इस वित्त वर्ष का अंत करीब आ गया है। आपको रुपये-पैसे से जुड़े कई काम 31 मार्च से पहले पूरा करना जरूरी है। अगर आप ये काम वित्त वर्ष खत्म होने से पहले पूरा नहीं करते हैं तो आपको दोबारा मौका नहीं मिलेगा। इससे आपको पेनाल्टी चुकानी पड़ सकती है। मनीकंट्रोल आपको उन जरूरी कामों के बारे में बता रहा है, जिन्हें नए वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले पूरा कर लेना आपके लिए फायदेमंद होगा।
1. टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट
अगर आप इनकम टैक्स (Income Tax) की पुरानी रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इस वित्त वर्ष के लिए टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट आपको 31 मार्च तक करना होगा। तभी आप 31 जुलाई, 2025 तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान डिडक्शन क्लेम कर सकेंगे। 31 मार्च के बाद किए गए टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट पर आप डिडक्शन FY25 के इनकम टैक्स रिटर्न में क्लेम नहीं कर सकेंगे। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत एक वित्त वर्ष में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये तक टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।
आप फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के इनकम टैक्स रिटर्न में किसी तरह की गलती को ठीक करने के लिए अपडेटेड रिटर्न 31 मार्च तक फाइल कर सकते हैं। अगर आपने किसी वजह से FY22 का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है और बिलेटेड रिटर्न भी फाइल नहीं कर सके हैं तो भी आप अपडेटेड रिटर्न 31 मार्च तक फाइल कर सकते हैं।
3. महिला सम्मान सेविंग्स सर्टिफिकेट्स में निवेश
सरकार ने महिलाओं के लिए यह खास डिपॉजिट स्कीम पेश की थी। यह स्कीम 31 मार्च, 2025 के बाद उपलब्ध नहीं होगी। अगर आप इस स्कीम में निवेश करना चाहती हैं तो दो साल की अवधि वाली इस स्कीम में निवेश कर 7.5 फीसदी का अट्रैक्विट इंटरेस्ट हासिल कर सकते हैं। इस स्कीम में पोस्टऑफिस में इनवेस्ट किया जा सकता है।
4. पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना में डिपॉजिट
अगर आप पीपीएफ और सुकन्य समृद्धि योजना के सब्सक्राबर है तो आपके लिए दोनों स्कीम में मिनिमम डिपॉजिट करना जरूरी है। यह डिपॉजिट वित्त वर्ष खत्म होने से पहले करना होगा। पीपीएफ में आपको मिनिमम 500 रुपये डिपॉजिट करना होगा, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना में 250 रुपये मिनिमम डिपॉजिट करना होगा। ऐसा नहीं करने पर आपका अकाउंट इनऑपरेटिव हो जाएगा।
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5. टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग का फायदा
फाइनेंशियल ईयर में निवेश पर हुए मुनाफे का इस्तेमाल आप टैक्स-सेविंग्स के लिए कर सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड्स बेचने पड़ेंगे जिस पर आपको लॉस हो रहा है। आपका मुनाफ इस लॉस के साथ एडजस्ट हो जाएगा। इससे आपकी टैक्स-लायबिलिटी कम हो जाएगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेंस के साथ एडजस्ट किया जा सकता है। लेकिन, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस को सिर्फ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के साथ एडजस्ट करना होगा।