मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में ऑयल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे में भारत में भी लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। खासकर हाल ही में घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है।
दरअसल, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल की सप्लाई को सीमित कर दिया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के ऑयल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इससे कई देशों में फ्यूल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हालांकि भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। सरकार अंतरराष्ट्रीय ऑयल बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल उम्मीद है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां बढ़ी हुई लागत का दबाव कुछ समय तक खुद वहन करेंगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी लोगों को आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार देश में फ्यूल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई सुनिश्चित करना है। इसके अलावा अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों जैसे जरूरी एरिया को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
सरकार ने हाल ही में Essential Commodities Act यानी आवश्यक वस्तु अधिनियम का भी इस्तेमाल किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई में कोई बाधा न आए और कालाबाजारी जैसी समस्याओं को रोका जा सके।
इस कानून के तहत सरकार जरूरत पड़ने पर प्रोडक्शन, सप्लाई और वितरण पर नियंत्रण कर सकती है ताकि आम लोगों को जरूरी चीजें सही कीमत पर मिलती रहें। फिलहाल सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की पर्याप्त उपलब्धता है। हालांकि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसलिए आने वाले समय में स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।