Gold-Silver Outlook: सोने और चांदी में गिरावट, क्या यह खरीदारी का सही समय है?

12 मार्च को स्पॉट गोल्ड 0.4 फीसदी गिरकर 5,153 डॉलर प्रति औंस था। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स (अप्रैल डिलीवरी) भी 0.4 फीसदी की कमजोरी के साथ 5,159.20 डॉलर प्रति औंस था। सिल्वर स्पॉट 0.5 फीसदी गिरकर 85.33 डॉलर प्रति औंस था

अपडेटेड Mar 12, 2026 पर 12:57 PM
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद से बुलियन की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

सोने और चांदी में 12 मार्च को गिरावट आई। डॉलर में मजबूती और अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में कमी की घटती उम्मीदों का असर गोल्ड पर पड़ा। स्पॉट गोल्ड 0.4 फीसदी गिरकर 5,153 डॉलर प्रति औंस था। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स (अप्रैल डिलीवरी) भी 0.4 फीसदी की कमजोरी के साथ 5,159.20 डॉलर प्रति औंस था। सिल्वर स्पॉट 0.5 फीसदी गिरकर 85.33 डॉलर प्रति औंस था। इधर, भारत में भी गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स पर दबाव दिखा।

कमजोर खुलने के बाद संभला सिल्वर फ्यूचर्स

कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में 12 बजे Gold Futures (अप्रैल डिलीवरी) 0.18 फीसदी की कमजोरी के साथ 1,61,481 रुपये प्रति 10 ग्राम था। सिल्वर (मई डिलीवरी) कमजोर खुला। उसके बाद उसमें रिकवरी दिखी। यह 0.58 फीसदी की तेजी के साथ 1,69,875 रुपये प्रति किलोग्राम था।


28 फरवरी के बाद गोल्ड और सिल्वर में गिरावट

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद से बुलियन की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। तब से गोल्ड में करीब 1.29 फीसदी की कमजोरी आई है। इस दौरान सिल्वर 8 फीसदी से ज्यादा गिरा है। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर बुलियन में तेजी आती है।

जनवरी के अंत में गोल्ड और सिल्वर रिकॉर्ड ऊंचाई पर 

इस साल जनवरी के आखिर में गोल्ड और सिल्वर की कीमतें ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई थीं। स्पॉट गोल्ड 5,608.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। इंडिया में 29 जनवरी को 24 कैरेट गोल्ड का भाव 1,78,850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। भारत के कई शहरों में चांदी का भाव 4,10,000 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया था। विदेश में सिल्वर 121.69 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। उसके बाद से दोनों में गिरावट देखने को मिली है।

मध्यपूर्व में लड़ाई के बावजूद गोल्ड में कमजोरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह डॉलर में मजबूती है। 12 मार्च को डॉलर में 0.2 फीसदी की मजबूती आई। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। गोल्ड में गिरावट की दूसरी वजह अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में कमी की घटती उम्मीद है। महंगाई बढ़ने से अमेरिका में जल्द इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद नहीं दिख रही।

जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर गोल्ड में आती है तेजी

एबीसी रिफानरी में ग्लोबल हेड (इंस्टीट्यूशनल मार्केट्स) निकोलस फ्रैपल ने कहा, "ऐसा लगता है कि मध्यपूर्व में बढ़ती हिंसा के बावजूद डॉलर में मजबूती और अमेरिका में रेट घटने की कम होती उम्मीद का असर गोल्ड पर पड़ रहा है। आम तौर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से गोल्ड चढ़ता है।" हालांकि, गोल्ड और सिल्वर दोनों का प्रदर्शन 2025 में शानदार रहा। इससे इनमें निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

इनवेस्टर्स 'इंतजार करो और देखो' की पॉलिसी अपना रहे

कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा, "गोल्ड और सिल्वर की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं। हालांकि, सुरक्षित निवेश के लिए गोल्ड की डिमांड बढ़ने से कीमतों में तेजी आ सकती है। लेकिन, डॉलर में मजबूती एक बड़ी बाधा है।" उन्होंने कहा कि यूएई और भारत में गोल्ड ज्वेलरी की मांग सुस्त पड़ रही है। इसकी वजह मध्यपूर्व में चल रही लड़ाई है। फिलहाल लोग गोल्ड और सिल्वर में 'इंतजार करो और देखो' की पॉलिसी अपना रहे हैं।

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आपको क्या करना चाहिए?

गुप्ता ने कहा कि गोल्ड और सिल्वर का लॉन्ग टर्म ट्रेंड पॉजिटिव है। इस साल दिवाली तक गोल्ड 5500-5600 डॉलर प्रति औंस और सिल्वर 100-110 डॉलर प्रति औंस तक जा सकते हैं। जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर नहीं है, वे इनमें निवेश कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर की हिस्सेदारी 10-15 फीसदी तक हो सकती है।

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