म्यूचुअल फंड्स से आपको उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिला? जानिए इसकी वजह

म्चूचुअल फंड में आपके निवेश का समय बहुत अहम है। मान लीजिए किसी फंड ने बीते 5 सालों में सालाना 12 फीसदी रिटर्न दिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि फंड से आपका मुनाफा 12 फीसदी है। अगर आपने तब निवेश किया था, जब मार्केट पीक पर था और बाद में तेज गिरावट आई तो फंड से आपका रिटर्न कम रह सकता है

अपडेटेड Mar 20, 2026 पर 5:16 PM
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म्यूचुअल फंड से आपके रिटर्न पर टैक्स का भी असर पड़ता है।

क्या आपने अपने म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन चेक किया है? कई बार फंड का रिटर्न 12 फीसदी या 15 फीसदी दिखता है। लेकिन, आपके बैंक अकाउंट में आने वाला मुनाफा इससे कम हो सकता है। इसकी कुछ खास वजहें हैं।

निवेश के समय का पड़ता है रिटर्न पर असर

म्चूचुअल फंड में आपके निवेश का समय बहुत अहम है। मान लीजिए किसी फंड ने बीते 5 सालों में सालाना 12 फीसदी रिटर्न दिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि फंड से आपका मुनाफा 12 फीसदी है। अगर आपने तब निवेश किया था, जब मार्केट पीक पर था और बाद में तेज गिरावट आई तो फंड से आपका रिटर्न कम रह सकता है।


सिप के निवेशकों को गिरावट से कम नुकसान

SIP के निवेशकों को हालांकि इनवेस्टमेंट के समय से कम फर्क पड़ता है। इसकी वजह यह है कि उनका निवेश मार्केट में धीरे-धीरे होता है। इससे उन्हें कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है। लेकिन, एकमुश्त निवेश में इनवेस्टमेंट का समय बहुत अहम होता है। अगर आपने तब निवेश किया है, जब मार्केट में बड़ी गिरावट थी तो आपका रिटर्न बेहतर रहने की ज्यादा संभावना होती है। इसके उलट अगर आपने हाई लेवल पर निवेश किया है तो आपका रिटर्न कम रह सकता है।

टैक्स की वजह से भी घट जाता है रिटर्न

म्यूचुअल फंड से आपके रिटर्न पर टैक्स का भी असर पड़ता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स-फ्री होता है। इससे ज्यादा के गेंस पर आपको 12.5 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस तब लागू होता है, जब आप 1 साल के बाद म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स बेचते हैं। अगर एक साल से पहले यूनिट्स बेचते हैं तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लागू होता है। इसका रेट 20 फीसदी है। इस टैक्स की वजह से आपका रिटर्न काफी कम रह जाएगा।

शेयर बाजार में गिरावट की वजह से भी घटता है रिटर्न

शेयर बाजार की चाल का आपके इक्विटी म्यूचुअल फंड के रिटर्न पर सीधा असर पड़ता है। बाजार में बड़ी गिरावट आने पर कई इनवेस्टर्स म्यूचुअल फंड्स से पैसे निकालना शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि बाजार में गिरावट बढ़ने पर उन्हें ज्यादा नुकसान होगा। लेकिन, बाजार में हर बार बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी आती है। रिकवरी की वजह से इनवेस्टर्स को हुए नुकसान की न सिर्फ भरपाई हो जाती है बल्कि उसका रिटर्न पहले के मुकाबले बढ़ जाता है।

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इस साल म्यूचुअल फंड्स के निवेशकों को बड़ा नुकसान

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल पहले एंथ्रोपिक के एआई टूल्स की वजह से बड़ी गिरावट आई। उसके बाद अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। बाजार में गिरावट से म्यूचुअल फंड के निवेशकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। कुछ इनवेस्टर्स घबराहट में अपना पैसा म्यूचुअल फंड्स से निकाल रहे है। इससे वे बाजार में रिकवरी का फायदा उठाने से चूक जाएंगे। कोविड के समय बाजार में आई गिरावट में निवेश करने वाले इनवेस्टर्स ने बाद में खूब मुनाफा कमाए।

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