South Court: मुंबई में खंडहर जैसी दिखने वाली इस हवेली की कीमत 1,000 करोड़ रुपए से है ज्यादा, इतिहास भी है रोचक
South Court: 1930 के दशक के आखिर में जब इस आलीशान घर को बनाया गया था, तो इसकी कीमत 2 लाख रुपए थी, लेकिन मुंबई के मालाबार हिल में इस घर की असली कीमत इसके इतिहास और कहानियों में छिपी है, जो इसे बताए जाने का इतंजार कर रहा है
South Court: मुंबई में खंडहर जैसी दिखने वाली इस हवेली की कीमत 1,000 करोड़ रुपए से है ज्यादा
मुंबई (Mumbai) का मालाबार हिल (Malabar Hill) देश के कुछ सबसे धनी परिवारों का घर है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गोदरेज परिवार जैसे कई अरबपति वहां रहते हैं, लेकिन इसी इलाके में एक घर ऐसा है, जो सदियों से खाली है और काफी बड़ा और फेमस भी है और, वो है साउथ कोर्ट (South Court)। मोहम्मद अली जिन्ना (Mohammad Ali Jinnah) ने इस घर को बनवाया था। पाकिस्तान के संस्थापक भारत के विभाजन में अपनी भूमिका के लिए एक बदनाम व्यक्ति हैं। कई लोग जिन्ना को अंहकारी भी बताते हैं।
हेक्टर बोलिथो की किताब जिन्नाह, क्रिएटर ऑफ पाकिस्तान में, सर चार्ल्स ओलिवैंट ने जिन्ना को उनके करियर की शुरुआत में 1,500 रुपए प्रति माह की नौकरी की पेशकश का किस्सा है। जिन्ना ने तब ये कहते हुए इस जॉब ऑफर को ठुकरा दिया था कि उन्हें ये उम्मीद है, वो एक दिन में 1,500 रुपए कमाएंगे, और उन्होंने जल्द ही ऐसा किया भी।
सुखी घर नहीं
उन्होंने अपने जीवन में इतना पैसा कमाया कि 100 साल पहले मालाबार हिल में उन्होंने अपने लिए एक बंगला खरीदा। हालांकि, ये वो बंगला नहीं था, जो आज है। उस समय मालाबार हिल मुंबई यानी तब के बॉम्बे नामचीन और पैसे वाले लोगों का गढ़ बन गया था।
जिन्ना का घर उनके पारसी दोस्त सर दिनशॉ पेटिट के घर के करीब था। वह उस समय शहर के सबसे धनी लोगों में से एक थे। पेटिट की रत्ती नाम की एक बेटी थी।
तेजी से बदलते घटनाक्रम में, 42 साल के जिन्ना ने रत्ती से शादी की, जो 1918 में महज 18 साल की थी। ये सब पेटिट परिवार की नाराजगी के बावजूद हुआ।
दंपति जिन्ना के घर चले गए। इस शादी से ज्यादातर लोग खुश नहीं थे। रत्ती युवा और लाड़ प्यार करने वाली थी और जिन्ना उम्रदराज, उग्र और मिशन से प्रेरित थे।
1928 में रत्ती घर छोड़कर आलीशान ताजमहल होटल में रहनी लगीं। एक साल बाद उनकी मृत्यु हो गई। जिन्ना लंदन में वकालत की दुनिया का एक बड़ा नाम बन गए, लेकिन भारत में वे राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक थे।
विभाजन की विरासत
हालांकि, भारत में जोर पकड़ते स्वतंत्रा संग्राम के बीच जिन्ना भारत वापस लौटे, जहां उनकी इस दूसरी पारी ने उन्हें एक राजनीतिक स्टार बना दिया, जो वह बनना चाहते थे।
वह भारत में मुसलमानों के चैंपियन बन गए। उनके बढ़ते कद का मतलब था कि जिन्ना को एक नए और बड़े घर की जरूरत थी। लंदन में अपना महंगा घर बेचने के बाद उनके पास पैसों की कोई कमी नहीं रही।
1936 में उन्होंने अपनी राजनीतिक बैठकों और बातचीत के लिए एक बड़ा घर बनाने के लिए मालाबार हिल्स के इस पुराने घर को तोड़ दिया। तब के समय इस घर की कीमत 2 लाख रुपए थी। ये एक आलीशान घर था। ये घर 1940 के दशक में महात्मा गांधी और जिन्ना के बीच कई बैठकों का गवाह भी बना।
जैसे-जैसे आजादी मिलने का समय आया, तो ये भी साफ हो गया कि भारत से अलग एक और देश बनाया जाएगा। रिपोर्टों से पता चलता है कि जिन्ना ने अपना घर बेचने की कोशिश की लेकिन उन्हें मनचाही कीमत नहीं मिली। कई दूसरी रिपोर्टों से पता चलता है कि वह शहर में कहीं और 18 एकड़ का घर खरीदने की खोज कर रहे थे।
इन दोनों घटनाओं से जिन्ना की उम्मीदों के बारे में विरोधाभासी नजरिया सामने आता है। सवाल उठता है कि अगर देश का विभाजन ही लक्ष्य था, तो वह एक बड़ी संपत्ति खरीदना क्यों चाह रहे थे? जिन्ना को पाकिस्तान मिला और साउथ कोर्ट हार गए। एक साल बाद 1948 में उनकी मृत्यु हो गई।
15 अगस्त, 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद कुछ दशकों के लिए, इस प्रॉपर्टी को ब्रिटिश उच्चायोग को किराए पर दे दिया गया था। तब से, ये मकान काफी हद तक सरकारी नियंत्रण में बेकार पड़ा हुआ है।
संपत्ति पुरानी हो सकती है, लेकिन 2.5-एकड़ की जमीन पर बनी इस हवेली की कीमत आज के समय में 1,000 करोड़ रुपए से अधिक है।
2021 में, भाजपा नेता मंगल प्रभात लोढ़ा ने जिन्ना हाउस को एक कला और सांस्कृतिक केंद्र में बदलने के लिए जोर दिया। ये एक बुद्धिमान विचार है, जो मुझे लगता है कि इसे एक विभाजन संग्रहालय तक सीमित किया जा सकता है।