार्टनर राजीव शर्मा ने कहा, "केएफएस एक तरह से कंकाल (Skeleton) की तरह होगा। ग्राहक को इसके सभी ज्वाइंट्स, बेंडिंग और मूवमेंट की जानकारी इससे मिल जाएगी।" एनुअलाइज्ड पर्सेंटेज रेट का मतलब उस कॉस्ट से है, जो ग्राहक लोन पर चुकाता है। इसमें इंटरेस्ट रेट और दूसरे सभी तरह के चार्ज शामिल होते हैं। दूसरे चार्ज में इंश्योरेंस चार्ज, लीगल चार्ज और एडिशनल फीस शामिल हैं।

केएफएस में एपीआर की कंप्यूटेशन शीट भी होंगी

केएफएस को APR की एक कंप्यूटेशन शीट भी उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा उसमें लोन के रीपेमेंट पीरियड का अमॉर्टाइजेशन शिड्यूल भी होगा। बैंक ग्राहकों से जिन चार्जेज को वसूलेगा, उनके बारे में उसे ग्राहक को जानकारी उपलब्ध करानी होगी। उसे हर पेमेंट के लिए यह जानकारी देनी होगी। बैंक सिर्फ वही चार्ज और फीस वसूल सकेंगे जिनकी जानकारी केएफएस में शामिल होंगी।

केएफएस नहीं मिलने पर कर सकते हैं शिकायत

केएफएस ग्राहक के लिए एक स्टैंडर्ड डॉक्युमेंट है जो लोन के चार्जेज से जुड़ी हर जानकारी उपलब्ध उन्हें उपलब्ध कराएगा। अगर किसी ग्राहक को बैंक या एनबीएफसी की तरफ से केएफएस उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो वह बैंक से इस बारे में शिकायत कर सकता है। केएफएस में अगर आपको गलत जानकारी दिखती है तो उसकी भी शिकायत बैंक से की जा सकती है।

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