Middle East Crisis: आज 10 लाख रुपये का निवेश कहां करने पर मिलेगा सबसे ज्यादा मुनाफा?

व्हाइटओक कैपिटल एसेट मैनेजेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश का फैसला बाजार में उतार-चढ़ाव के आधार पर लेना समझदारी नहीं है। इसकी वजह इनवेस्टर्स को अपने फाइनेंशियल गोल और रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर निवेश के फैसले लेने चाहिए

अपडेटेड Mar 12, 2026 पर 4:48 PM
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जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से थोड़े समय के लिए बाजार गिरता है। उसके बाद रिकवरी आती है।

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है। सोने और चांदी में भी नरमी दिखी है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई है। सवाल है कि आज 10 लाख रुपये का निवेश कहां करने पर होगी सबसे ज्यादा कमाई? व्हाइटओक कैपिटल एसेट मैनेजेंट की एक रिपोर्ट में इस सवाल का जवाब है। फंड हाउस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर कहां निवेश करना समझदारी है।

हर इनवेस्टर के लिए एक जैसी स्ट्रेटेजी काम नहीं करती

फंड हाउस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इनवेस्टर्स को जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स या मार्केट से जुड़ी खबरों के आधार पर निवेश का फैसला लेने की जगह अपने फाइनेंशियल गोल्स और रिस्क लेने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। इसका मतलब है कि हर इनवेस्टर्स के निवेश की एक जैसी स्ट्रेटेजी नहीं हो सकती। हर निवेशक के रिस्क लेने की क्षमता अलग-अलग होती है।


गिरावट में पोर्टफोलियो की रीबैलेंसिंग है बहुत जरूरी

इस रिपोर्ट के मुताबिक, अगर किसी निवेशक की रिस्क लेने की क्षमता मध्यम है तो वह 65 फीसदी शेयरों में, 25 फीसदी डेट में और बाकी 10 फीसदी गोल्ड में निवेश कर सकता है। उसे रीबैलेंसिंग के लिए 5 फीसदी कम या ज्यादा का बैंड रखना होगा। अगर शेयरों में ऐलोकशन घटकर 60 फीसदी से नीचे या बढ़कर 70 फीसदी से ऊपर चला जाता है तो उसे पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना होगा।

बाजार में गिरावट से ऐलोकेशंस बदल जाता है

किसी बड़ी घटना की प्रतिक्रिया में मार्केट में करेक्शंस की वजह से पोर्टफोलियो का ऐलोकेशन बदल जाता है। शेयर बाजार में गिरावट आने पर पोर्टफोलियो में शेयरों का हिस्सा पोर्टफोलियो की कुल वैल्यू के लिहाज से कम हो जाता है। साथ ही डेट या गोल्ड जैसे स्टेबल एसेट्स की हिस्सेदारी बढ़ जाती है। ऐसे में पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने के लिए आपके पास कम कीमत पर शेयर खरीदने का मौका होता है।

एसेट ऐलोकेशन को ऐसे आसानी से समझ सकते हैं

इस रिपोर्ट में एक उदाहरण के जरिए इसे समझाया गया है। मान लीजिए किसी इनवेस्टर के पोर्टफोलियो में 65 फीसदी शेयर और 35 फीसदी डेट है। फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन की लड़ाई शुरू होने पर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। इससे इनवेस्टर के पोर्टफोलियो में शेयरों की हिस्सेदारी घटकर 58 फीसदी पर आ गई। तब गिरावट की वजह से घबराहट में शेयर बेचने की जगह इनवेस्टर ने ऑरिजिनल एसेट ऐलोकेशन बनाए रखने के लिए डेट से पैसे निकालकर शेयरों में लगाया।

गिरावट में शेयर बेचने पर पोर्टफोलियो को होता है नुकसान

अगले 18 महीनों में बाजार में रिकवरी से पोर्टफोलियो की वैल्यू 25 फीसदी से ज्यादा चढ़ी। फंड हाउस ने बताया है कि ऐसे इनवेस्टर्स जो मार्केट में बड़ी गिरावट की वजह से शेयर बेच देते हैं उनके पोर्टफोलियो का प्रदर्शन कमजोर रहता है। इसकी वजह है कि एक बार शेयर बेचने के बाद मार्केट में तेजी के दौरान वे दोबारा निवेश नहीं कर पाते।

कई बार मार्केट में बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी आती है

इस रिपोर्ट में कई जियोपॉलिटिकल इवेंट्स का उदाहरण दिया गया है। तब कुछ समय तक गिरावट के बाद मार्केट में बड़ी रिकवरी देखने को मिली थी। 1998 में रूस में कर्ज संकट के दौरान सेंसेक्स 10 फीसदी से ज्यादा गिरा था। लेकिन, छह महीनों के अंदर उसमें रिकवरी आ गई। 2001 में आतंकी हमलों के बाद निफ्टी दो हफ्तों में करीब 17 फीसदी गिरा था। लेकिन, साल के अंत तक वह हमलों से पहले स्तर पर आ गया।

जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर थोड़े समय तक रहता है

2008 में मुंबई में आतंकी हमलों के बाद भी मार्केट में रिकवरी आई थी। 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट स्ट्राइक का असर भी मार्केट पर थोड़े समय के लिए देखने को मिला था। 2020 में कोविड की महामारी के समय मार्केट में बड़ी गिरावट आई थी। तब निफ्टी करीब 32 फीसदी गिर गया था। लेकिन, चार महीनों में मार्केट में रिकवरी आ गई। 2022 में रूस-यूक्रेन की लड़ाई के बाद निफ्टी 18,000 से गिरकर 15,200 पर आ गया था। फिर यह 25,000 के ऊपर पहुंच गया।

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मार्केट पर कॉर्पोरेट अर्निंग्स और वैल्यूएशंस का ज्यादा असर पड़ता है

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जियोपॉलिटिकल टेशन का मार्केट पर कुछ समय के लिए असर पड़ता है। लेकिन, लंबी अवधि में मार्केट पर कॉर्पोरेट अर्निंग्स, इंटरेस्ट रेट्स और वैल्यूएशंस का ज्यादा असर पड़ता है। इसलिए मार्केट में बड़ी गिरावट के बीच भी इनवेस्टर्स को एसेट ऐलोकेशन का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें मार्केट में गिरावट और तेजी पर ध्यान देने की जगह अपने पोर्टफोलियो के ऐलोकेशन को मेंटेन करना चाहिए।

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