कई लोग अपनी जिंदगी में संपत्ति तो बना लेते हैं, लेकिन उसके बंटवारे की साफ योजना नहीं बनाते। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति का निधन बिना वसीयत (Will) के हो जाता है, तो संपत्ति का बंटवारा विवाद की वजह बन जाता है। आइए जानते हैं कि वसीयत न होने पर संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है और समय रहते सही प्लानिंग करना क्यों जरूरी है।
मुंबई के CA और CFA बलवंत जैन के मुताबिक, भारतीय कानून के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बंटवारा अपनी इच्छा के अनुसार तय कर सकता है। इसके लिए वसीयत बनाना सबसे आसान और प्रभावी तरीका है।
Indian Succession Act, 1925 के अनुसार, व्यक्ति अपनी पूरी या कुछ संपत्ति किसी को भी दे सकता है। इसमें परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, यहां तक कि कोई बाहरी व्यक्ति या चैरिटेबल ट्रस्ट भी शामिल हो सकते हैं।
वसीयत को वैध बनाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं:
ध्यान देने वाली बात यह है कि वसीयत को रजिस्टर कराना जरूरी नहीं है, लेकिन इसे रजिस्टर कराने से भविष्य में विवाद की आशंका कम हो जाती है। इसके अलावा वसीयत स्टांप पेपर पर ही बने, ऐसा जरूरी नहीं है। इसे साधारण कागज पर भी लिखा जा सकता है।
बिना वसीयत के क्या होता है
अगर किसी व्यक्ति का बिना वैध वसीयत के निधन होता है, तो इसे 'इंटेस्टेट' कहा जाता है। ऐसी स्थिति में संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार किया जाता है।
Hindu Succession Act, 1956 की धारा 8 के मुताबिक, संपत्ति सबसे पहले कानूनी वारिसों (Legal Heirs) को मिलती है।
किसे कितना हिस्सा मिलता है
अगर किसी व्यक्ति के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं, तो बिना वसीयत के उनकी संपत्ति तीनों में बराबर बांटी जाती है। इसका मतलब है...
इस स्थिति में व्यक्ति की अपनी इच्छा लागू नहीं होती, बल्कि कानून के नियम लागू होते हैं।
सही प्लानिंग क्यों जरूरी है
बिना वसीयत के संपत्ति का बंटवारा तय तो हो जाता है, लेकिन कई बार इससे परिवार में विवाद भी हो सकता है। इसलिए समय रहते अपनी संपत्ति की स्पष्ट योजना बनानी चाहिए। इसका सबसे बेहतर तरीका वसीयत तैयार करना है, ताकि आगे चलकर किसी तरह की कानूनी परेशानी या पारिवारिक तनाव से बचा जा सके।
वसीयत बनाना सिर्फ अमीर लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जिसके पास कोई भी संपत्ति है। यह कदम आपके परिवार को भविष्य में सुरक्षा और स्पष्टता दोनों देता है।