जेब में एक्स्ट्रा पैसा आते ही सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है, क्या इससे लोन जल्दी खत्म करें या इसे निवेश करके बढ़ाएं? एक फैसला आपको लोन से जल्दी आजादी दिला सकता है, तो दूसरा फ्यूचर में बड़ा फंड बना सकता है। ऐसे में सही ऑप्शन चुनना आसान नहीं होता, क्योंकि यह पूरी तरह आपके ब्याज दर, जोखिम लेने की क्षमता और फाइनेंशियल जरूरतों पर निर्भर करता है।
लोन चुकाना मतलब - तय फायदा
अगर आप अतिरिक्त पैसे से लोन का हिस्सा चुका देते हैं, तो आप उतनी ही ब्याज दर के बराबर गारंटीड रिटर्न कमा लेते हैं। जैसे अगर आपके लोन पर 10% ब्याज है, तो प्रीपेमेंट करने पर आप बिना किसी जोखिम के 10% का फायदा पा रहे हैं। इसलिए इसे सेफ ऑप्शन माना जाता है।
इन्वेस्टमेंट में रिटर्न, लेकिन रिस्क भी
दूसरी ओर इन्वेस्टमें में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन यह तय नहीं होता। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड लंबे समय में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव भी होता है। यानी इन्वेस्टमेंट में फायदा भी हो सकता है और नुकसान भी।
अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड बकाया, पर्सनल लोन या कोई हाई-इंटरेस्ट लोन है, तो उसे जल्दी चुकाना सबसे समझदारी भरा कदम होता है। इन लोन पर ब्याज बहुत ज्यादा होता है, जिसे कोई भी इन्वेस्टमेंट आसानी से मात नहीं दे सकता।
होम लोन जैसे कुछ लोन में इंटरेस्ट रेट बाकी लोन की तुलना मे कम होता है। ऐसे में सारा पैसा प्रीपेमेंट में लगाने के बजाय उसका कुछ हिस्सा इन्वेस्ट करना बेहतर हो सकता है। लेकिन इसके लिए लंबे पीरियड तक इन्वेस्ट बनाए रखना जरूरी है।
अगर आप पूरा एक्स्ट्रा पैसा लोन चुकाने में लगा देते हैं, तो आपके पास इमरजेंसी के लिए कैश नहीं बचेगा। इसलिए यह जरूरी है कि पहले एक इमरजेंसी फंड तैयार रखें, फिर ही प्रीपेमेंट या इन्वेस्टमेंट का फैसला करें।
कुछ लोगों को लोन फ्री होने में सुकून मिलता है, जिससे वे मानसिक रूप से ज्यादा शांत रहते हैं। वहीं कुछ लोग इन्वेस्टमेंट से मिलने वाले लंबे समय के फायदे को ज्यादा महत्व देते हैं।
क्या हो सकता है सही तरीका?
अक्सर सबसे अच्छा तरीका दोनों का बैलेंस होता है। यानी कुछ पैसा लोन चुकाने में लगाएं और कुछ इन्वेस्ट करने में लगाएं। इससे आप जोखिम भी कम कर सकते हैं और भविष्य के लिए बेहतर रिटर्न भी बना सकते हैं। लोन चुकाना या इन्वेस्ट करना, दोनों ही सही हो सकते हैं, यह आपकी स्थिति पर निर्भर करता है। अगर ब्याज ज्यादा है तो लोन खत्म करें, और अगर ब्याज कम है तो इन्वेस्टमेंट पर भी ध्यान दें।