New Income Tax Law: सारे नियम 31 दिसंबर 2025 तक जारी करने की तैयारी, FY27 से होने वाला है लागू

New Income Tax Law: नियमों के नोटिफाई होने के बाद, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इनकम टैक्स बिल, 2025 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद अगस्त 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मंजूरी मिल गई थी

अपडेटेड Oct 17, 2025 पर 3:01 PM
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नए आयकर कानून का मकसद नियमों के पालन को सरल बनाना और एडमिनिस्ट्रेशन को बेहतर बनाना है।

नया आयकर कानून (New Income Tax Law) अगले वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत से लागू होने वाला है। सरकार नए कानून के सभी नियमों को एक कंसोलिडेटेड नोटिफिकेशन के जरिए 31 दिसंबर 2025 तक नोटिफाई करने की तैयारी में है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया है कि नए टैक्स फ्रेमवर्क को लगभग 400 नियमों और 180 फॉर्म्स का सपोर्ट होगा। यह संख्या पहले के कानून के 500 से अधिक नियमों से कम है। नए आयकर कानून का मकसद नियमों के पालन को सरल बनाना और प्रशासन को बेहतर बनाना है।

अधिकारी ने कहा, "31 दिसंबर तक, हम सभी नियमों को एक कंसोलिडेटेड नोटिफिकेशन में नोटिफाई कर देंगे। बजट का काम भी साथ-साथ शुरू होगा। सिस्टम में बहुत काम होगा– हम नियमों को टेस्ट करेंगे, एक ट्रायल रन करेंगे, और चौथी तिमाही में मिलजुलकर काम करेंगे।"

अगस्त में कानून बना इनकम टैक्स बिल, 2025


इनकम टैक्स बिल, 2025 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद अगस्त 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मंजूरी मिल गई थी। उसके बाद यह कानून बन गया। इसमें टैक्स कानूनों को सरल बनाने के साथ कानून में शब्दों की संख्या भी कम होगी, जिससे इसे समझना आसान हो जाएगा। नए कानून में किसी नए इनकम टैक्स रेट का प्रावधान नहीं है। नया कानून गैरजरूरी प्रावधानों और पुरानी भाषा को हटाता है। 1961 के आयकर अधिनियम में धाराओं की संख्या 819 थी लेकिन नए एक्ट में यह घटकर 536 रह गई है। इसी तरह चैप्टर्स की संख्या 47 से घटकर 23 रह गई है। नए इनकम टैक्स एक्ट में शब्दों की संख्या 5.12 लाख से घटाकर 2.6 लाख कर दी गई है।

टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन में नियम, मुख्य टैक्स लॉ के प्रावधानों को लागू करने के लिए प्रोसेस तय करते हैं– जैसे कि देनदारियों की कैलकुलेशन कैसे की जाएगी, रिफंड कैसे प्रोसेस किया जाएगा, या छूट कैसे लागू की जाएगी। दूसरी ओर, फॉर्म स्टैंडर्ड टेंपलेट होते हैं जिनके जरिए करदाता और बिजनेस जानकारी जमा करते हैं, रिटर्न दाखिल करते हैं या दावे करते हैं। ये नियम और फॉर्म मिलकर किसी भी कर व्यवस्था का उसे लागू करने के लिहाज से आधार बनते हैं।

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जनवरी-मार्च 2025 तक चलेगा सिस्टम का इंटीग्रेशन

नियमों के नोटिफाई होने के बाद, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसके लिए जनवरी-मार्च 2025 तिमाही तक बैकएंड वर्क जारी रहेगा। अधिकारी के अनुसार, फॉर्म कंपाइल और मर्ज किए जा रहे हैं, और सिस्टम पर इन्हें इनेबल करने से पहले प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे, उनकी टेस्टिंग की जाएगी। आगे कहा, "नोटिफिकेशन के बाद फॉर्म इनेबल करने से पहले, यूटिलिटीज बनाई जाएंगी। प्रोटोटाइप को टेस्ट किया जाएगा, डेटा के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा और चेक किया जाएगा। हर फॉर्म के लिए डिटेल्ड डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग, चेकिंग की जरूरत होती है। मार्च तिमाही में यह काम और तेज हो जाएगा।" सिस्टम इंटीग्रेशन की प्रोसेस बजट की तैयारियों के साथ-साथ चलेगी।

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