क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो लाइफ इंश्योरेंस खरीदने का क्या फायदा? पॉलिसी लेते वक्त इन बातों का जरूर रखें ध्यान

इंश्योरेंस कंपनियां ग्राहक को पॉलिसी बेचने में जितनी दिलचस्पी दिखाती है, उतनी क्लेम के एप्रूवल में नहीं दिखातीं। कई बार क्लेम में बेवजह की देर होती है। कई बार बीमा कंपनियां क्लेम रिजेक्ट कर देती है। ज्यादातर वे इसके लिए तथ्यों को छुपाने जैसी वजहें बताती हैं

अपडेटेड Sep 27, 2025 पर 4:47 PM
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पहले से किसी तरह की बीमारी होने या सिगरेट या शराब पीने वाले पॉलिसीहोल्डर के लिए प्रीमियम बढ़ जाता है।

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने का एकमात्र मकसद आर्थिक सुरक्षा है। इसके लिए पॉलिसीहोल्डर प्रीमियम का पेमेंट करता है। वह उम्मीद करता है कि किसी अनहोनी की स्थिति में लाइफ इंश्योरेंस कंपनी नॉमिनी को इंश्योरेंस का पैसा देगी, जिससे उसके बीवी और बच्चों को आर्थिक दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। कई लोग तो इसीलिए करोड़ों रुपये कवर वाली पॉलिसी लेते हैं। लेकिन, किसी अनहोनी की स्थिति में बीमा कंपनी के क्लेम रिजेक्ट करने पर परिवार की मुसीबतें बढ़ जाती हैं।

बीमा कंपनियां पॉलिसी बेचने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाती हैं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंश्योरेंस कंपनियां ग्राहक को पॉलिसी बेचने में जितनी दिलचस्पी दिखाती है, उतनी क्लेम के एप्रूवल में नहीं दिखातीं। कई बार क्लेम में बेवजह की देर होती है। कई बार बीमा कंपनियां क्लेम रिजेक्ट कर देती है। ज्यादातर वे इसके लिए तथ्यों को छुपाने जैसी वजहें बताती हैं। उनका कहना होता है कि पॉलिसीहोल्डर ने पॉलिसी खरीदते वक्त तथ्यों के बारे में बीमा कंपनी को नहीं बताया था। पॉलिसीहोल्डर के नहीं रहने पर परिवार के सदस्यों के लिए इस आरोप का जवाब देना मुश्किल होता है।


तथ्य छुपाने की दलील देकर रिजेक्ट करती हैं क्लेम

कंपनियां सबसे ज्यादा क्लेम इस वजह से रिजेक्ट कर देती हैं कि पॉलिसीहोल्डर ने पहले से चली आ रही बीमारी के बारे में कंपनी को नहीं बताया था। उसने प्रपोजल फॉर्म में इस बारे में कुछ नहीं बताया था। कुछ कंपनियों की दलील होती है कि पॉलिसीहोल्डर सिगरेट पीता था, अल्कोहल लेता था। लेकिन उसने पॉलिसी खरीदते वक्त इस बारे में कंपनी को जानकारी नहीं दी थी। पहले से किसी तरह की बीमारी होने या सिगरेट या शराब पीने वाले पॉलिसीहोल्डर के लिए प्रीमियम बढ़ जाता है।

पहले से बीमारी होने पर बढ़ जाता है प्रीमियम

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद रहे हैं तो आपको कंपनी को अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री बतानी चाहिए। अगर कोई बीमारी है या पॉलिसीहोल्डर सिगरेट या शराब पीता है तो इसकी जानकारी बीमा कंपनी को देने से वह प्रीमियम थोड़ा बढ़ सकती है। लेकिन, तब वह क्लेम को रिजेक्ट नहीं कर पाएगी। कई लोग पॉलिसी खरीदने के प्रोसेस को गंभीरता से नहीं लेते हैं। इसकी वजह बीमा कंपनियों की पॉलिसी बेचने में जल्दबाजी होती है। लेकिन, इस जल्दबाजी से कंपनी को नहीं बल्कि पॉलिसीहोल्डर को नुकसान उठाना पड़ता है।

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