शेयर बाजार में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को डरा दिया है। सोने और चांदी का हाल भी अलग नहीं है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई है। इस लड़ाई के खत्म होने की फिलहाल उम्मीद नहीं दिख रही। ऐसे में कई निवेशक शेयर और सोने-चांदी में निवेश नहीं करना चाहते हैं। सवाल है कि उनके लिए निवेश के दूसरे क्या विकल्प हैं?
सुरक्षित निवेश के ये हैं विकल्प
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इनवेस्टर्स शेयर, म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम और बुलियन में निवेश नहीं करना चाहता है तो उसके लिए पीपीएफ, बैंक एफडी, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट, पोस्ट ऑफिस की सेविंग्स स्कीम और सुकन्या समृद्धि योजना जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। ये सभी निवेश के सुरक्षित विकल्प हैं। इनके अलावा म्यूचुअल फंड्स की डेट स्कीम में भी निवेश किया जा सकता है।
शेयरों के मुकाबले रिटर्न कम
निवेश के सुरक्षित विकल्प में रिटर्न कम होता है। खासकर शेयरों से तुलना करने पर रिटर्न में काफी अंतर आता है। इन्हें फिक्स्ड रिटर्न इनवेस्टमेंट ऑप्शन भी कहा जाता है। इसका मतलब है कि इनवेस्टर को निवेश के वक्त पता होता है तो उसे अपने पैसे पर कितना रिटर्न मिलेगा। सरकार की स्मॉल सेविंग्स स्कीम का रिटर्न 4 से 8.2 फीसदी के बीच है। इसके मुकाबले शेयर या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम से औसत 12 फीसदी तक रिटर्न मिल जाता है।
पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना का रिटर्न अच्छा है, लेकिन इन स्कीम में निवेश करने में लिक्विडिटी एक समस्या है। इसका मतलब है कि आपका पैसा एक खास समय तक के लिए ब्लॉक हो जाता है। इस मामले में बैंक एफडी ठीक है। जरूरत पड़ने पर थोड़ा पेनाल्टी के साथ बैंक में आप अपना एफडी तोड़ सकते हैं। इसके बाद पैसा आपके सेविंग्स अकाउंट में आ जाता है। म्यूचुअल फंड की लिक्विड स्कीम भी लिक्विडी के लिहाज से सही है।
पीपीएफ में लंबी अवधि का निवेश
एक्सपर्टस का कहना है कि बड़ा सवाल यह है कि इनवेस्टर एक लाख रुपये का निवेश कितने साल के लिए करना चाहता है? अगर वह लंबे समय के लिए निवेश करना चाहता है तो वह पीपीएफ में कर सकता है। पीपीएफ में एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक का निवेश कर टैक्स में डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। लेकिन, इसकी इजाजत इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में है। नई रीजीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स भी पीपीएफ में निवेश कर सकते हैं। लेकिन, वे डिडक्शन क्लेम नहीं कर सकेंगे।
बाजार संभलने तक एफडी में निवेश
अगर कोई इनवेस्टर्स थोड़ा रिस्क ले सकता है लेकिन शेयर बाजार में तेज गिरावट की वजह से शेयरों में निवेश नहीं करना चाहता तो उसके लिए कुछ समय के लिए बैंक एफडी में निवेश करना ठीक रहेगा। वह 6 महीने या 9 महीने के लिए बैंक एफडी में निवेश कर सकता है। फिर शेयर बाजार में स्थिति सामान्य होने पर वह बैंक एफडी से पैसे निकालकर म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश कर सकता है। इससे शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में उसे अपने पैसे के डूबने का डर नहीं रहेगा।