New ETF Rules: ETF निवेशकों के लिए बड़ी खबर! जानिए सेबी के इन 3 नए बदलाओं का आप पर क्या पड़ेगा असर

SEBI New ETF Trading Rules: सेबी के ETF से जुड़े नए ट्रेडिंग नियम लागू हो गए हैं। अब 2 दिन पुरानी NAV के बजाय पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस से बेस प्राइस तय होगा। गोल्ड और सिल्वर ETF में प्री-ओपन ऑक्शन की शुरुआत की गई है और इनकी सर्किट लिमिट को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से फ्लेक्सिबल बनाया गया है। जानिए आम निवेशकों पर क्या होगा इसका असर?

अपडेटेड Sep 07, 2026 पर 11:41 AM
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जानें नए नियमों से क्या-क्या बदला है और आपको ट्रेडिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखना होगा

New ETF Trading Rules: अगर आप एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी गोल्ड ETF, सिल्वर ETF या इक्विटी ETF में ट्रेडिंग या निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। 7 सितंबर 2026 से सेबी के ETF ट्रेडिंग से जुड़े नए नियम लागू हो गए हैं।

इन नए नियमों का सीधा मकसद ETF के बाजार भाव और उसकी वास्तविक वैल्यू यानी NAV के बीच के अंतर को कम करना है, ताकि भारी उतार-चढ़ाव वाले दिनों में भी निवेशकों को उनका सही और वाजिब भाव मिल सके।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पुराने सिस्टम में क्या खामी थी, नए नियमों से क्या-क्या बदला है और आपको ट्रेडिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखना होगा।


पुराने सिस्टम में क्या थी सबसे बड़ी गड़बड़ी?

अब तक एक्सचेंजेस किसी भी ETF का बेस प्राइस तय करने के लिए दो दिन पुरानी NAV (T-2 NAV) का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा, चाहे वह गोल्ड ETF हो, शेयर बाजार वाला ETF हो या बॉन्ड ETF, सभी के लिए 20% का एक जैसा प्राइस बैंड लागू होता था।

मान लीजिए सोमवार को किसी ETF की NAV ₹100 थी। मंगलवार को ग्लोबल मार्केट में बड़ी तेजी आई और उसकी असली वैल्यू ₹125 हो गई। लेकिन बुधवार को बेस प्राइस सोमवार के ₹100 के हिसाब से ही तय हुआ। 20% का सर्किट लगने से उसकी ट्रेडिंग ₹120 पर ही रुक जाती थी। नियम निवेशकों की सुरक्षा के लिए था, लेकिन वह ETF को उसकी सही कीमत ₹125 पर पहुंचने से रोक देता था।

7 सितंबर से लागू हुए ये 3 बड़े बदलाव

सेबी के नए फ्रेमवर्क के तहत अब तीन प्रमुख सुधार किए गए हैं:

1- बेस प्राइस अब दो दिन पुराना नहीं होगा

अब बेस प्राइस 2 दिन पुरानी NAV के बजाय पिछले कारोबारी दिन के आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेज एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर तय होगा। यानी आज की ट्रेडिंग लिमिट कल शाम के वास्तविक कारोबार से तय होगी।

2- हर असेट क्लास के लिए अलग-अलग सर्किट लिमिट

इक्विटी और डेट ETF: दिन की शुरुआत 10% के प्राइस बैंड से होगी। अगर बाजार में बड़ी हलचल होती है, तो 15 मिनट के कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से 20% तक बढ़ाया जा सकेगा।

गोल्ड और सिल्वर ETF: इनमें शुरुआती लिमिट 6% रखी गई है। चूंकि ग्लोबल मार्केट में सोना-चांदी 24 घंटे ट्रेड होते हैं, इसलिए रातों-रात आई बड़ी तेजी/मंदी को एडजस्ट करने के लिए इनकी लिमिट बिना किसी अपर कैप (Upper Limit) के 3-3% के चरणों में आगे बढ़ती रहेगी।

लिक्विड और ओवरनाइट ETF: इनमें ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता, इसलिए इनका बैंड फिक्स 5% रहेगा।

3- गोल्ड और सिल्वर ETF में प्री-ओपन ऑक्शन

शेयरों की तरह अब गोल्ड और सिल्वर ETF में भी सुबह बाजार खुलने से पहले प्री-ओपन कॉल ऑक्शन होगा। इससे बाजार खुलने पर पहला ही ऑर्डर भाव को बिगाड़ नहीं पाएगा, बल्कि सामूहिक मांग और आपूर्ति के आधार पर सही ओपनिंग प्राइस तय होगी।

(नोट: यह नियम पहले 1 सितंबर से लागू होने थे, लेकिन एक्सचेंजेस को सिस्टम तैयार करने का समय देने के लिए सेबी ने इसे 7 सितंबर से लागू किया है। 1 अप्रैल 2027 से बेस प्राइस का आधार पिछले दिन की क्लोजिंग NAV हो जाएगा।)

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

शार्प फाइनेंशियल्स के फाउंडर बालकृष्ण बगड़िया का कहना है कि सेबी के इस कदम से सिस्टम की कमियां तो दूर हो गई हैं, लेकिन निवेशकों को भी ट्रेडिंग करते समय सतर्क रहना चाहिए:

iNAV जरूर चेक करें: ट्रेड करने से पहले फंड हाउस (AMC) की वेबसाइट पर जाकर उसका लाइव इंडिकेटिव NAV (iNAV) देखें। इससे आपको पता चलेगा कि आप जो भाव दे रहे हैं, वह सही है या नहीं।

लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करें: मार्केट ऑर्डर देने के बजाय हमेशा लिमिट ऑर्डर लगाएं, खासकर बाजार खुलते वक्त और गोल्ड/सिल्वर ETF में।

ट्रेडिंग पॉज से न घबराएं: अगर किसी दिन बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव के कारण आपके ETF में ट्रेडिंग थोड़ी देर के लिए रुकती है, तो यह कूलिंग-ऑफ मैकेनिज्म है, जो सही भाव तय करने के लिए काम कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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