क्या नई CPI सीरीज में घटेगा फूड वेटेज, किन राज्यों में घटेगी या बढ़ेगी महंगाई? जानिए डिटेल

New CPI Series: नई CPI सीरीज में फूड वेटेज घटकर 37% रह सकता है, लेकिन असली कहानी इससे अलग है। मेथड में बदलाव, सेवाओं का बढ़ता असर और सोने का वेटेज काफी कुछ तय करेगा। किस राज्य में महंगाई ज्यादा चुभेगी और कहां राहत मिलेगी, समझिए पूरी तस्वीर।

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 9:52 PM
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नई सीरीज में तैयार भोजन और स्नैक्स का वेटेज करीब 3.3% है।

New CPI Series: भारत की नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI सीरीज 12 फरवरी को जारी होने वाली है। इसमें खाद्य वस्तुओं का वेटेज 2012 बेस सीरीज के मुकाबले कम रहने की संभावना है। हालांकि असली गिरावट कितनी है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि खाद्य खपत को किस तरह परिभाषित किया गया है।

सरकारी अनुमान बताते हैं कि नई CPI टोकरी में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी करीब 37% रह सकती है, जो पहले लगभग 46% थी। यह बदलाव बढ़ती आय, लोगों के खर्च के पैटर्न में बदलाव और सेवाओं पर बढ़ते खर्च को दिखाता है।

किस वजह से होगा बदलाव?


फूड वेटेज में दिख रही यह गिरावट पूरी तरह उपभोग में बदलाव की वजह से नहीं है। इसमें एक अहम कारण मेथडमें किया गया बदलाव भी है।

नई सीरीज में पका हुआ भोजन और स्नैक्स को फूड कैटेगरी से हटाकर ‘रेस्टोरेंट और कैफे सर्विसेज’ नाम के नए सब-कैटेगरी में डाल दिया गया है। इससे बाहर खाने और सेवाओं से जुड़ी महंगाई को अलग से दिखाया जा सकेगा। लेकिन इससे पुरानी और नई CPI सीरीज की सीधी तुलना करना आसान नहीं रहेगा।

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तैयार भोजन का कितना असर

नई सीरीज में तैयार भोजन और स्नैक्स का वेटेज करीब 3.3% है। यह हिस्सा चावल या बिजली जैसे कई पारंपरिक मदों से ज्यादा है।

2012 की CPI सीरीज में यही मद खाद्य श्रेणी में शामिल थे और इनका वेटेज करीब 3.6% था। अब इन्हें अलग श्रेणी में डालने से आधिकारिक तौर पर खाद्य वेटेज कम दिखता है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं कि घरों का भोजन पर खर्च घट गया है।

असली खाद्य हिस्सेदारी कितनी?

अगर तुलना के लिए रेस्टोरेंट से जुड़े इन खाद्य मदों को फिर से मूल खाद्य श्रेणी में जोड़ दिया जाए, तो प्रभावी खाद्य वेटेज करीब 37% नहीं बल्कि लगभग 40% के आसपास बैठता है। इससे साफ है कि खाद्य हिस्सेदारी में गिरावट तो है, लेकिन हेडलाइन आंकड़ों जितनी बड़ी नहीं है।

महंगाई पर क्या होगा असर

खाद्य वेटेज कम होने का मतलब है कि खाद्य कीमतों में उछाल का सीधा असर हेडलाइन महंगाई पर पहले जितना नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर रेस्टोरेंट में खाने की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो उनका असर सेवाओं की महंगाई के जरिए परोक्ष रूप से दिखता रहेगा।

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किस राज्य में सबसे ज्यादा रहेगी मंहगाई

नई CPI सीरीज लागू होने के बाद भी केरल देश के ऊंची महंगाई वाले राज्यों में बना रह सकता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि राज्य की खपत टोकरी में खाद्य के मुकाबले गैर खाद्य वस्तुओं, सेवाओं और सोना व नारियल जैसी अस्थिर कमोडिटी का हिस्सा ज्यादा है।

केरल का खर्च पैटर्न अपेक्षाकृत अधिक आय, विदेश से आने वाली रेमिटेंस और तेज शहरीकरण से प्रभावित है।

गैर खाद्य खर्च का ज्यादा वजन

केरल की महंगाई टोकरी में गैर खाद्य वस्तुओं का हिस्सा करीब 66% है, जो अधिकतर राज्यों से ज्यादा है। इसमें सेवाएं, ईंधन, आवास, स्वास्थ्य, परिवहन और लाइफस्टाइल खर्च शामिल हैं।

सेवाओं की महंगाई आम तौर पर खाद्य महंगाई की तुलना में ज्यादा समय तक ऊंची रहती है और जल्दी नीचे नहीं आती। यही वजह है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य कीमतें नरम होती हैं, तब भी केरल में कुल महंगाई अपेक्षाकृत ऊंची बनी रह सकती है।

सेवाओं की महंगाई का असर

केरल में सेवाओं का वजन ज्यादा होने से स्वास्थ्य, शिक्षा, मकान किराया, परिवहन और व्यक्तिगत सेवाओं की कीमतों का असर महंगाई पर अधिक पड़ता है।

इन सेवाओं की कीमतें मौसमी कारणों से कम और वेतन लागत, शहरी मांग और संरचनात्मक बदलाव से ज्यादा प्रभावित होती हैं। इसलिए इनमें गिरावट धीरे आती है।

नई CPI सीरीज 2024 में राज्यों की हिस्सेदारी

राज्य / केंद्र शासित प्रदेश खाद्य (%) गैर-खाद्य (%)
चंडीगढ़ 30.09 67.44
केरल 32.7 66.14
महाराष्ट्र 33.87 64.71
गोवा 35.05 63.2
दिल्ली (एनसीटी) 33.93 62.71
पुडुचेरी 35.2 61.24
तमिलनाडु 37.32 59.93
पंजाब 38.94 59.56
कर्नाटक 37.3 59.42
तेलंगाना 35.8 59.4
हरियाणा 38.94 58.48
जम्मू और कश्मीर 39.87 58.2
आंध्र प्रदेश 39.45 57.52
उत्तराखंड 38.49 57.48
गुजरात 41.14 56.94
राजस्थान 40.49 56.7
हिमाचल प्रदेश 40.84 56.45
मध्य प्रदेश 39.78 55.08
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव 41.98 54.66
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 41.27 54.09
झारखंड 43.37 53.83
मिजोरम 40.59 53.69
लक्षद्वीप 45.32 53.66
ओडिशा 42.96 53.46
उत्तर प्रदेश 43.53 53.07
पश्चिम बंगाल 44.39 52.75
छत्तीसगढ़ 41.72 52.3
त्रिपुरा 42.85 51.9
नागालैंड 44.14 51.22
मणिपुर 45.4 49.15
बिहार 50.41 46.71
मेघालय 46.31 45.84
सिक्किम 47.13 45.19
लद्दाख 50.66 44.99
अरुणाचल प्रदेश 47.8 44.98
असम 49.28 44.98

सोना और नारियल का ज्यादा प्रभाव

केरल में सांस्कृतिक कारणों और रेमिटेंस से जुड़ी बचत आदतों के कारण सोने की मांग ज्यादा रहती है। इसलिए सोने की कीमतों में उतार चढ़ाव का असर यहां महंगाई पर ज्यादा पड़ता है। इस साल 30 जनवरी तक स्पॉट गोल्ड कीमतों में करीब 20% की बढ़त दर्ज की गई थी।

इसी तरह नारियल और नारियल आधारित उत्पादों का वजन भी अन्य राज्यों से ज्यादा है। अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल कीमतों, मौसम या सप्लाई में बदलाव का असर केरल पर ज्यादा दिख सकता है।

नई सीरीज में सोना और नारियल का जॉइंट वेटेज 2.06% है। यह लक्षद्वीप के बराबर और अन्य राज्यों में सबसे ज्यादा है।

तेलंगाना भी केरल को टक्कर दे सकता है। यहां ज्वेलरी का वेटेज 1.99% है, जबकि केरल में यह 1.97% है।

बिहार जैसे राज्यों की स्थिति अलग

बिहार जैसे राज्यों में अगर खाद्य कीमतें स्थिर रहती हैं तो महंगाई में उतार चढ़ाव कम हो सकता है। यहां CPI बॉस्केट में फूड का हिस्सा 50% से ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में खाद्य टोकरी लगातार सातवें महीने डिफ्लेशन में रही थी।

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