1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया इनकम टैक्स कानून, नियमों में होंगे बड़े बदलाव; जानिए डिटेल

1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होगा और कई नियम बदल जाएंगे। नए कानून में टैक्स ईयर का कॉन्सेप्ट, ITR डेडलाइन में बदलाव, F&O पर STT बढ़ोतरी और TCS दरों में संशोधन जैसे कई अहम बदलाव शामिल हैं। जानिए इनका टैक्सपेयर्स पर क्या होगा असर।

अपडेटेड Mar 16, 2026 पर 3:03 PM
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नए टैक्स कानून में रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समयसीमा भी बढ़ाई जाएगी।

भारत की डायरेक्ट टैक्स व्यवस्था में 1 अप्रैल 2026 से कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू होने के बाद करीब छह दशक पुराना इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। नए कानून में भाषा को पहले से ज्यादा सरल बनाया गया है और बजट 2026 में घोषित प्रस्तावों को ही लागू किया जाएगा।

टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि इन बदलावों का मकसद टैक्स नियमों को आसान बनाना है, जिससे निवेशकों, कारोबारियों और आम करदाताओं को सहूलियत होगी। चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना के मुताबिक, इनकम टैक्स एक्ट 2025 डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में ढांचे, अवधारणा और प्रक्रिया से जुड़े कई अहम बदलाव लेकर आ रहा है।

‘टैक्स ईयर’ का नया कॉन्सेप्ट


नए कानून के तहत ‘टैक्स ईयर’ का नया कॉन्सेप्ट लाया जा रहा है। यह पहले इस्तेमाल होने वाले ‘प्रिवियस ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की व्यवस्था की जगह लेगा। सुरेश सुराना के अनुसार इस बदलाव का मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना है, ताकि आय कमाने की अवधि और उस पर टैक्स लगाने की अवधि को एक ही शब्द में समझाया जा सके।

इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

नए कानून में व्यक्तियों के लिए पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्था के इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि व्यक्तिगत आयकर का बोझ फिलहाल पहले जैसा ही रहेगा और टैक्सपेयर्स को दरों के स्तर पर किसी नए बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

ITR फाइल करने की तारीखों में बदलाव

इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की समयसीमा में भी बदलाव किया गया है। सरकार ने उन करदाताओं के लिए समय बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है जो बिजनेस या प्रोफेशन से जुड़े हैं और जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं होता। नई व्यवस्था में ऐसे करदाताओं के लिए ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी जाएगी।

हालांकि ITR-1 और ITR-2 जैसे साधारण रिटर्न फाइल करने वाले व्यक्तियों के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई ही रहेगी। नई समयसीमा इस तरह होगी:

  • 30 नवंबर - विशेष प्रावधानों वाले मामलों के लिए
  • 31 अक्टूबर - कंपनियां और वे करदाता जिनके खातों का ऑडिट जरूरी है
  • 31 अगस्त - बिजनेस या प्रोफेशन से जुड़े लेकिन ऑडिट जरूरी नहीं
  • 31 जुलाई - अन्य सभी करदाता

ये बदलाव टैक्स ईयर 2026-27 से लागू होंगे।

रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समयसीमा बढ़ेगी

नए कानून में रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समयसीमा भी बढ़ाई जाएगी। अभी करदाता टैक्स ईयर खत्म होने के बाद 9 महीने के भीतर रिटर्न में बदलाव कर सकते हैं, लेकिन नए कानून के तहत यह समयसीमा 12 महीने कर दी जाएगी।

हालांकि अगर रिवाइज्ड रिटर्न 9 महीने के बाद फाइल किया जाता है, तो इसके लिए फीस देनी होगी। अगर कुल आय 5 लाख रुपये तक है तो 1,000 रुपये और 5 लाख रुपये से ज्यादा आय होने पर 5,000 रुपये फीस देनी होगी।

फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT बढ़ेगा

सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग में तेजी से बढ़ती गतिविधि और सट्टेबाजी को देखते हुए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। 1 अप्रैल 2026 से ऑप्शन की बिक्री पर STT 0.10 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत हो जाएगा।

वहीं ऑप्शन एक्सरसाइज होने पर टैक्स 0.125 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत होगा। इसके अलावा फ्यूचर्स की बिक्री पर STT 0.02 प्रतिशत से बढ़कर 0.05 प्रतिशत कर दिया जाएगा।

कई लेनदेन पर TCS दरों में बदलाव

कुछ ट्रांजैक्शन पर TCS यानी टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स की दरों में भी बदलाव किया गया है। शराब की बिक्री पर TCS 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि तेंदू पत्तों पर यह दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है। इसके अलावा स्क्रैप, कोयला, लिग्नाइट और आयरन ओर पर TCS 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया जाएगा।

लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी LRS के तहत शिक्षा या इलाज के लिए 10 लाख रुपये से ज्यादा विदेश भेजी गई रकम पर TCS 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया जाएगा। हालांकि अन्य उद्देश्यों के लिए विदेश भेजे गए पैसे पर 20 प्रतिशत TCS पहले की तरह लागू रहेगा।

ओवरसीज टूर पैकेज पर भी बदलाव किया गया है और पहले की दो अलग दरों की जगह अब 2 प्रतिशत TCS लागू होगा। मोटर वाहन और अन्य लग्जरी सामान की बिक्री पर 1 प्रतिशत TCS पहले की तरह जारी रहेगा।

ऑफिस आने जाने के खर्च पर टैक्स नहीं

नए कानून में कर्मचारियों के लिए एक राहत भी दी गई है। अगर नियोक्ता कर्मचारी के घर से ऑफिस आने जाने का खर्च देता है या इसकी भरपाई करता है, तो इसे टैक्स योग्य लाभ नहीं माना जाएगा। पहले यह छूट केवल उस स्थिति में मिलती थी जब कंपनी कर्मचारी को वाहन उपलब्ध कराती थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है।

शेयर बायबैक पर टैक्स का तरीका बदलेगा

शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम पर टैक्स लगाने का तरीका भी बदला जाएगा। अभी तक इसे डिविडेंड इनकम माना जाता था और खत्म हुए शेयर की लागत को कैपिटल लॉस के रूप में गिना जाता था। नए कानून में इसे कैपिटल गेन इनकम के रूप में टैक्स किया जाएगा।

सुरेश सुराना के मुताबिक इस बदलाव से प्रमोटर्स पर टैक्स का असर बढ़ सकता है। उन पर प्रभावी टैक्स करीब 30 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वहीं, प्रमोटर कंपनियों पर करीब 22 प्रतिशत टैक्स लग सकता है, जिसमें सरचार्ज और सेस शामिल नहीं हैं।

डिविडेंड और म्यूचुअल फंड इनकम पर नया नियम

नए कानून में डिविडेंड और म्यूचुअल फंड इनकम के खिलाफ ब्याज खर्च की कटौती को भी खत्म करने का प्रस्ताव है। पहले करदाता ऐसी आय के खिलाफ 20 प्रतिशत तक ब्याज खर्च की कटौती का दावा कर सकते थे, लेकिन नए नियमों के तहत इस तरह की कटौती पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। हालांकि अन्य टैक्स योग्य ब्याज आय के खिलाफ ब्याज खर्च की कटौती सामान्य नियमों के तहत जारी रहेगी।

कई दशकों में सबसे बड़ा बदलाव

कुल मिलाकर इनकम टैक्स एक्ट 2025 को भारत की डायरेक्ट टैक्स व्यवस्था में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस कानून के तहत कई प्रक्रियाओं को सरल बनाने और टैक्स सिस्टम को अधिक स्पष्ट बनाने की कोशिश की गई है। ये सभी बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

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