कौन कहता है कि पैसा पेड़ पर नहीं लगता? मंदिर के एक पुजारी ने ये कर दिखाया, लगा दिया ‘मनी ट्री’

कौन कहता है कि पैसा पेड़ पर नहीं उगता? राजस्थान के पुजारी ने ये करिश्मा कर दिखाया है। कहते हैं कि अगर सोच बड़ी हो, तो रेत में भी सोना उगाया जा सकता है। राजस्थान के बाड़मेर जिले के रतनाड़ा गांव में रहने वाले पुजारी वसुदेव जोशी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है

अपडेटेड Jul 19, 2025 पर 9:35 PM
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राजस्थान के बाड़मेर जिले के रतनाड़ा गांव में रहने वाले पुजारी वसुदेव जोशी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है।

कौन कहता है कि पैसा पेड़ पर नहीं उगता? राजस्थान के पुजारी ने ये करिश्मा कर दिखाया है।  कहते हैं कि अगर सोच बड़ी हो, तो रेत में भी सोना उगाया जा सकता है। राजस्थान के बाड़मेर जिले के रतनाड़ा गांव में रहने वाले पुजारी वसुदेव जोशी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। जोशी जी ने महज 200 रुपये में महोगनी के पौधे खरीदे और उन्हें तपते रेगिस्तान की मिट्टी में लगा दिया। अब कुछ साल बाद, ये पेड़ लाखों की कमाई का जरिया बनते नजर आ रहे हैं। यानी, अब वह पेड़ों से लाखों कमाएंगे।

सिर्फ 200 रुपये में खरीदे महोगनी के पौधे

वसुदेव जोशी, जो राजस्थान के बाड़मेर के पास रतनाड़ा में स्थित मां सती दक्षायनी मंदिर में पुजारी हैं। उन्होंने कुछ साल पहले महज 200 में महोगनी के पौधे खरीदे और उन्हें राजस्थान के सूखे रेगिस्तानी इलाके में लगा दिया। जहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, वहां भी इन पेड़ों ने बढ़ना नहीं रोका। आज ये पेड़ 8 से 10 फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुके हैं। कभी-कभी छोटी सोच बड़ा मुनाफा दे जाती है। जोशी जी को उम्मीद है कि कुछ सालों में उनके सिर्फ 200 रुपये में लगाए महोगनी के यही पौधे उन्हें लाखों रुपये का मुनाफा देंगे।


महोगनी को कहा जाता है मनी ट्री

महोगनी को मनी ट्री भी कहा जाता है। महोगनी को यूं ही मनी ट्री नहीं कहा जाता। इसकी लकड़ी बेहद कीमती मानी जाती है। मजबूत, पानी से खराब न होने वाली और लाल-भूरे रंग की इस लकड़ी का इस्तेमाल महंगे फर्नीचर और डेकोरेशन आइटम्स बनाने में होता है। यही वजह है कि बाजार में इसकी कीमत 1,500 से 2,500 रुपये प्रति क्यूबिक फीट तक जाती है।

कम लागत में बड़ा रिटर्न

जोशी जी बताते हैं कि महोगनी के पेड़ को पूरा डेवलप होने में करीब 12 साल लगते हैं। लेकिन एक पेड़ से कई क्यूबिक फीट लकड़ी मिलती है, जिसकी कुल कीमत लाखों में पहुंच जाती है। यानी थोड़ी सी मेहनत और संयम से यह पेड़ कम लागत में बड़ा रिटर्न देने वाला बन जाता है।

महोगनी से फर्नीचर के अलावा ये भी बना सकते हैं..

महोगनी सिर्फ लकड़ी ही नहीं देता, इसके बीज, पत्ते और छाल भी काम के होते हैं। इनका इस्तेमाल डायबिटीज, मलेरिया और दस्त जैसी बीमारियों के इलाज में किया जाता है। इसके पत्तों से मच्छर भगाने की दवा, साबुन, पेंट और अन्य आयुर्वेदिक चीजें भी बनाई जाती हैं। जोशी जी की यह कहानी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो कम निवेश में बड़ा फायदा पाना चाहते हैं। राजस्थान की गर्म और सूखी मिट्टी में भी महोगनी जैसे पेड़ पनप सकते हैं। यह दिखाकर उन्होंने साबित कर दिया कि सोच बदलिए, किस्मत बदल सकती है।

 

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