NPS Common Scheme Vs MSF: दोनों में क्या फर्क है और आपके लिए कौन सी स्कीम ज्यादा फायदेमंद है?

National Pension System (NPS) में दो अलग-अलग तरह के स्ट्रक्चर हैं। इनमें पहला ट्रेडिशनल कॉमन स्कीम है और दूसरा नया मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) है। कॉमन एनपीएस स्कीम में इनवेस्टमेंट प्रोसेस आसान है और हर इनवेस्टर के लिए एक समान है

अपडेटेड Feb 17, 2026 पर 12:43 PM
Story continues below Advertisement
एमएसएफ के तहत करीब 16 स्कीम उपलब्ध हैं। इससे सिंगल PRAN के तहत इनवेस्टर को निवेश के कई विकल्प मिल जाते हैं।

नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। खासकर हाल में हुए बड़े बदलावों के बाद यह स्कीम पहले से ज्यादा अट्रैक्टिव हो गई है। अगर आप एनपीएस में निवेश शुरू करने का प्लान बना रहे हैं तो मनीकंट्रोल आपको इसके बारे में कुछ जरूरी बातें बता रहा है। इससे आपको इस रिटायरमेंट स्कीम को समझने में आसानी होगी।

कॉमन स्कीम और एमएसएफ दो विकल्प उपलब्ध

National Pension System (NPS) में दो अलग-अलग तरह के स्ट्रक्चर हैं। इनमें पहला ट्रेडिशनल कॉमन स्कीम है और दूसरा नया मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) है। कॉमन एनपीएस स्कीम में इनवेस्टमेंट प्रोसेस आसान है और हर इनवेस्टर के लिए एक समान है। सब्सक्राइबर सिर्फ प्रति टियर एक स्कीम को सेलेक्ट कर सकता है और फंड में निवेश के तरीके के बारे में फैसला ले सकता है। ऐसा दो तरह से किया जा सकता है।


nps table

एक्टिव चॉइस और ऑटो चॉइस में फर्क

एक्टिव चॉइस के तहत इनवेस्टर यह फैसला ले सकता है कि वह इक्विटी (शेयर), कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (जैसे सरकार के बॉन्ड्स) में कितना पैसा डालना चाहता है। यह फैसला इनवेस्टर के रिस्क लेने की कपैसिटी पर निर्भर करता है। ऑटो चॉइस में इनवेस्टमेंट का ऐलोकेशन पहले से तय लाइफ-साइकिल ऑप्शंस के आधार पर होता है। इसमें लाइप साइकिल 25, लाइफ साइकिल 50 या 75 शामिल हैं। इसका मतलब है कि जब इनवेस्टर की उम्र कम होती है तो उसका ज्यादा पैसा इक्विटी में जाता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ इक्विटी में ऐलोकेशन घटता जाता है।

बैलेंस्ड लाइफ साइकिल के फायदे

इनवेस्टर के लिए बैलेंस्ड लाइफ-साइकिल फंड और पूरा पैसा सरकार की सिक्योरिटीज में निवेश करने का भी विकल्प है। यह ऑप्शन उन इनवेस्टर के लिए सही है, जो बिल्कुल रिस्क नहीं लेना चाहते। एसबीआई पेंशन फंड के एमडी और सीईओ प्रणय रंजन द्विवेदी ने कहा, "चूंकि यह स्ट्रक्चर फिक्स्ड है और इसमें ज्यादा विकल्प नहीं हैं, इसलिए यह उन इनवेस्टर के लिए बेहतर है जो ज्यादा बदलाव के बगैर लंबी अवधि का रिटायरमेंट प्लान चाहते हैं।" कॉमन स्कीम में इक्विटी में ऐलोकेशन के लिए 75 फीसदी की सीमा तय है। इनवेस्टर की उम्र बढ़ने के साथ यह सीमा घटती जाती है।

एमएसएफ के तहत इनवेस्टर के हिसाब से स्कीम

MSF पेंशन फंडों को अलग-अलग सब्सक्राइबर के हिसाब से अलग-अलग स्कीम ऑफर करने की इजाजत देता है। उदाहरण के लिए महिला, गिग वर्कर्स, सेल्फ-एंप्लॉयड और इनवेस्टर्स के लिए पेंशन फंड अलग-अलग तरह की स्कीम ऑफर कर सकता है, जो इनवेस्टर की प्रोफाइल पर आधारित होगा। द्विवेदी ने कहा, "पहले कॉमन स्कीम के तहत इस तरह से अलग-अलग स्कीम ऑफर करने की सुविधा नहीं थी। एमएसएफ एक PRAN के तहत कई तरह की स्कीम ऑफर करता है।"

एमएसएफ के तहत 16 विकल्प उपलब्ध 

एमएसएफ के तहत करीब 16 स्कीम उपलब्ध हैं। इससे सिंगल PRAN के तहत इनवेस्टर को निवेश के कई विकल्प मिल जाते हैं। आदित्य बिड़ला सनलाइफ पेंशन सेक्योर रिटायरमेंट इक्विटी फंड और सेक्योर फ्यूचर ऑफर करती है। एक्सिस पेंशन फंड गोल्डन ईयर्स फंड-ग्रोथ ऑफर करती है।डीएसपी पेंशन फंड लॉन्ग टर्म इक्विटी फंड ऑफर करती है। ये सिर्फ उदाहरण हैं। बाकी फंड भी इसी तरह की अलग-अलग स्कीम ऑफर करते हैं।

यह भी पढ़ें: SSY: छोटी बचत से बड़ा फंड तैयार करने का आसान तरीका, जानिए आपको क्यों सुकन्या समृद्धि में इनवेस्ट करना चाहिए

एमएसएफ और कॉमन स्कीम में आपके लिए कौन बेहतर?

MSF का एक बड़ा फायदा 15 साल का मिनिमम वेस्टिंग पीरियड है। इससे इनवेस्टर्स खासकर युवा निवेशकों को काफी सुविधा होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एमएसएफ के जरिए एनपीएस में सब्सक्राइबर्स को ज्यादा आजादी मिल गई है। हालांकि, ट्रेडिशनल और एमएसएफ दोनों का मकसद लॉन्ग टर्म में निवेशक के लिए बड़ा फंड तैयार करना है। कॉमन स्कीम उन सब्सक्राइबर्स के लिए बेहतर है जो आसान स्कीम चाहते हैं। एमएसएफ उन सब्सक्राइबर्स के लिए बेहतर है जो ज्यादा लचीलापन और कम अवधि के लिए निवेश को लेकर प्रतिबद्धता चाहते हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।