प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाम के साथ 10 जून को एक बड़ा रिकॉर्ड जुड़ गया। वह लगातार सबसे लंबे समय तक देश के चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं। वह बीते 12 सालों से देश के प्रधानमंत्री हैं। उनके कार्यकाल में देश ने करीब हर क्षेत्र में सफलता के नए कीर्तिमान बनाए हैं। लेकिन, इनकम टैक्स के मामले में हुए बदलाव विशेष तौर पर उल्लेखनीय हैं। इनकम टैक्स के नियमों को आसान बनने से देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स, पेंशनर्स और बिजनेसेज को फायदा हुआ है। आइए इन बदलावों के बारे में विस्तार से बात करते हैं।
यूनियन बजट 2022 में सरकार ने एक ऐसे टैक्स रिफॉर्म्स का ऐलान किया, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की थी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने उन टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी, जो सेक्शन 80, सेक्शन 20बी के तहत उपलब्ध डिडक्शंस का फायदा नहीं उठाते हैं। वित्तमंत्री ने नई रीजीम का विकल्प पेश किया, जिसमें टैक्स के रेट ओल्ड रीजीम के मुकाबले कम हैं। आज इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए यह रीजीम पहली पसंद बन गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 बहुत पुराना हो गया है। इसके कई नियम और प्रावधान आज बेमानी हो गए हैं। पुराने एक्ट की भाषा भी बहुत जटिल थी। इन कंपनियों को दूर करने के लिए सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट, 2025 को लागू किया। यह 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है। नए एक्ट के नियम और प्रावधान की भाषा बहुत आसान रखी गई है। इससे टैक्सपेयर्स को नियमों को समझना आसान हो गया है।
12 लाख तक की इनकम टैक्स-फ्री
सरकार ने 12 लाख रुपये तक की सालाना इनकम टैक्स-फ्री करने का ऐलान किया। सरकार के इस फैसले ने टैक्सपेयर्स को हैरान कर दिया। शायद ही किसी टैक्सपेयर्स ने इतनी बड़ी राहत की उम्मीद की थी। लेकिन, यह रिबेट इनकम टैक्स की सिर्फ नई रीजीम में उपलब्ध है। इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम का इस्तेमाल करने वाले टैक्सपेयर्स को सेक्शन 87ए के तहत उपलब्थ रिबेट का फायदा नहीं मिलता है।
सरकार ने टैक्सपेयर्स और टैक्स अधिकारियों के बीच सीधी इंटरएक्शन को खत्म करने के लिए फेसलेस एसेसमेंट और फेसलेस अपील सिस्टम की शुरुआत की। इससे टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन में पारदर्शिता आई है। टैक्स-अधिकारियों के मनमानी पर लगाम लगी है। टैक्सपेयर्स की शिकायतों में कमी आई है। टैक्स कंप्लायंस में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने प्री-फिल्ड रिटर्न फॉर्म्स की शुरुआत की। इससे टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना बहुत आसान हो गया है। सैलरी इनकम, इंटरेस्ट इनकम और टीडीएस जैसी जानकारियां फॉर्म में पहले से भरी हुई होती है।
सरकार ने अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) की शुरुआत की है। इस फैसिलिटी के तहत टैक्सपेयर्स स्वैच्छिक रूप से रिटर्न में गलती को ठीक कर सकते हैं। ऑरिजिनल रिटर्न में अगर कोई इनकम बताना भूल गए हैं तो अपडेटेड रिटर्न में बता सकते हैं। इससे टैक्सपेयर्स को काफी फायदा हुआ है।
सरकार ने इनकम टैक्स की नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया है। हालांकि, पुरानी रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन अब भी 50,000 रुपये है। स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने से नई रीजीम में सैलरीड टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों और पेंशनर्स को ही मिलता है।