पर्सनल लोन लेना बहुत आसान है। जल्द एप्रूवल, कम पेपरवर्क और पैसा कुछ ही घंटों में बैंक अकाउंट में आ जाता है। इस वजह से ज्यादातर ग्राहक लोन के नियम और शर्तों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। चूंकि पर्सनल लोन अनसेक्योर्ड होता है, जिससे बैंक के लिए रिस्क ज्यादा होता है। इस रिस्क की भरपाई बैंक ज्यादा इंटरेस्ट रेट और पेनाल्टी के सख्त नियम जैसे दूसरे तरीकों से करते हैं। छोटी सी गलती की ग्राहक को बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए पर्सनल लोन लोन लेने से पहले कुछ खास बातों को जान लेना जरूरी है।
बैंक इंटरेस्ट रेट के अलावा दूसरे चार्जेज भी वसूलते हैं
ज्यादातर लोग सिर्फ इंटरेस्ट रेट पर गौर करते हैं और कम इंटरेस्ट रेट देखकर लोन ले लेते हैं। लेकिन, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पर्सनल लोन के साथ कई दूसरे चार्जेज भी जुड़े होते हैं। इनमें प्रोसेसिंग फीस, डॉक्युमेंटेशन फीस, इंश्योरेंस प्रीमियम आदि शामिल हैं। इन चार्जेज की वजह से पर्सनल लोन की वास्तविक कॉस्ट बढ़ जाती है। इसलिए अगली बार पर्सनल लोन लेने से पहले आपको इन चार्जेज के बारे में भी जान लेना ठीक रहेगा।
बैंक अक्सर ईएमआई अमाउंट कम रखने के लिए लोन का पीरियड बढ़ा देते हैं। ग्राहक कम EMI अमाउंट देखकर जल्द लोन के ऑफर को एक्सेप्ट कर लेता है। लेकिन, इस बात पर कम लोग ध्यान देते हैं कि लोन का पीरियड जितना ज्यादा होगा, आपको उतना ज्यादा इंटरेस्ट चुकाना होगा। 12 फीसदी इंटरेस्ट रेट पर 5 लाख रुपये का 5 साल के लोन पर आपको करीब 1.7 लाख रुपये का इंटरेस्ट चुकाना होता है। अगर लोन के पीरियड को बढ़ाकर 7 साल कर दिया जाए तो इंटरेस्ट बढ़कर 2.3 लाख रुपये हो जाता है।
प्रीपेमेंट के नियमों और शर्तों को जान लें
कई लोग यह मानकर चलते हैं कि वे जब चाहे लोन का बाकी पैसा चुकाकर लोन बंद करा देंगे। लेकिन, पर्सनल लोन के साथ आप ऐसा नहीं कर सकते। कुछ बैंक या एनबीएफसी 6 से लेकर 12 महीने के बाद ही प्रीपेमेंट की इजाजत देते हैं। कुछ बैंक प्रीपेमेंट चार्ज लगाते हैं। आम तौर पर यह लोन के बाकी अमाउंट का 2-5 फीसदी तक होता है। इस चार्ज की वजह से जल्द लोन चुकाना फायदेमंद नहीं रह जाता है।
जितने पैसे की जरूरत है, उतने अमाउंट का ही लोन लें
बैंक और एनबीएफसी लोगों को प्री-एप्रूवड लिमिट के लोन का ऑफर मैसेज के जरिए लोगों को भेजते रहते हैं। लेकिन, आपको यह समझने की जरूरत है कि पर्सनल लोन सबसे महंगा लोन होता है। ज्यादा अमाउंट का लोन लेने पर इंटरेस्ट के रूप में आपको ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं। ज्यादा अमाउंट के लोन से आपका डेट-टू-इनकम रेशियो भी बढ़ जाता है। इसका असर भविष्य में आपके लोन एप्रूवल पर पड़ सकता है। इसलिए आपको सिर्फ उतने अमाउंट का लोन लेना चाहिए, जितना जरूरी है।