Repo Rate Hike: त्योहारी सीजन में घर खरीदना होगा महंगा! समझिए रेपो रेट बढ़ने से होम लोन EMI और रियल एस्टेट पर क्या होगा असर

Repo Rate Hike : RBI ने आज 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया है। तीन साल में यह पहली बार है जब रेपो रेट में इतनी बढ़ोतरी की गई। इससे पहले,फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाई गई थी। 2025 में,सेंट्रल बैंक ने कुल मिलाकर रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की,जिससे यह 5.25 प्रतिशत हो गई

अपडेटेड Oct 07, 2026 पर 1:15 PM
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Repo Rate Hike: ANAROCK के आंकड़ों से पता चलता है कि 2026 की तीसरी तिमाही में देश के 7 प्रमुख शहरों में लगभग 1,00,220 घरों की बिक्री हुई,जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 3 प्रतिशत और पिछली तिमाही के मुकाबले 10 प्रतिशत ज्यादा है

Repo Rate Hike : रियल एस्टेट इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से घर खरीदारों के लिए लोन लेना महंगा हो सकता है और त्योहारों के मौसम में घरों की मांग पर कुछ दबाव पड़ सकता है। इसका असर मिड-इनकम सेगमेंट में ज्यादा देखने को मिल सकता है।

बता दें कि RBI ने आज 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया है। तीन साल में यह पहली बार है जब रेपो रेट में इतनी बढ़ोतरी की गई। इससे पहले,फरवरी 2023 में रेपो रेट (वह दर जिस पर RBI कम समय के लिए कमर्शियल बैंकों को पैसा उधार देता है) बढ़ाई गई थी। 2025 में,सेंट्रल बैंक ने कुल मिलाकर रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की,जिससे यह 5.25 प्रतिशत हो गई।

रियल एस्टेट इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक ब्याज दरों में कटौती के दौर देखने को मिला जिससे लोन लेना सस्ता हुआ और घरों की मांग को बढ़ावा मिला। अब अगर दरों में बढ़ोतरी से प्रॉपर्टी से जुड़े पूरे सेक्टर में पूंजी की लागत बढ़ सकती है।


ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि त्योहारी सीजन घरों की मांग के लिए एक अहम समय होता है और लोन लेने की लागत बढ़ने से खरीदारों की सोच पर असर पड़ेगा।

घर खरीदना हो जाएगा महंगा

जिन होम बायर्स ने एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े फ्लोटिंग-रेट लोन लिए हैं,उन पर दरों में बढ़ोतरी से तुरंत असर पड़ेगा। मौजूदा उधार लेने वालों के लिए इस बढ़ोतरी से EMI बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है। नए खरीदारों के लिए,लोन की लागत में बढ़त लोन लोन लेने की सीमा सीमित कर सकती है और घर खरीदने का खर्च बढ़ा सकती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका असर पहली बार घर खरीदने वालों और कीमत को लेकर संवेदनशील खरीदारों पर ज़्यादा पड़ सकता है। उनके लिए हर महीने की किस्त (EMI) में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी उनकी खरीदने की क्षमता पर असर डाल सकती है और घर खरीदने के फैसले में देरी करा सकती है।

फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि अगर लोन की दर रेपो रेट से जुड़ी है तो रेपो रेट बढ़ने पर आम तौर पर एक महीने या ज्यादा से ज्यादा एक तिमाही के अंदर EMI बढ़ जाती है। हालांकि,लोन देने वाले EMI बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि (tenure) बढ़ाने को भी प्राथमिकता दे सकते हैं।

लैडर7 वेल्थ प्लानर्स के MD और प्रिंसिपल ऑफिसर सुरेश सदागोपन ने कहा कि हाल के समय में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां रेपो रेट में हर बढ़ोतरी के साथ लोन की अवधि बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए,23 साल का मॉर्गेज 23.5 या 23.7 साल का मॉर्गेज बन जाता है। उन्होंने कहा कि कर्ज लेने वाले और कर्ज देने वाले दोनों ही इस सिस्टम को पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि कर्ज लेने वाले को कितनी रकम चुकानी है।

प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेवलपर्स और लेंडर्स फेस्टिव डिस्काउंट और आसान पेमेंट प्लान के ज़रिए इस असर को कम कर सकते हैं। उनका कहना है कि इस बढ़ोतरी से नई खरीद के फैसलों में सुस्ती आ सकती है। लेकिन जब तक कि लोन लेने की लागत और न बढ़े या लंबे समय तक ऊंची बनी न रहे, इससे डिमांड पर बुरा असर पड़ने की संभावना कम है।

घट सकती है त्योहारी सीजन की मांग

अनुज पुरी ने कहा कि ने कहा कि टॉप 7 शहरों में घरों की कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं,जिससे लोगों की खरीदने की क्षमता पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि ब्याज दरें बढ़ने से होम लोन महंगे हो जाएंगे,जिससे खासकर उन सेगमेंट में जहां कीमत बहुत मायने रखती है, खरीदार ज्यादा सोच-समझकर फैसला लेंगे और फैसले लेने में ज्यादा समय लगेगा।

ANAROCK के आंकड़ों से पता चलता है कि 2026 की तीसरी तिमाही में देश के 7 प्रमुख शहरों में लगभग 1,00,220 घरों की बिक्री हुई,जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 3 प्रतिशत और पिछली तिमाही के मुकाबले 10 प्रतिशत ज्यादा है। इस बिक्री में किफायती घरों की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत थी।

अनुज पुरी ने आगे कहा कि अब इस रफ़्तार पर नजर रहेगी, क्योंकि EMI में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी से किफायती घरों के खरीदार अपनी खरीदारी का फैसला टाल सकते हैं या उन्हें अपने बजट का हिसाब-किताब फिर से करना पड़ सकता है।

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) के प्रेसिडेंट परवीन जैन ने कहा कि रेपो रेट में बढ़ोतरी को मैक्रो इकोनॉमिक हालात से जोड़ कर देखा जाना चाहिए। उम्मीद है कि रेजिडेंशियल मार्केट पर इस बढ़ोतरी का असर सीमित रहेगा।

रियल एस्टेट कंपनी 'आईजी ग्रुप' के मैनेजिंग डायरेक्टर ललित परिहार ने कहा कि इस बढ़ोतरी का असर घर खरीदने वालों की सोच पर पड़ेगा,क्योंकि खासकर मिड-इनकम सेगमेंट वाले लोग घर खरीदने का फैसला टाल सकते हैं। लोन लेने की लागत बढ़ने से घर खरीदने वालों के एक खास वर्ग पर बुरा असर पड़ सकता है।

 

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