Wave Group Insolvency : नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने वेव ग्रुप की इनसॉल्वेंसी की अपील को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण और मेंबर (टेक्निकल) बरुण मित्रा ने कहा, हमें अपील स्वीकार करने योग्य नहीं लगी। इसीलिए, अपील खारिज की जाती है। उधर, नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) की सीईओ रितु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) ने कहा, यह हमारी जीत है। लैंड बैंक पहले से हमारे पास है। इस आदेश से रियल एस्टेट डेवलपर्स के बीच संदेश जाएगा कि अपना बकाया चुकाएं और नियमों से बंधे रहें। संपर्क करने पर वेव मेगा सिटी सेंटर के स्पोक्सपर्सन ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
होमबायर्स के अधिकारियों की होगी रक्षा
पीएसपी लीगल के फाउंडिंग पार्टनर पीयूष सिंह ने कहा, NCLAT ने अपने आदेश में एनसीएलटी (NCLT) के फैसले को बरकरार रखा है। वेव मेगा सिटी की याचिका को खारिज करना एक स्वागत योग्य है, क्योंकि इससे होमबायर्स के अधिकारों की रक्षा हुई है। स्पष्ट है कि बिल्डर कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता है।
रियल्टी फर्म ने किया था आवेदन
Wave Megacity Centre ने मार्च 2021 में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के सेक्शन 10 के तहत NCLT से संपर्क किया था। यह सेक्शन कर्जदार को डिफॉल्ट की स्थिति में अपने खिलाफ दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देता है। रियल्टी फर्म ने 2021 में अपनी याचिका में दावा किया था कि उसने नोएडा अथॉरिटी को 1,222.64 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है और अब वह बकाया चुकाने में सक्षम नहीं है।
बीते साल जून में, NCLT ने वेव मेगासिटी सेंटर की अपने खिलाफ दिवालिया की कार्रवाई शुरू करने से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया था। साथ ही केंद्र सरकार की एजेंसी से रियल एस्टेट कंपनी द्वारा फंड के डायवर्जन के आरोपों की जांच कराने के निर्देश दिए थे।
नोएडा अथॉरिटी ने मार्च 2011 में वेव समूह को शहर के सेक्टर-25 और सेक्टर-32 में 6,14,000 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन किया था। इस जमीन पर वेब समूह की कंपनियों ने आवासीय और वाणिज्यिक योजनाएं लॉन्च कीं। इसे ही वेव सिटी सेंटर का नाम दिया गया था। वर्ष 2016 में बिल्डर ने प्राधिकरण को आवेदन देकर जमीन लौटाने की बात कही। हालांकि, जमीन वापस लौटाने की अर्जी पर कोई फैसला नहीं हो पाया। इसके बाद बिल्डर ने प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी के तहत एक आवेदन किया। जिसमें 4.50 लाख वर्ग मीटर जमीन वापस लेने की बात कही। इस दौरान बिल्डर ने प्राधिकरण को जमीन के बदले पैसा चुकाना बंद कर दिया।