देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने अब मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर सख्ती से लगाम लगाने की ठान ली है। फर्जी वोटरों और डुप्लीकेट एंट्री को रोकने के लिए आयोग वोटर आईडी (EPIC) को आधार से जोड़ने की योजना पर पुनर्विचार कर रहा है। इस कदम से उन लोगों की पहचान संभव होगी, जो अलग-अलग जगहों पर एक से अधिक बार पंजीकृत हैं। आयोग ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए आज एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें केंद्रीय गृह सचिव, विधायी विभाग के सचिव और UIDAI के सीईओ शामिल होंगे।
अगर ये प्रस्ताव लागू होता है, तो भविष्य में चुनावी प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होगी, जिससे मतदाता सूची में किसी भी तरह की धांधली और फर्जीवाड़े की संभावना कम हो जाएगी।
महत्वपूर्ण बैठक से जुड़ेगा भविष्य का फैसला
इस मुद्दे को लेकर 18 मार्च को चुनाव आयोग की एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें केंद्रीय गृह सचिव, विधायी विभाग के सचिव और UIDAI के सीईओ शामिल होंगे। इस बैठक में वोटर आईडी और आधार लिंकिंग से जुड़ी तमाम कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में वोटर आईडी की डुप्लीकेट एंट्री को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच ये बैठक और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
फर्जी वोटरों पर लगेगी रोक
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार, इस पहल से फर्जी वोटरों की पहचान करना और उन्हें सूची से हटाना आसान होगा। कई राजनीतिक दलों, जैसे तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (UBT), एनसीपी (SCP) और बीजेडी ने एक ही EPIC नंबर वाले मतदाताओं की समस्या उठाई थी। आयोग ने ये माना कि कुछ राज्यों में तकनीकी कारणों से एक ही वोटर आईडी नंबर दो बार जारी हो गया था, लेकिन इसे फर्जीवाड़ा नहीं कहा जा सकता। अब इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
क्या वोटर आईडी को आधार से जोड़ना अनिवार्य होगा?
2023 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पर चुनाव आयोग ने कहा था कि आधार नंबर देना जरूरी नहीं, ये वैकल्पिक है। हालांकि, अब आयोग कानूनी और तकनीकी समाधानों पर विचार कर रहा है, जिससे ये प्रक्रिया अनिवार्य भी हो सकती है, ठीक वैसे ही जैसे आधार और पैन कार्ड को लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया था।
चुनाव आयोग की सुधार योजनाओं का अहम हिस्सा
चुनाव आयोग लंबे समय से आधार सीडिंग (Voter ID-Aadhaar Linking) का समर्थन करता रहा है। 2017 में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन भी दायर किया था, जिसमें आधार को वोटर आईडी से जोड़ने की अनुमति मांगी गई थी। आयोग का मानना है कि ये मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएगा। इसके अलावा, ये पहल चुनावी सुधारों के अन्य महत्वपूर्ण प्रयासों जैसे एडवांस वोटिंग सिस्टम, घरेलू प्रवासियों के लिए रिमोट वोटिंग और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने में भी सहायक होगी।
तीन महीने में हटेंगे डुप्लीकेट वोटर
आयोग ने ये भी घोषणा की है कि अगले तीन महीनों में वो डुप्लीकेट वोटर एंट्री हटाने की प्रक्रिया पूरी करेगा। इसके लिए 800 से अधिक जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्थानीय राजनीतिक दलों के साथ 5000 से अधिक बैठकों के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। इन बैठकों से मिली प्रतिक्रिया को 31 मार्च तक आयोग को सौंपा जाएगा।
अब देखना होगा कि 18 मार्च की इस बैठक में क्या फैसला लिया जाता है और क्या भारत में जल्द ही वोटर आईडी और आधार लिंक करना अनिवार्य हो जाएगा।