वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है। सैलरीड क्लास और सामान्य व्यक्तियों के लिए ITR-1 व ITR-2 फाइलिंग की डेडलाइन जुलाई 31 ही रखी गई है, जिससे सालों पुरानी अनिश्चितता दूर हुई। यह फैसला करोड़ों करदाताओं को पूर्वानुमानित समयसीमा देगा, ताकि वे बिना घबराहट के रिटर्न दाखिल कर सकें।
सीतारमण ने संसद में कहा कि सरकार का मकसद अनुपालन को आसान बनाना है, न कि बोझ बढ़ाना है। सैलरीड लोग, जो बिजनेस इनकम नहीं रखते है वे अब भी जुलाई तक अपनी फाइलिंग पूरी कर सकेंगे। लेकिन छोटे बिजनेस और ट्रस्ट जैसे नॉन-ऑडिट केसेज को अब अगस्त 31 तक का समय मिलेगा। इससे वे जटिल हिसाब-किताब में फंसने से बचेंगे, खासकर वे छोटे व्यापारी जो सीमित संसाधनों के साथ काम करते हैं।
एक और अहम बदलाव रिवाइज्ड रिटर्न को लेकर है। अब करदाता मामूली फीस देकर मार्च 31 तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। पहले यह सुविधा दिसंबर 31 तक सीमित थी। गलतियां सुधारने वालों जैसे अनजाने में छूटे खर्चे या गणना त्रुटि के लिए यह वरदान साबित होगा। इससे भारी जुर्माने का डर कम होगा और रिफंड में देरी नहीं आएगी।
रियल एस्टेट डील्स में भी सरलीकरण आया है। नॉन-रेजिडेंट्स से प्रॉपर्टी खरीदते वक्त TDS का जिम्मा अब रेजिडेंट खरीदार पर होगा। PAN-बेस्ड चालान सिस्टम से TAN की जरूरत खत्म हो जाएगी, जिससे प्रक्रिया तेज और पेपरलेस बनेगी। युवा प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट्स और एनआरआई के लिए छह महीने का विशेष विदेशी एसेट डिस्क्लोजर विंडो खुला। अनजाने में छूटे ओवरसीज निवेश को बिना पेनल्टी के रिपोर्ट कर सकेंगे।
ये बदलाव टैक्स टेक फर्म्स, रियल्टी ट्रांजेक्शन, एनआरआई सर्विसेज और वेल्थ मैनेजमेंट को प्रभावित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अनुपालन बढ़ेगा और टैक्स कलेक्शन में पारदर्शिता आएगी। बजट ने एक बार फिर साबित किया कि सरकार आम नागरिक की सुविधा को प्राथमिकता दे रही है। बजट में यह भी स्पष्ट किया गया कि समयसीमा का पालन न करने पर जुर्माना और ब्याज देना होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से टैक्स कंप्लायंस बेहतर होगा और करदाताओं में अनुशासन आएगा।
मध्यम वर्ग के लिए यह घोषणा बेहद महत्वपूर्ण है। वेतनभोगी कर्मचारी अक्सर जुलाई के अंत तक अपने दस्तावेज़ जुटाने और रिटर्न भरने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। अब उन्हें भरोसा रहेगा कि हर साल यही तारीख अंतिम होगी। इससे टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनेगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि टैक्स सिस्टम को और सरल बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन फाइलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि करदाताओं को कम से कम दिक्कत हो।