NPS में हुआ बड़ा बदलाव, बैंकों को मिली अपनी पेंशन फंड शुरू करने की मंजूरी... निवेशकों को होगा फायदा

भारत में रिटायरमेंट सेविंग्स को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने तय किया है कि अब शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक खुद अपने पेंशन फंड बना सकेंगे और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को मैनेज कर पाएंगे।

अपडेटेड Jan 02, 2026 पर 10:12 PM
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नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले करोड़ों लोगों के लिए पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने बड़ा कदम उठाया है। अब शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों को NPS के लिए अपना पेंशन फंड स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई। इससे पेंशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, विकल्पों का विस्तार होगा और सब्सक्राइबर्स को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

बैंकों के लिए नई संभावनाएं

पहले नियमों के कारण बैंकों की भूमिका पेंशन फंड्स में सीमित थी, लेकिन अब मजबूत फाइनेंशियल स्थिति वाले बैंक स्वतंत्र रूप से फंड चला सकेंगे। योग्यता में न्यूनतम नेटवर्थ, मार्केट कैपिटलाइजेशन और RBI मानकों पर प्रूडेंशियल साउंडनेस जरूरी। वित्त मंत्रालय जल्द नोटिफिकेशन जारी करेगा, जो नए और मौजूदा फंड्स पर लागू होगा। यह बदलाव NPS को मजबूत बनाएगा।

ट्रस्ट बोर्ड में नई नियुक्तियां


गवर्नेंस सुधार के तहत NPS ट्रस्ट बोर्ड में तीन नए ट्रस्टी जोड़े गए: पूर्व SBI चेयरमैन दिनेश कुमार खारा (नए चेयरपर्सन), UTI AMC की पूर्व EVPI स्वाति अनिल कुलकर्णी और डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के को-फाउंडर अरविंद गुप्ता। ये दिग्गज पेंशन सिस्टम को और पारदर्शी बनाएंगे। PFRDA का उद्देश्य ग्राहक हितों की रक्षा करना है।

पेंशन फंड्स की भूमिका

पेंशन फंड NPS में सब्सक्राइबर्स का पैसा इकट्ठा करता, निवेश करता और रिटायरमेंट पर भुगतान सुनिश्चित करता। बैंकों के आने से डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ेगा, फीस कम हो सकती है। निवेशक ज्यादा विकल्प चुन सकेंगे। यह सुधार NPS को लोकप्रिय बनाने में मददगार साबित होंगे।

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