Pakistan People Income: पाकिस्तान में रहने वाले कितने लोग 1 लाख से ज्यादा कमाते होंगे? ये सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। अगर तुलना की जाए तो 1 भारतीय रुपया लगभग 3 पाकिस्तानी रुपये के बराबर माना जाता है। इस हिसाब से पाकिस्तान में 3 लाख पाकिस्तानी रुपये महीने की कमाई, भारत में करीब 1 लाख रुपये महीने की इनकम के समान मानी जा सकती है। भारत में यह इनकम अच्छी मानी जाती है, लेकिन सवाल यह है कि पाकिस्तान में कितने लोग इस स्तर की कमाई कर पाते हैं?
पाकिस्तान की कुल आबादी करीब 25 करोड़ है, लेकिन इसमें से बहुत कम लोग ही इस इनकम वर्ग में आते हैं। Federal Board of Revenue (FBR) के अक्टूबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 59 लाख रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स हैं। अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक, पूरे पाकिस्तान में सिर्फ 4 लाख से 10 लाख लोग ऐसे हैं जो 3 लाख पाकिस्तानी रुपये या उससे ज्यादा महीने की कमाई करते हैं। यह कुल आबादी का केवल 0.2 से 0.4 प्रतिशत ही है।
एक्सपर्ट का कहना है कि असल संख्या इससे कुछ ज्यादा हो सकती है, लेकिन इनकम छुपाने की प्रवृत्ति काफी आम है। कई बड़े कारोबारी और जमींदार अपनी वास्तविक कमाई कम दिखाते हैं, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में हाई इनकम वालों की संख्या बहुत कम नजर आती है।
इनकम असमानता की तस्वीर और भी गंभीर है। World Inequality Database की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सबसे अमीर 1% लोग देश की कुल इनकम का 24% हिस्सा अपने पास रखते हैं। वहीं, निचले 50% लोगों को मिलकर सिर्फ 15% इनकम ही मिलती है।
सरकारी आंकड़े भी इस खाई को साफ दिखाते हैं। Pakistan Bureau of Statistics के मुताबिक, पाकिस्तान में औसत मासिक सैलरी करीब 39,000 पाकिस्तानी रुपये है। यानी 3 लाख रुपये कमाने वाला व्यक्ति एक औसत कर्मचारी से लगभग 8 गुना ज्यादा कमाता है।
Pakistan People Income: पाकिस्तान में रहने वाले कितने लोग 1 लाख से ज्यादा कमाते होंगे?
इतनी ऊंची इनकम आमतौर पर कुछ खास क्षेत्रों में ही देखने को मिलती है। जैसे आईटी प्रोफेशनल्स, बड़े सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट्स, एक्सपर्ट डॉक्टर और सर्जन, कॉरपोरेट प्रमुख, सीनियर बैंकर और मल्टीनेशनल कंपनियों के टॉप एग्जीक्यूटिव आदि। आम परिवारों पर 25% से ज्यादा महंगाई का भारी दबाव बना हुआ है। वैश्विक रिपोर्टों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को टैक्स सिस्टम में नहीं लाता, तब तक अमीरी–गरीबी की यह खाई कम करना बेहद मुश्किल रहेगा।