KYC Update: अब एक बार KYC अपडेट से सभी अकाउंट्स होंगे सही, नई व्यवस्था से ग्राहकों को मिलेगी बड़ी राहत

KYC Update: बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े ग्राहकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। अब अलग-अलग बैंक और संस्थानों में बार-बार KYC (Know Your Customer) अपडेट कराने की झंझट से छुटकारा मिलेगा। हाल ही में जारी नई व्यवस्था के तहत एक बार KYC अपडेट करने पर यह सभी अकाउंट्स में लागू हो जाएगा।

अपडेटेड Jan 15, 2026 पर 8:19 PM
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मोबाइल नंबर बदलने या नया पता अपडेट करने के बाद अगर OTP नहीं आता, म्यूचुअल फंड रिडीम रुक जाता है या इंश्योरेंस पॉलिसी 'KYC पेंडिंग' हो जाती है, तो आप अकेले नहीं हैं। भारत का KYC सिस्टम कई ढीले-ढाले डेटाबेस का जाल है, जो एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े नहीं हैं। बैंक, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस और ब्रोकर्स सब अपनी-अपनी जानकारी रखते हैं, इसलिए अपडेट का सही क्रम बहुत मायने रखता है। गलत तरीके से करने पर हफ्तों लेन-देन फंस सकता है, सही क्रम से तो ज्यादातर बदलाव अपने आप हो जाएंगे।

पहला कदम: मुख्य बैंक खाता अपडेट करें

सबसे पहले अपने प्राइमरी बैंक खाते से शुरू करें, जो आधार, PAN, UPI, निवेश और प्रीमियम से जुड़ा होता है। यहां मोबाइल या पता पुराना होने पर कोई भी अपडेट कठिन हो जाता है। ब्रांच में जाकर या नेट बैंकिंग से बदलाव करें। आधार आधारित वेरिफिकेशन के बाद जब तक नया नंबर पर OTP न आने लगे तबतक इंतजार करें। यह आधार स्तंभ है, यहीं से सब शुरू होता है।

दूसरा: आधार और PAN रिकॉर्ड दुरुस्त करें


नाम, पता या मोबाइल में बदलाव हो तो आधार तुरंत अपडेट कराएं। कई संस्थाएं eKYC या CKYC आधारित चेक करती हैं, पुराना आधार होने पर नया डेटा रिजेक्ट हो सकता है। PAN में नाम और जन्मतिथि मैच होना जरूरी है। अपडेट के बाद कुछ दिन प्रतीक्षा करें ताकि सिस्टम में बदलाव फैल जाए।

तीसरा: CKYC रजिस्टर पहले साफ करें

ज्यादातर लोग यहीं चूक जाते हैं। सेंट्रल KYC रजिस्टर म्यूचुअल फंड, ब्रोकर्स और NBFC के लिए आधार है। पुराना CKYC होने पर प्लेटफॉर्म पुरानी जानकारी खींचते रहते हैं। किसी भी बैंक, फंड हाउस या इंश्योरर से KYC मॉडिफिकेशन रिक्वेस्ट करें। अपडेट के बाद ज्यादातर जगह ऑटो रिफ्रेश हो जाता है।

चौथा: निवेश खाते, फिर इंश्योरेंस

CKYC साफ होने पर डीमैट, ट्रेडिंग और म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म अपडेट करें। इंश्योरेंस आखिर में, क्योंकि ये धीमे होते हैं। सही क्रम से 1-2 हफ्ते में सब सेट हो जाता है। RBI के नए नियमों से जून 2026 तक लो-रिस्क ग्राहकों को छूट मिल रही है, लेकिन समय रहते अपडेट जरूरी है।

क्या है नई व्यवस्था?

- पहले ग्राहकों को हर बैंक, बीमा कंपनी या निवेश प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग KYC अपडेट करना पड़ता था।

- अब वन KYC अपडेट सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें एक बार जानकारी अपडेट करने पर वह सभी लिंक्ड अकाउंट्स में स्वतः लागू हो जाएगी।

- इससे ग्राहकों को बार-बार दस्तावेज़ जमा करने और लंबी प्रक्रियाओं से गुजरने की परेशानी नहीं होगी।

फायदे

- समय और मेहनत की बचत: ग्राहकों को अलग-अलग संस्थानों में बार-बार KYC कराने की जरूरत नहीं।

- पारदर्शिता और सुरक्षा: सभी अकाउंट्स में एक जैसी जानकारी होने से धोखाधड़ी और गड़बड़ी की संभावना कम होगी।

- सुविधा: खासकर वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें बार-बार बैंक जाकर दस्तावेज जमा करना मुश्किल होता है।

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