Personal Loan EMI: पर्सनल लोन सबसे महंगा कर्ज होता है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे हल्के में लेते हैं। उन्हें लगता है कि पर्सनल लोन ही तो है। EMI भी काबू में है, तो चुका देंगे। लेकिन असली खेल EMI का नहीं, कुल ब्याज का होता है।
Personal Loan EMI: पर्सनल लोन सबसे महंगा कर्ज होता है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे हल्के में लेते हैं। उन्हें लगता है कि पर्सनल लोन ही तो है। EMI भी काबू में है, तो चुका देंगे। लेकिन असली खेल EMI का नहीं, कुल ब्याज का होता है।
अब मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 14% ब्याज पर 5 साल के लिए लिया। आपकी EMI करीब ₹11,600 बनेगी, लेकिन 5 साल में आप करीब ₹6.96 लाख चुकाएंगे। यानी ₹1.96 लाख सिर्फ ब्याज। यही वह हिस्सा है जिसे कम करना असली समझदारी है।
1. EMI से थोड़ा ज्यादा भरने का असर
अगर आप हर महीने सिर्फ ₹2,000 ज्यादा भरते हैं और EMI ₹11,600 की जगह ₹13,600 कर देते हैं, तो लोन करीब 5 साल की जगह 3.5 साल में खत्म हो सकता है। इतना ही नहीं, ब्याज ₹1.96 लाख से घटकर करीब ₹1.1-1.2 लाख रह जाता है। यानी करीब ₹70,000-₹80,000 की सीधी बचत। वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि आपने हर महीने थोड़ा अतिरिक्त भुगतान किया।
2. साल में एक बार प्रीपेमेंट का फायदा
हर किसी के लिए हर महीने ज्यादा देना आसान नहीं होता। लेकिन अगर आप साल में एक बार बोनस या अतिरिक्त आय से ₹50,000 लोन में डालते हैं, तो 5 साल का लोन करीब 3 साल में खत्म हो सकता है। इस स्थिति में ब्याज करीब ₹1 लाख के आसपास रह जाता है। यानी करीब ₹1 लाख की बचत, सिर्फ इस आदत से कि आपने अतिरिक्त पैसे को खर्च करने के बजाय लोन में लगाया।
3. ब्याज दर में छोटा बदलाव, बड़ा असर
अगर आप अपना लोन किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करके ब्याज 14% से 12% करा लेते हैं, तो EMI में ज्यादा फर्क नहीं दिखेगा। लेकिन कुल भुगतान करीब ₹30-35 हजार कम हो सकता है। पर्सनल लोन में ब्याज दर का हर 1% बदलाव लंबे समय में बड़ा फर्क डालता है।
4. टेन्योर कम रखने का कैलकुलेशन
ज्यादातर लोग EMI कम रखने के लिए लंबी अवधि चुनते हैं, लेकिन यही सबसे महंगा फैसला होता है। अगर वही ₹5 लाख का लोन आप 5 साल की जगह 3 साल में लेते, तो EMI करीब ₹17,000 होती, लेकिन कुल ब्याज करीब ₹1.15 लाख ही रहता। यानी करीब ₹80,000 की बचत। यह दिखाता है कि थोड़ा ज्यादा दबाव लेकर जल्दी लोन खत्म करना ज्यादा फायदेमंद है।
5. पर्सनल में समय सबसे अहम
पर्सनल लोन में समय आपके खिलाफ काम करता है। जितना लंबा लोन चलता है, उतना ज्यादा ब्याज जुड़ता जाता है। इसलिए फोकस EMI कम रखने पर नहीं, प्रिंसिपल जल्दी घटाने पर होना चाहिए। छोटे-छोटे फैसले से बड़ा फर्क बनता है। जैसे हर महीने थोड़ा ज्यादा देना, बोनस का इस्तेमाल करना या ब्याज दर कम कराना। इसका मतलब है कि लोन EMI का खेल नहीं है, समय और ब्याज का खेल है। जो इसे समझ लेता है, वह जल्दी कर्ज से बाहर निकल जाता है।
इन बातों का भी रखें ख्याल
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