सरकार ने चार नए लेबर कोड्स लागू कर दिए हैं। इनका असर एंप्लॉयीज की सैलरी, बेनेफिट्स और सोशल सिक्योरिटीज पर पड़ेगा। सरकार के पुराने 29 लेबर कानूनों की जगह अब सिर्फ 4 कानून होंगे। सरकार ने कानून को आसान बनाने और एंप्लॉयीज के लिए सोशल सिक्योरिटीज बढ़ाने के लिए नए कोड़्स लागू किए हैं। सवाल है कि नए कानूनों का हर महीने एंप्लॉयीज के बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी पर क्या असर पड़ेगा? क्या इससे एंप्लॉयीज की सैलरी बढ़ जाएगी?
बेसिक सैलरी सीटीसी की कम से कम 50 फीसदी होगी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए लेबर कोड्स की वजह से एंप्लॉयीज की सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है। नए लेबर कोड्स में कहा गया है कि एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी उसकी टोटल कॉस्ट टू कंपनी (CTC) की कम से कम 50 फीसदी होनी चाहिए। कई कंपनियां एंप्लॉयीज का बेसिक पे कम रखती हैं। आम तौर पर यह सीटीसी का 30-35 फीसदी होता है। बाकी सैलरी में एचआरए, स्पेशल अलाउन्स और कनवेंस जैसे अलाउन्सेज शामिल होते हैं। इससे सैलरी में जरूरी डिडक्शंस कम रहता है, जिससे एंप्लॉयीज की टेक-होम सैलरी ज्यादा रहती है।
सैलरी के कई कंपोनेंट्स बेसिक सैलरी से लिंक्ड होते हैं
एंप्लॉयीज के कंपनसेशन के कई प्रमुख कंपोनेंट्स बेसिक सैलरी से जुड़े होते हैं। उदाहरण के लिए प्रोविडेंट फंड का कैलकुलेशन बेसिक सैलरी के आधार पर होता है। यह (पीएफ) बेसिक सैलरी का 12 फीसदी होता है। ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट का कैलकुलेशन भी बेसिक सैलरी के आधार पर होता है। बेसिक सैलरी कम होने से पीएफ का डिडक्शन कम होता है। इसका मतलब है कि हर महीने एंप्लॉयी के बैंक अकाउंट में ज्यादा सैलरी आती है।
पीएफ और ग्रेच्युटी का कंट्रिब्यूशन बढ़ जाएगा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए लेबर कोड्स के तहत बेसिक सैलरी सीटीसी की कम से कम 50 फीसदी होने से पीएफ का कंट्रिब्यूशन बढ़ जाएगा। ग्रेच्युटी का कंट्रिब्यूशन भी बढ़ जाएगा। लीव इनकैशमेंट का अमाउंट भी बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर हर महीने एंप्लॉयीज के बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी पर पड़ेगा। पहले के मुकाबले अब कम सैलरी आएगी। लेकिन, एंप्लॉयीज के रिटायरमेंट बेनेफिट्स बढ़ जाएंगे। रिटायरमेंट पर मिलने वाला पीएफ और ग्रेच्युटी बढ़ जाएंगे।
एंप्लॉयीज के टैक्स पर भी पड़ेगा नए लेबर कोड्स का असर
बेसिक सेलरी सीटीसी के कम से कम 50 फीसदी के नियम का असर एंप्लॉयीज के टैक्स पर भी पड़ेगा। अभी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा कंपनियां अलाउन्सेज के रूप में देती हैं। इस हिस्से पर टैक्स नहीं लगता है या कम टैक्स लगता है। बेसिक सैलरी बढ़ने से अलाउन्सेज के रूप में मिलने वाला अमाउंट घट जाएगा। इससे एंप्लॉयीज की टैक्सेबल इनकम बढ़ जाएगी। इससे उसका टैक्स भी बढ़ जाएगा। इससे से भी हर महीने बैंक अकाउंट में आने वाले सैलरी पर असर पड़ेगा।