आज के दौर में लोग सिर्फ एलोपैथी तक सीमित नहीं हैं। जोड़ों के दर्द से लेकर एलर्जी तक, कई लोग आयुर्वेद, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी और एक्यूपंक्चर जैसे वैकल्पिक इलाज को चुन रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल हमेशा यही रहा कि क्या इन इलाजों का खर्च हेल्थ इंश्योरेंस उठाएगा, खासकर तब जब मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत न हो और इलाज OPD (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) के जरिए हो। अब इस सवाल का जवाब है हां, बीमा कंपनियां धीरे-धीरे आयुष OPD कवरेज को शामिल कर रही हैं।
बीमा नियामक प्राधिकरण (IRDAI) ने सभी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी पॉलिसियों में आयुष इलाज को भी शामिल करें। इसका मतलब है कि अब आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों के इलाज का खर्च भी बीमा पॉलिसी से कवर होगा। पहले तक हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ एलोपैथी और अस्पताल में भर्ती होने पर ही काम आता था, लेकिन अब OPD स्तर पर भी कवरेज मिलने की संभावना है।
- OPD खर्च का कवरेज: डॉक्टर की फीस, दवाइयों का बिल और छोटे-छोटे इलाज का खर्च अब बीमा से कवर हो सकता है।
- वैकल्पिक इलाज को बढ़ावा: जो लोग एलोपैथी से हटकर प्राकृतिक या वैकल्पिक चिकित्सा अपनाते हैं, उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी।
- पॉलिसी पैकेज तैयार: आयुष मंत्रालय और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद बीमा कंपनियों के साथ मिलकर ऐसे पैकेज बना रहे हैं, जिनमें आयुष इलाज को शामिल किया जाएगा।
भारत में बड़ी संख्या में लोग आयुष पद्धतियों पर भरोसा करते हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी परिवारों तक, लोग आयुर्वेदिक दवाइयों और होम्योपैथी को सुरक्षित और सस्ता विकल्प मानते हैं। लेकिन जब इलाज का खर्च जेब से देना पड़ता था, तो कई लोग पीछे हट जाते थे। अब बीमा कवरेज मिलने से इन पद्धतियों को और बढ़ावा मिलेगा और आम आदमी को राहत मिलेगी।
यह कदम न सिर्फ मरीजों को आर्थिक सुरक्षा देगा बल्कि आयुष चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने का भी काम करेगा। हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह नया अवसर है और लोगों के लिए बड़ी राहत। आने वाले समय में जब OPD कवरेज पूरी तरह लागू होगा, तो वैकल्पिक इलाज अपनाने वालों को अब खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।