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No Cost EMI: जानिए "नो-कॉस्ट EMI" के पीछे का सच, आसान किस्तों के पीछे छिपा असली खर्च

No Cost EMI: नो-कॉस्ट EMI ऑफर सुनने में आकर्षक लगता है, लेकिन इसमें छिपे हुए चार्ज और डिस्काउंट की कटौती से ग्राहकों को असली बचत नहीं मिलती। किस्तों में भुगतान आसान है, पर कुल लागत का सही हिसाब लगाना जरूरी है ताकि जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Jan 24, 2026 पर 3:50 PM
No Cost EMI: जानिए "नो-कॉस्ट EMI" के पीछे का सच, आसान किस्तों के पीछे छिपा असली खर्च

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर आजकल नो-कॉस्ट EMI का विकल्प सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, घरेलू उपकरण या फर्नीचर – हर जगह यह ऑफर दिखता है। ग्राहकों को लगता है कि बिना ब्याज के किस्तों में भुगतान करना समझदारी है, लेकिन हकीकत कुछ और है।

नो-कॉस्ट EMI कैसे काम करता है?

असल में बैंक इस EMI पर ब्याज वसूलते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि विक्रेता या प्लेटफॉर्म उस ब्याज को डिस्काउंट के रूप में एडजस्ट कर देता है। यानी ग्राहक को लगता है कि वह बिना ब्याज के किस्तें चुका रहा है, लेकिन कई बार यह डिस्काउंट अन्य ऑफर्स या कार्ड डिस्काउंट से काट लिया जाता है। नतीजा यह होता है कि ग्राहक को असली बचत नहीं मिलती।

छिपे हुए खर्च

- कई प्लेटफॉर्म्स नो-कॉस्ट EMI चुनने पर तुरंत मिलने वाले कार्ड डिस्काउंट हटा देते हैं।

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